पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

प्राचीन मंदिर संकटा देवी के दर्शन करने पहुंचे भक्त:साक्षात माता लक्ष्मी का माना जाता है मंदिर, भगवान कृष्ण ने मूर्ति की थी स्थापना

लखीमपुर-खीरी2 महीने पहले
  • कॉपी लिंक

लखीमपुर खीरी शहर के मध्य भाग में स्थित प्राचीन संकटा देवी मंदिर की मान्यता अपरंपार है। जिसमें भक्त दर्शन पाकर ही अपनी मुंह मांगी मुराद पूरी कर लेते हैं। इस मंदिर को साक्षात माता लक्ष्मी का मंदिर माना जाता है।जो श्रद्धालु इस मंदिर के प्रांगण में घुसकर माता संकटा देवी के दर्शन करते हैं। मां संकटा देवी उनके कष्टों को क्षण मात्र में हर लेती हैं। ऐसा लखीमपुर वासियों का मानना है।

मंदिर के इतिहास पर गौर करें तो प्राचीन काल में लखीमपुर खीरी खैर के जंगल बहुत हुआ करते थे। इसके चलते लखीमपुर का नाम लक्ष्मीपुर हुआ करता था। बताया जाता है कि पांडवों के अज्ञातवास के समय में पांडव इसी लक्ष्मीपुर में अज्ञातवास काट रहे थे। इसी दौरान माता द्रोपदी के कहने पर भगवान कृष्ण ने मंगला देवी की मूर्ति की स्थापना की थी। उस समय लखीमपुर खीरी में घनघोर शेर का जंगल हुआ करता था।

मंदिर में भक्तों का भीड़ लगा रहता है। माता रानी भक्तों का कष्ट हर लेती हैं।
मंदिर में भक्तों का भीड़ लगा रहता है। माता रानी भक्तों का कष्ट हर लेती हैं।

यहां पर एक मंदिर का निर्माण हुआ
समय बदलता गया और इस छोटी सी मठिया को तत्कालीन महेवा स्टेट के राजा कुंवर सुत्तन सिंह के पिता ने जीर्णोद्धार कराया। यहां पर एक मंदिर का निर्माण हुआ। उस समय जनपद के तमाम लोग इस मंदिर में मुंडन संस्कार अन्नप्राशन संस्कार समेत कई संस्कार करवाने आते थे। यहां पर मुंडन संस्कार में बकरे की बलि दी जाती थी।

बलि देने पर प्रतिबंध लगा दिया गया
महेवा स्टेट के राजाओं ने जानवरों की बलि देने पर प्रतिबंध लगा दिया। उन्होंने कहा कि अगर बलि देना ही है तो आप खोए से बकरे की आकृति बनाकर बलि दे सकते हैं। वर्तमान समय में मंदिर प्रबंधन समिति के अध्यक्ष महेवा स्टेट गिर्राज परिवार के सदस्य होते हैं। हर नवरात्रि पर मंदिर के विशेष आयोजन और पूजा अर्चना में राज परिवार का अहम योगदान भी रहता है। वर्तमान समय में मां संकटा देवी का मंदिर जिले में ही नहीं कई जिलों में चर्चा का विषय बना है।

माता का दर्शन करने के लिए पहुंची महिलाएं।
माता का दर्शन करने के लिए पहुंची महिलाएं।

मूर्ति बनाने के लिए बंगाली कारीगर आए
नवरात्रि के दौरान मंदिर में माता का जागरण प्रदेश की नामी जागरण कंपनी द्वारा किया जाता है। विभिन्न तरीके से माता की मूर्ति बनाने के लिए बंगाली कारीगर भी बुलाए जाते हैं। जो माता की मूर्ति बनाकर तैयार करते हैं।नवरात्रि के समापन के बाद माता की मूर्ति को शारदा नगर स्थित शारदा नदी में प्रवाहित किया जाता है।

खबरें और भी हैं...