पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

लखीमपुर में मारे गए किसानों के घर से REPORT:पिता बोले- फैसला पहले आता तो बेटा जिंदा होता; पत्नी बोलीं- आरोपियों को सजा दिलाऊंगी

लखीमपुर/बहराइच6 महीने पहले
  • कॉपी लिंक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीनों कृषि कानून वापस लेने की घोषणा की है, लेकिन दिल्ली से करीब 500 किमी दूर लखीमपुर हिंसा में मारे गए किसानों के घर में अभी मातम ही है। हिंसा में लखीमपुर और बहराइच के दो-दो किसानों की मौत हुई थी। हालांकि, इस फैसले के बाद भी किसी परिवार में गुरु नानक पर्व पर गुरुद्वारा जाने की तैयारियां की जा रहीं है तो कहीं गुरुद्वारे से परिवार लौट आया है। आस पड़ोस में तो गुरु नानक पर्व और कृषि कानूनों की वापसी की खुशी है, लेकिन मृतक किसान के घरवाले अपनों के गम में खोये हुए हैं।

लवप्रीत के पिता ने कहा- मेरा तो बेटा चला गया

लखीमपुर से 28 किमी दूर चौखड़ा फार्म के रहने वाले लवप्रीत के पिता सतनाम सिंह के घर सुबह से ही गुरुद्वारे जाने की तैयारी घर में चल रही थी। बेटा तो रहा नहीं, लेकिन उसकी आत्मा की शांति के लिए गुरुद्वारे जाकर प्रार्थना परिवार को करनी थी। अचानक सबको पता चला कि सरकार ने तीनों कृषि कानून वापस ले लिए। गांव में खुशी का माहौल था, लेकिन परिवार दुखी था। घर में सब इकठ्ठा बैठे हुए हैं।

लवप्रीत के पिता सतनाम सिंह कहते हैं कि मेरा 19 साल का बेटा लवप्रीत किसानों के समर्थन में अपना विरोध दर्ज कराने तिकोनिया गया था। हमें नहीं पता था कि वह आखिरी बार घर से जा रहा है। सरकार को यह फैसला तब ही लेना चाहिए था, जब किसानों ने विरोध शुरू कर दिया था। अब फैसला वापस लेने से मेरा बेटा या जो किसान इस आंदोलन की वजह से मारे गए हैं, वापस तो आएंगे नहीं। यह कहते हुए सतनाम और घर की महिलाओं की आंखों में आंसू आ गए। उनकी हालत देख कर यही लग रहा है कि भले ही किसान जंग जीत गए हों, लेकिन एक परिवार यह जंग कभी नहीं जीत पाएगा।

लवप्रीत के गांव में खुशी का माहौल था, लेकिन परिवार दुखी था। घर में सब इकठ्ठा बैठे हुए हैं।
लवप्रीत के गांव में खुशी का माहौल था, लेकिन परिवार दुखी था। घर में सब इकठ्ठा बैठे हुए हैं।

नक्षत्र सिंह के बेटे ने कहा- मैं अनाथ हो गया

3 अक्टूबर को तिकोनिया हिंसा में मारे गए नक्षत्र सिंह बुजुर्ग थे। उन पर जीप चढ़ा दी गई थी। ऐसा वीडियो भी सामने आया था। नक्षत्र के परिवार को भी सुबह टीवी से सरकार के फैसले की जानकारी मिली तो एक बार फिर उनकी आंखें भर गईं। नक्षत्र के बेटे जगदीप सिंह मायूस घर के सामने बैठे हैं। आसपास के लोग गुरुपर्व पर सरकार के फैसले के बाद जगदीप से मिलने पहुंचे हैं। पड़ोस के लोगों का मानना है कि इससे फैसले से परिवार के गम में कुछ तो कमी आएगी। हालांकि, परिवार कहता है कि हम कैसे उन्हें भूल जाएं।

जगदीप बताते हैं कि पिता हमारे घर के मुखिया थे। जिस दिन उन्हें तिकोनिया जाना था तो किसी ने रोका नहीं। चूंकि हम भी किसान हैं। बॉर्डर पर भले ही न जाए पाए, लेकिन घर के पास में तो हम विरोध कर ही सकते थे। जालिमों ने हमारे पिता पर गाड़ी चढ़ा दी। हमारे सिर से पिता का साया उठ गया। अगर सरकार इसी फैसले को अपनी जिद छोड़कर पहले लेती तो हो सकता है मेरे पिता समेत सैकड़ों किसानों की जान बच जाती।

आसपास के लोग गुरुपर्व पर सरकार के फैसले के बाद जगदीप से मिलने पहुंचे हैं।
आसपास के लोग गुरुपर्व पर सरकार के फैसले के बाद जगदीप से मिलने पहुंचे हैं।

दलजीत सिंह की पत्नी बोली- जब तक मंत्री का इस्तीफा नहीं तब तक इंसाफ नहीं मिलेगा

बहराइच से लगभग 35 किमी दूर तिकोनिया हिंसा में मारे गए दलजीत सिंह के घर पर सन्नाटा पसरा हुआ है। आसपास रहने वाले रिश्तेदार गुरुपर्व पर गुरुद्वारा गए हैं, लेकिन मृतक किसान का परिवार अभी घर पर ही है। परिवार में मां, बेटा ही इस समय घर पर मौजूद हैं। जबकि बेटी लखनऊ पढ़ने चली आई है। पति की मौत को एक महीना ही बीता है।

दलजीत की पत्नी परमजीत कौर कहती हैं कि सरकार चाहे फैसला वापस ले या न लें। हमें बस इंसाफ चाहिए। यह सरकार जिद्दी है तो हम भी जिद्दी हैं। जब तक गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र टेनी की बर्खास्तगी और उसके बेटे को सजा नहीं हो जाती है, तब तक हम नहीं मानते कि इंसाफ मिला है। मृतक दलजीत के भाई जगजीत सिंह कहते हैं कि अगर सरकार ने यह फैसला पहले वापस लिया होता तो तिकोनिया में हमारे लोगों की जान नहीं जाती।

दलजीत के आसपास रहने वाले रिश्तेदार गुरुपर्व पर गुरुद्वारा गए हैं, लेकिन मृतक किसान का परिवार घर पर ही है।
दलजीत के आसपास रहने वाले रिश्तेदार गुरुपर्व पर गुरुद्वारा गए हैं, लेकिन मृतक किसान का परिवार घर पर ही है।

किसान गुरुमिंदर सिंह के भाई बोले- एमएसपी कानून के बिना लड़ाई अधूरी

मृतक किसान गुरुमिंदर के घर वाले गुरुद्वारे गए हुए हैं। घर पर सन्नाटा पसरा है। फोन पर भाई गुरुसेवक ने बताया कि इस फैसले वापसी से तिकोनिया में मारे गए किसानों की आत्मा को शांति नहीं मिलेगी। शांति तभी मिलेगी जब सरकार किसानों की मांग मान लेगी। अभी तक एमएसपी पर गारंटी सरकार नहीं दे रही है। जब यह कानून बन जाएगा, तभी किसानों की लड़ाई खत्म होगी।

मृतक किसान गुरुमिंदर के भाई गुरुसेवक कहते हैं अभी लड़ाई खत्म नहीं हुई है।
मृतक किसान गुरुमिंदर के भाई गुरुसेवक कहते हैं अभी लड़ाई खत्म नहीं हुई है।