पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

गोला गोकर्ण नाथ में चल रही रासलीला:मंचन में श्रीकृष्ण और सुदामा की हुई पहली भेंट, सुदामा के पैर से ने निकाला कांटा; श्रोता हुए भाव-विभोर

गोला गोकर्ण नाथ2 महीने पहले
  • कॉपी लिंक

गोला गोकर्णनाथ के मेला मैदान परिसर में चल रही रासलीला में मंगलवार की रात वृंदावन के कलाकारों ने श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता का मार्मिक मंचन किया। श्रीकृष्ण द्वारा सुदामा के पैर से कांटा निकालने का दृश्य देख श्रोता भाव विभोर हो गए। उसके बाद रास रचाए वृंदावन में व छोटी-छोटी गैया छोटे-छोटे ग्वाल.. पर नृत्य कर दर्शकों का कलाकारों ने मन मोह लिया।

मंगलवार को हुए प्रसंग में दिखाया गया कि जब भगवान श्री कृष्ण उज्जैन में संदीपनी ऋषि के आश्रम में शिक्षा ग्रहण करने के लिए जा रहे थे ,तो रास्ते में सुदामा दर्द से कराह रहे थे। श्रीकृष्ण ने अपने सारथी से पूछा कि जंगल में व्याकुल अवस्था में यह कौन रो रहा है ? कुछ दूर पर बैठे रो रहे सुदामा के पास सारथी गया और उसने श्रीकृष्ण को बताया कि किसी व्यक्ति के पैर में कांटा चुभ गया है इसलिए वह असहनीय पीड़ा से कराह रहा है।

श्रीकृष्ण और सुदामा की हुई मित्रता
इस पर श्रीकृष्ण सुदामा के पास जाते हैं यही से उनकी पहली मुलाकात विप्र सुदामा से होती है। उन्होंने देखा कि सुदामा पैर में कांटा लगने के बाद दुख से तड़प रहे हैं। श्रीकृष्ण सुदामा के पैर में चुभे हुए कांटे को निकालने के लिए हाथ आगे बढ़ाते हैं तो सुदामा उन्हे रोक देते हैं। सुदामा कहते हैं कि मैं गरीब ब्राह्मण और आप राजशाही परिवार के प्रतीत होते हैं , आप कैसे मेरे पैर छू सकते हैं ।

गोला गोकर्णनाथ के मेला मैदान परिसर में चल रही रासलीला में मंगलवार की रात वृंदावन के कलाकारों ने श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता का मार्मिक मंचन किया।
गोला गोकर्णनाथ के मेला मैदान परिसर में चल रही रासलीला में मंगलवार की रात वृंदावन के कलाकारों ने श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता का मार्मिक मंचन किया।

श्रीकृष्ण सुदामा को रथ में बिठाकर पाठशाला ले गये
इस पर भगवान श्रीकृष्ण ने उनको समझाया कि इस संसार में विधि के विधान से आगे कुछ नहीं। मित्रता में कोई गरीब और अमीर नहीं होता और न ही कोई छोटा-बड़ा। सच्चा मित्र वही है, जो मित्र से आत्मवत व्यवहार करे और मुसीबत में काम आये । उसके बाद जंगल में मिले सुदामा के पैर में चुभा कांटा मुख से निकाला एवं मित्रता करके अपने रथ में बैठा कर गुरु संदीपनी के आश्रम में ले गए।

खबरें और भी हैं...