पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

श्रीरामलीला में राम ने किया वन गमन:कैकेयी ने वरदान की दिलाई राजा दशरथ को याद, पुत्र वियोग में पिता ने त्यागे प्राण

गोला गोकर्ण नाथ, लखीमपुर खीरी2 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
गोला गोकर्णनाथ में रामलीला के छठें दिन श्रीराम के वन प्रस्थान का मंचन किया गया।

गोला गोकर्णनाथ में रामलीला के छठें दिन श्रीराम के वन प्रस्थान का मंचन किया गया। कैकेई के वरदान से आहत होकर महाराज दशरथ बेसुध हो गए। भगवान श्रीराम मां सीता और भाई लक्ष्मण के साथ वन को निकल गए। महाराजा दशरथ का कुछ दिन बाद श्री राम के वियोग में स्वर्गवास हो गया।

महाराज दशरथ अयोध्या का भगवान श्रीराम को राजा बनाने की घोषणा करते हैं। दूसरी ओर कैकेई कोप भवन में चली जाती हैं। जब राजा दशरथ वहां पहुंचे तो कैकेई पूर्व में दिए गए वरदान का उन्हें स्मरण कराती हैं। राजा से वह अपने वरदान में राम को 14 वर्ष का वनवास और पुत्र भरत को राजगद्दी मांगती है।

गोला गोकर्ण में चल रही रामलीला में अभिनय करते कलाकार।
गोला गोकर्ण में चल रही रामलीला में अभिनय करते कलाकार।

कैकेयी के वरदान पर वन जाने के तैयार हुए श्रीराम

श्री रामलीला के इस प्रसंग में जब श्री राम अपने पिता दशरथ से मिलने कैकेई भवन गए तो कैकेई ने उन्हें अपने वरदान बताएं तो श्रीराम सहर्ष तैयार हो गए। मां कौशल्या से वन जाने की आज्ञा ले ली। मां सीता भी वन जाने को तैयार हो गईं। दूसरी ओर लक्ष्मण भी वन जाने की जिद करने लगे। श्री राम के समझाने के बाद भी वह अपनी मां सुमित्रा से आज्ञा लेकर वन जाने की तैयारी कर ली। तीनों वल्कल धारण कर माता-पिता से मिलकर वन की ओर चल दिए।

रामलीला में पुत्र के वियोग में राजा दशरथ के प्राण त्यागने का मंचन किया गया।
रामलीला में पुत्र के वियोग में राजा दशरथ के प्राण त्यागने का मंचन किया गया।

रासलीला में कृष्ण ने अरिष्ठासुर को किया परास्त

श्री रामलीला के वन गमन प्रसंग में अयोध्या के समस्त नर नारियों को रोते बिलखते हे राम! हे राम! करते देखा गया। श्री राम के वन गमन से आहत होकर राजा दशरथ ने प्राण त्याग दिए। रात्रि में हुए रासलीला कार्यक्रम में कृष्ण ने अरिष्ठासुर को परास्त किया। इस प्रसंग में वृंदावन में एक बड़ा बैल घुस गया और उसने अचानक से गांव के लोगों पर आक्रमण करना शुरू कर दिया। उस बैल ने कई लोगों के घर को तोड़ दिया, जिस कारण कई लोगों को चोट भी लगी।

जब कृष्ण को इस बात का पता चला तो वह तुरंत उस बैल के पास पहुंचे। कृष्ण ने अपनी शक्ति से उसे परास्त कर दिया। परास्त करते ही वह बैल भगवान कृष्ण के समक्ष नतमस्तक होकर बैठ गया। उसके बाद उसने कृष्ण को बताया कि वह भगवान बृहस्पति का शिष्य है। अपने गुरु के साथ दुर्व्यवहार करने के कारण उसे असुर बनने का श्राप मिला था। इस प्रकार कृष्ण ने ब्रज के लोगों को अरिष्ठासुर से बचाया।

खबरें और भी हैं...