पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

गोला की रामलीला में सीता-हरण और रावण-जटायु का मंचन:8वें दिन दर्शकों की उमड़ी भीड़, राम ने खाये शबरी के झूठे बेर

गोला गोकर्ण नाथ2 महीने पहले
  • कॉपी लिंक

गोला गोकर्णनाथ में चल रही रामलीला के मंचन पर 8वें दिन सोमवार की शाम मारीच वध और सीता हरण की लीलाओं का मंचन किया गया । सीता हरण के बाद जटायु-रावण युद्ध व राम ने शबरी के झूठे बेर खाने का मंचन किया गया । शाम के रासलीला कार्यक्रम में जालंधर और देवराज इन्द्र के बीच युद्ध का मंचन हुआ।

मंचन की शुरूआत इस प्रकार है कि पंचवटी में राम, सीता और लक्ष्मण बैठे हैं। इसी बीच वहां रावण की बहिन सूर्पणखा आती है और राम की मोहिनी छवि पर रीझ जाती है। लक्ष्मण उसके कान और नाक काट देते हैं जिसके बाद चिल्लाती हुई सूर्पणखा अपने भाई रावण के पास जाकर सारा वृत्तांत सुनाती है ।

मायावी मारीच स्वर्णमृग बन कर वन में आता है

अपनी बहन के साथ इस प्रकार के कृत्य के बाद रावण अपने मामा मायावी मारीच को स्वर्णमृग बना कर पंचवटी भेजता है। स्वर्णमृग को देख सीता ने राम से उसका आखेट कर मृगचर्म लाने के लिए आग्रह करती हैं। राम लक्ष्मण को सीता की सुरक्षा का भार सौंप कर मृग के पीछे चले जाते हैं।

रावण ने साधु का भेष धारण कर किया सीता हरण

राम के बाण से आहत मारीच राम के ही स्वर में हाय लक्ष्मण! की पुकार लगाता है, जिसे सुनकर सीता व्याकुल हो जाती हैं और लक्ष्मण को उनकी सहायता के लिये जाने के लिए आदेशित करती हैं। लक्ष्मण कुटिया के बाहर एक रेखा खींच और उसके बाहर नहीं आने का अनुरोध करके चले जाते हैं। उसी क्षण साधु वेश धारण कर रावण वहां आकर भिक्षा मांगता है और सीता का हरण कर लेता है।

राम ने खाये शबरी के झूठे बेर

पक्षीराज जटायु का रावण से घनघोर युद्घ होता है और अंतत: जटायु का प्राणांत हो जाता है। उसका अंतिम संस्कार राम अपने हाथों से करते हैं। इसके बाद सीता की खोज करने निकलते हैं तो मार्ग में शबरी से भेट होती है ,जहां पर प्रेमवश राम जानते हुए भी शबरी के झूठे बेर का स्वाद लेते हैं ।

रासलीला कार्यक्रम में इन्द्र-जलंधर युद्ध का मंचन

वही श्रीराम लीला के मंच पर रासलीला के कार्यक्रम में जलंधर और देवराज इन्द्र के बीच युद्ध दिखाया गया। भगवान शिव ने अपना तेज समुद्र में फेंक दिया था ,इससे जलंधर उत्पत्ति हुई। इसलिए इसे शिव पुत्र भी कहा गया। जलंधर की शक्ति थी उसकी पत्नी वृंदा, जिसके पतिव्रत धर्म के कारण सभी देवी-देवता जलंधर मिलकर भी उसे पराजित नहीं कर पा रहे थे। जलंधर को इससे अपने बल का अभिमान हो गया और वह वृंदा के पतिव्रत की अवहेलना करके देवताओं की स्त्रियों को और देवताओं को परेशान करने लगा। जब जलंधर इन्द्रलोक पहुँचा तो वहां पर इन्द्र और जलन्धर का युद्ध हुआ। जिसके इन्द्र की हार होती है और वह भगवान शंकर की शरण लेते हैं।

खबरें और भी हैं...