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लखीमपुर के दो मृतक किसानों का बही-खाता:एक के परिवार की माली हालत बेहद खराब, दूसरे की ठीक; मां बोली- बेटे का कनाडा में पढ़ने का सपना रह गया अधूरा

लखीमपुर खीरी/ लखनऊ3 महीने पहलेलेखक: आदित्य तिवारी
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लखीमपुर खीरी शहर से करीब 70 किलोमीटर दूर पलिया गांव है, वहीं खीरी के निघासन से करीब 60 किलोमीटर दूर धौहररा इलाका है। इन दोनों ही जगहों पर सिख किसान बसे हुए हैं। इन्हीं के बीच से लवप्रीत (19) और नक्षत्र (56) अपने साथियों के साथ 3 अक्टूबर को लखीमपुर किसान आंदोलन में शामिल होने गए थे, मगर लौटे सिर्फ उनके शव।

लखीमपुर खीरी के निघासन में पंजाब से आकर बसे नक्षत्र सिंह नामदार पुरवा गांव लहबड़ी, धौहररा के रहने वाले थे। किसान परिवार में जन्मे नक्षत्र 1984 के सिख दंगे में भी अपना गांव छोड़कर नहीं गए। मगर उनके अगल-बगल रहने वाले दर्जनों परिवार पंजाब वापस चले गए। नक्षत्र सिंह ने पूरा परिवार बसाया और दो बेटों और एक बेटी को पढ़ाया-लिखाया। नामदार गांव में उनके अलावा दो परिवार और सिख हैं, बाकी हिंदू-मुस्लमान रहते हैं। 4 एकड़ खेती में नक्षत्र सिंह गन्ना, पिपरमिन्ट, सब्जी उगाने की खेती करते थे।

पढ़िए दोनों मृतक किसानों का बही खाता, ताकि जान सकें उनके परिवारों की माली हालत क्या है-

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