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गोला में नेपाली हाथियों ने जमकर मचाया उत्पात:मंदिर का गेट तोड़ा, फसलों को किया नष्ट, 3 माह से टिका है हाथियों का दल; नवजात शिशु भी शामिल

गोला गोकर्ण नाथ2 महीने पहले
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गोला गोकर्णनाथ के महेशपुर वन रेंज में एक सप्ताह से टिके हांथियो के झुंड ने मंगलवार को गांव बिहारी पुर झाला में कई किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचाया है, साथ ही भुईयां देवी मंदिर के गेट को भी तोड़ दिया है। वन प्रशासन द्वारा हाथियों को खदेड़ने के सम्बन्ध में लापरवाही को लेकर किसानों में काफी आक्रोश पनप रहा है। वहीं रेंजर नरेशपाल सिंह का कहना है कि जंगल के चारों ओर खंदक लगाई जा रही है। पटाखे, मिर्च सुलगाकर खदेड़ा जा रहा है लेकिन हाथियों के साथ नवजात शिशु है इसलिए वापस होने में समय लग रहा है।

बता दें कि यह हाथी नेपाल शुक्ला फाटा नेशनल पार्क से करीब 3 माह पहले पीलीभीत के जंगल होते हुए लखीमपुर में आये थे। तब से लेकर यह दुधवा टाइगर रिजर्व व मैलानी वन रेंज से लेकर मोहम्मदी वन रेंज तक उत्पात मचा रहे हैं। वन विभाग हाथियों को खदेड़ने की लाख कोशिश करने का दावा करता है लेकिन, हकीकत कुछ और ही है , क्षेत्र का किसान इन हाथियों के आतंक से परेशान है।

हाथियों ने गन्ने की फसल को पहुंचाया नुकसान।
हाथियों ने गन्ने की फसल को पहुंचाया नुकसान।

हाथियों के झुंड में नवजात शिशु भी शामिल
महेशपुर वन रेंजर नरेशपाल सिंह ने बताया कि इस बार अधिक दिनों तक हाथियों के इस क्षेत्र में रूकने का कारण यह रहा कि हाथियों के झुण्ड में 11 सितंबर को एक नवजात का जन्म हुआ था। नवजात के जन्म के बाद से हाथी टिके हुए हैं। खुटार-गोला रोड के जंगल को पार करते समय लोग शोर मचाकर उल्टा खदेड़ने का काम करते हैं, जिसकी वजह से यह वापस नहीं जा पा रहे हैं। करीब 25 हाथियों के झुण्ड में 1हाथी का शिशु भी शामिल है।

अपने पुरखों के रास्ते का ही अनुसरण कर रहे हाथी
वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक नेपाल के शुक्लाफाटा से आने वाले हाथी अपने पुरखों के रास्ते पर ही चल रहे हैं। उन्होंने यहां तक पहुंचने के लिए वहीं रास्ता अपनाया, जो उनके पुरखे अपनाते रहे हैं। पिछले वर्षों के अनुभव बताते हैं कि नेपाल से गणेश चतुर्थी के पहले यहां आकर हाथी दिवाली तक प्रवास करते हैं।

लोगों ने ंमुआवजे की मांग की।
लोगों ने ंमुआवजे की मांग की।

फसलें रौंदे जाने से किसान बेहद नाराज हैं
पीड़ित किसानों का कहना है कि पिछले साल भी हाथियों ने उत्पात मचाया था लेकिन, मुआवजा के नाम पर फूटी कौड़ी तक नहीं मिली। वही इस सम्बन्ध में जिम्मेदार यह हमेशा ही कहते नजर आते हैं कि अभी मुआवजा दिलवाने की कार्रवाई चल रही है। इस साल भी फसल नुकसान का सर्वे कराया जा रहा है।

इन किसानों की फसलें हुई तबाह
(1) गुरपाल सिंह (सोड्डी) - 3 बीघा गन्ना

(2) इकबाल सिंह पुत्र जीत सिंह4 बीघा गन्ना

(3) सुखजिंदर सिंह - 03 बीघा गन्ना

(4) परमिंदर सिंह 02 बीघा गन्ना 2/धान 2 बीघा

(5) अमरीक सिंह - गन्ना 03 बीघा

(6) इंद्रजीत सिंह - गन्ना 2 बीघा / 1 बीघा धान

(7)हरविंदर सिंह गन्ना - 1 बीघा

(8) राजपाल सिंह- गन्ना 3 बीघा

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