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ललितपुर में एसआईटी ने चार लोगों को रिमांड पर लिया:नाबालिग से रेपकांड का मामला, 20 मई शाम पांच बजे तक की मिली रिमांड

ललितपुरएक महीने पहले
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ललितपुर जिले के थाना पाली क्षेत्र अंतर्गत 13 साल की किशोरी के साथ हुए रेप मामले की जांच कर रही एसआईटी टीम ने आरोपी इंस्पेक्टर को भागने में मदद करने के मामले में जेल से सिपाही सहित चार लोगों को 2 दिन की कस्टडी रिमांड पर ले गई। गुरूवार को सुबह एसआईटी टीम जिला कारागार पहुंची, जहां जेल में बंद सिपाही सुनील कुमार के अलावा ड्राईवर रामनरेश, कार मालिक अशोक सोनी, हरीशंकर को दो दिवसीय कस्टडी रिमांड पर पूछताछ के लिए ले गई। सूत्रों से पता चला कि एसआईटी टीम ने कुछ वाहन के सम्बन्ध में पूछतांछ की, जिस वाहन से आरोपी इंस्पेक्टर को ललितपुर से महोबा तक ले जाया गया था। इसके अलावा किस स्थान पर आरोपी को छोड गया।

दुष्कर्म मामले में भेजा गया जेल

बतातें चले कि ललितपुर जिले के पाली थाना क्षेत्र में 13 साल की किशोरी के साथ हुए रेप मामले में आरोपी थानाध्यक्ष तिलकधारी सरोज को भागने में मदद करने के मामले में एसआईटी टीम ने बुधवार को लाइन हाजिर चल रहे सिपाही सुनील कुमार, ड्राइवर रामनरेश, कार मालिक अशोक सोनी व हरीशंकर सोनी को समेत चार को गिरफ्तार का न्यायालय में पेश किया था, जहां से सभी आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया था, तो वहीं एसआईटी टीम ने न्यायालय से आरोपियों की कस्टडी रिमाण्ड मांगी थी, जिस पर न्यायालय द्वारा चारों आरोपियों की कस्टडी रिमांड 19 मई की सुबह 9 बजे से 20 मई की शाम 5 बजे तक का दिया गया है।

मामले में 12 लोगों को भेजा जा चुका जेल

इस मामले में पुलिस ने तत्कालीन थानाध्यक्ष तिलकधारी सरोज के अलावा पीडि़ता की मौसी गुलाबरानी के साथ ही साथ गैंगरेप करने वाले आरोपी चंदन, हरीशंकर, महेन्द्र चौरसिया व राजभान को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था। इसके अलावा एसआईटी टीम ने आरोपी चंदन की मां ज्ञानबाई व भाई धर्मेन्द्र को भी मदद करे करने के मामले में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। इस प्रकार इस मामले में मुख्य 6 आरोपियों सहित 12 को जेल भेजा जा चुका है।

नाबालिग को भोपाल ले गए थे आरोपी

बता दें कि 2 अप्रैल को ललितपुर चाइल्ड लाइन की टीम 13 साल की किशोरी व उसकी मां को लेकर एसपी के पास पहुंची थी। यहां पीडि़ता की मां ने पुलिस अधीक्षक को बताया था कि 22 अप्रैल को कस्बा पाली निवासी चंदन, राजभान, हरीशंकर व महेंद्र चौरसिया उनकी 13 वर्षीय नाबालिग पुत्री को बहला फुसलाकर भोपाल ले गए। वहां तीन दिन तक उसका रेप किया। 25 अप्रैल को चारों लडक़े उनकी बेटी को पाली थाने में दरोगा के पास छोडक़र भाग गए। दरोगा ने लडक़ी को उसकी मौसी को सौंप दिया। मौसी द्वारा लडक़ी को एक आरोपी चंदन की बहन के पास दो दिन के लिए भेज दिया।

27 अप्रैल को थाने में पीडि़ता को फिर से बुलाया। उसका बयान लिया। शाम हुई तो लडक़ी को एसएचओ तिलकधारी सरोज कमरे में ले गए। वहां रेप किया। बाद में लडक़ी को उसकी मौसी को सौंप दिया। इसकी कोई भी सूचना लडक़ी के माता पिता को नहीं दी। 30 अप्रैल को लडक़ी को दोबारा थाने बुलाया। एसएचओ द्वारा पीडि़ता को चाइल्ड लाइन एनजीओ को सौंप दिया। चाइल्ड लाइन में बच्ची की कांउसलिंग की गई तो पीडि़ता ने एसएचओ के रेप करने वाली घटना बताई। 2 मई को चाइल्ड लाइन पीडि़ता और उसकी मां को लेकर एसपी के पास पहुंचे और आपबीती बताई। एसपी के आदेश पर 2 मई को आरोपी थानाध्यक्ष पाली तिलकधारी सिंह सरोज, चन्दन, राजभान, हरीशंकर, महेंद्र चौरसिया और पीडि़ता की मौसी के खिलाफ केस दर्ज किया गया था।

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