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गोला गोकर्णनाथ में 8 सूत्रीय सुझाव-पत्र एसडीएम को सौंपा:आवारा जानवरों की समस्या को मुख्य रूप से रखा, आम जनमानस भी परेशान

गोला गोकर्ण नाथ2 महीने पहले
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तहसील गोला क्षेत्र में आवारा पशुओं का आतंक आये दिन देखने को मिल रहा है। किसानों के साथ-साथ अब आम जनमानस भी इनकी वजह से परेशान हो रहा है। हाल ही में खुटार रोड पर दो सांड़ आपसी संघर्ष में रोड पर आ गये थे जिससे संसारपुर की ओर से आ रही अल्टो गाड़ी टकराकर खाई में लटक गयी थी हालांकि कोई अनहोनी नहीं हुई थी।

वहीं दूसरी ओर किसान अपनी फसलों को रात-रात जागकर आवारा पशुओं से बचा रहे हैं। इस प्रकार की समस्याओं को लेकर राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के जिलाध्यक्ष अंजनी दीक्षित ने मुख्यमंत्री को 8 बिन्दुओं पर एक सुझाव-पत्र एसडीएम गोला द्वारा भेजा है।

सुझाव-पत्र में किसान नेता ने बताया कि आवारा जानवरों से परेशान होकर किसान भुखमरी के कगार पर पहुंच रहे हैं और दुर्घटनाओं के कारण पशु और मनुष्य दोनों को जान का खतरा व गौ माताओं की जख्मी हालत देखकर राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन अपना सुझाव भेजकर निम्नलिखित बिंदुओं पर आपका ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं।

1 - बछड़ों और सांड़ों का पशुपालन विभाग द्वारा वृहद अभियान चलाकर बधियाकरण किया जाए। जिससे सांड़ों की उग्रता कम होगी और गर्भ धारण किए हुए गौ माताओं की सुरक्षा हो सकेगी।

2- अस्थाई गौशाला में ग्राम पंचायतों के जरिए मनरेगा के लेवल लगाकर बछड़ों और सांड़ों को खेत जोतने की ट्रेनिंग देकर ग्राम पंचायत द्वारा कृषि उपकरण कल्टीवेटर मिट्टी पलट हल आदि कृषि यंत्र खरीददारी कर अस्थाई गौशाला में स्थापित किए जाएं। डीजल की महंगाई को देखते हुए ग्राम पंचायत किसानों के खेतों की कम किराए पर जुताई कराई जाए। जुताई में आया पैसा ग्राम पंचायतों में खाता खुला कर संरक्षित किया। जिससे पशुओं की देखभाल में खर्च किया जा सके। जब 1 लीटर डीजल लगभग ₹95 में मिलता है, अगर एक बीघा खेत की जुताई ₹50 में हो जाती है तो किसान को भी फायदा होगा। वह खुशी-खुशी ग्राम पंचायत में जुताई शुल्क जमा कर देंगे।

3-गर्भधारण करने वाली गायों को कृत्रिम बीज (सीमेन)पशुपालन विभाग द्वारा डाला जाए जिससे दुधारू नस्ल की बिछिया का जन्म हो सके और देश में दूध का उत्पादन बढ़े मशीनरी युग में नर बछड़े पैदा ना होने पाए।

4-गाय के दूध पर कम से कम ₹10 प्रति लीटर सब्सिडी प्रदान की जाए।

5- अस्थाई गौशालाओं में टीनसेड, चन्नी,व फर्स ऐसे मॉडल से बनाई जाए जिससे गोमूत्र स्वयं एकत्रित होकर एक टैंक में जाए । गोमूत्र से कीटनाशक दवाएं कृषि कार्य हेतु बनाई जाएं ।

6- अस्थाई गौशाला में गौ के गोबर से गोबर गैस का टैंक और गोबर से धूप बत्ती, जैविक खाद, केचुआ खाद आदि अन्य उत्पाद तैयार कर रोजगार के अवसर पैदा किए जाएं। जिसको ग्राम पंचायत द्वारा बिक्री कर पशुपालन कार्य में खर्च किया जाए।

7- प्रदेश में गोवंशीय पशुओं की जनगणना कराई जाए और नए संसाधन उत्पन्न कर गौ पालन हेतु किसानों को प्रेरित किया जाए।

8- अस्थाई गौशाला और ग्राम पंचायतों में पशुपालन विभाग से एक पशु सेवक की नियुक्ति की जाए जो बीमार एवं जख्मी पशुओं के इलाज कराने के लिए उचित संसाधन की व्यवस्था पशु सेवक के माध्यम से कराई जाए।

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