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गोला गोकर्णनाथ में इज्जत घर की इज्जत खतरे में:अधिकांश शौचालय हुए जर्जर, डीपीआरओ ने कहा- 12000 रूपये में अच्छी गुणवत्ता का शौचालय सम्भव नहीं

गोला गोकर्ण नाथएक महीने पहले
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गोला गोकर्णनाथ तहसील के विकासखंड बांकेगंज के कई ग्राम पंचायतों में शौच के लिए घर से बाहर न जाने के लिए बनाए गए घरों में इज्जत घर की इज्जत खतरे में नजर आ रही है। कई गांव में ग्रामीणों से वार्ता करने पर जानकारी हुई है कि अधिकांश शौचालय ठेके पर बनवा दिए गए हैं और उनके शौचालय का पैसा कब आया और कब निकल गया उनको जानकारी ही नहीं हो पाई।

ग्राम प्रधान व सेक्रेटरी ने मिलकर खेला खेल
आपको बताते चलें कि कई जगह पर है। ऐसे शौचालय बनवा दिए गए थे, जिनमें नींव ही नहीं पड़ी है। ग्राम पंचायत को ओडीएफ दिखाने के चक्कर में ग्राम प्रधान व सेक्रेटरी ने मिलकर खूब खेल खेला है। लोगों ने बताया कि शौचालय बनाने में अधिकांश बालू का प्रयोग किया गया है। बांकेगंज में नहर नजदीक होने से यहां पर बालू आसानी से मिल जाती है, जिसका इस्तेमाल शौचालय बनवाने में किया गया है।

जर्जर अवस्था में शौचालय
जर्जर अवस्था में शौचालय

कई गांवों में है समस्या
ग्रामीणों ने यह भी बताया कि कब उनके खाते में पैसे आए और निकल गए यह जानकारी भी नहीं है उनको। पंचायत मित्र आए अपने मिस्त्री और लेवर लेकर उन्होंने फटाफट शौचालय तैयार करवा दिए। बांकेगंज की ग्राम पंचायत ग्रन्ट नम्बर 10 के चौधीपुर, पूरनपुर, अर्जुनपुर, पसियापुर, देवीपुर, छेदीपुर आदि ऐसे कई गांव हैं, जहां पर ओडीएफ दिखाने के लिए जल्दबाजी में शौचालय बनवा दिए गए और उनकी गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दिया गया।

गांव के लोग खुले में शौच जाने के लिए मजबूर
परिणाम यह हुआ कि आज वह शौचालय जर्जर अवस्था में हैं। शौचालय की सीट धस चुकी है, प्लास्टर छूट रहा है, छत गिरने की कगार पर है और अधिकांश शौचालय तो बिना दरवाजे के हैं। इसलिए ग्राम पंचायत के अधिकांश गांव में लोग खुले में शौच जाने के लिए मजबूर हैं।

ये है शौचालयों की दशा
ये है शौचालयों की दशा

स्थानीय लोगों ने बयां किया दर्द
अर्जुनपुर गांव निवासी ओमवीर का कहना है कि पूर्व ग्राम प्रधान व पंचायत सचिव ने मिलकर थोक के भाव शौचालय तो बनवा दिए, लेकिन उनकी गुणवत्ता पर ध्यान न दिया, जिसका नतीजा कि शौचालय जर्जर हो रहे हैं। ​अधिवक्ता पवन का कहना है कि बहुत से लोगों के खाते में शौचालय का पैसा न भेजकर प्रधान और सेक्रेटरी ने मिलकर उनके शौचालय बनवा दिए, जिसमें जमकर बालू का प्रयोग हुआ है।

लोगों ने कहा- भ्रष्टातार तो हुआ है
बांकेपुर निवासी मंगलसिंह ने बताया कि उनका तो शौचालय ही नहीं बना है, लेकिन जिनके बने हैं, अब वह जर्जर होते जा रहे हैं, क्योंकि ओडीएफ दिखाने के चक्कर में जल्दबाजी में शौचालय बनवा दिए। हीरालाल का कहना है कि 12000 रूपये शौचालय के लिए मिलते हैं, उनमें मंहगाई के जमाने में कहां से बढ़िया सामग्री लगवाकर अच्छा शौचालय बनवाया जाए। बाकी भ्रष्टाचार तो हुआ है।

स्थानीय निवासी
स्थानीय निवासी

जांच का दिया आश्वासन ​​​​​​​
इस सम्बन्ध में जिला पंचायत राज अधिकारी सौम्यशील सिंह ने बताया कि 12000 रूपये में अच्छी गुणवत्ता के शौचालय का निर्माण सम्भव नहीं है। जो जागरूक लोग थे, उन्होंने अपने पास से पैसा लगाकर अच्छा निर्माण कर लिया लेकिन, जो सरकार के पैसे के सहारे थे वह शौचालय जर्जर हो रहे हैं। स्वच्छ भारत मिशन जिस मोड में चला था, उसमें तो यह था कि जैसे भी हो शौचालय बनवाओ, हुआ यह कि जनपद में 2 वर्ष में 5,40,000 शौचालय बनवाना बहुत बड़ी बात थी, इसलिए कहीं न कहीं कमी रही है। पन्द्रहवे वित्त आयोग में शौचालय की मरम्मत के लिए 1500 रूपये की व्यवस्था की गई है। इसमें लाभार्थी आवेदन करेगा उसको रूपये दिए जायेंगे साथ ही जांच भी की जाएगी।

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