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खड्डा का बोधीछपरा गांव कबड्डी खिलाड़ियों की नर्सरी:संसाधनों के अभाव में दम तोड़ रही प्रतिभाएं, मिट्टी में प्रेक्टिस करने को हैं मजबूर

खड्डाएक महीने पहले
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खड्डा तहसील क्षेत्र का बोधी छपरा गांव कबड्डी के राष्ट्रीय खिलाड़ियों की नर्सरी है। यहां के कई खिलाड़ी राष्ट्रीय प्रतियोगिता में अपना जौहर दिखा चुके हैं। लेकिन, संसाधनों के आभाव में अब उनकी प्रतिभा दम तोड़ रही है। जिससे उन्हें अपना भविष्य अंधकार में जाता नजर आ रहा है।

छपरा गांव में खिलाड़ी मिट्टी में ही प्रेक्टिस करने को मजबूर हैं। वे जनप्रतिनिधियों से लेकर अधिकारियों तक से संसाधन उपलब्ध कराने की गुहार लगा चुके हैं। लेकिन, आज तक इस ओर किसी ने भी ध्यान नहीं दिया गया है। हाल ही में गांव के कबड्डी खिलाड़ी ने अंडर-14 आयुवर्ग की राष्ट्रीय प्रतियोगिता में 2019 में सिल्वर मेडल हासिल किया था। फिलहाल, समीर 17 साल के हो गए हैं।

राष्ट्रीय प्रतियोगिता में सिल्वर मेडल हासिल करने वाले संदीप यादव
राष्ट्रीय प्रतियोगिता में सिल्वर मेडल हासिल करने वाले संदीप यादव

प्रतियोगिताओं में पिछड़ा महसूस करने लगे हैं खिलाड़ी

भास्कर संवाददाता से वार्ता के दौरान अपनी शील्ड व प्रमाण पत्रों को दिखाते हुए संदीप यादव ने बताया कि गांव के प्राथमिक विद्यालय में वर्ष 2016 से कबड्डी खेलना शुरु किया था। लेकिन, आज भी मिट्टी में प्रैक्टिस करनी पड़ती है। उन्होंने बताया कि अब सभी प्रतियोगिताएं मैट पर ही होती हैं। जबकि मैट और मिट्टी के गेम में काफी फर्क होती है। ऐसे में वह प्रतियोगिता में अन्य खिलाड़ियों के अपेक्षा पिछड़ा महसूस करते हैं।

मैट न होने के चलते हो जाती है सीरियस इंजरी

संदीप बताते हैं कि मिट्टी में प्रैक्टिस करने के दौरान कई बार सीरियस इंजरी भी हो जाती है। जिससे टूर्नामेंट के लिए की गई पूरी मेहनत पर पानी फिर जाता है। वहीं, कोच और फीजियोथेरेपिस्ट के आभाव में कई बार इंजरी से उबर पाना भी मुशकिल होता है।

कई खिलाड़ियों ने कबड्डी छोड़कर शुरु की खेती

संदीप से पहले गांव के साहब यादव भी वर्ष 2014 में नेशनल खेल चुके थे। वहीं संतोष यादव, नन्हे यादव, अनिल भ यादव, रोशन यादव, बाल्मीकि यादव, नितेश कुशवाहा, दुर्गेश साहनी भी राज्यस्तरीय प्रतियोगिताओं में अपना दम दिखा चुके हैं। लेकिन, संसाधन के आभाव में उनकी प्रतिभा ने गांव में दम तोड़ दिया। बढ़ती उम्र के साथ-साथ उनके सामने रोजगार संकट भी गहराने लगा। फिलहाल सभी गांव के बच्चों को कबड्डी सिखा रहे हैं। इसके साथ ही घर चलाने के लिए खेती करने को मजबूर हैं।

कई बार जनप्रतिनिधियों से लगा चुके हैं गुहार

संदीप बताते हैं कि गांव में संसाधन नहीं होने के कारण हम सभी को अथक परिश्रम करना पड़ता है। हम सभी ने सांसद और पूर्व विधायक जटाशंकर त्रिपाठी से कबड्डी के खेल को प्रोत्साहित करने के लिए संसाधन की मांग किया। लेकिन आज तक मैदान में मैट ही नहीं लगवाई गई है। अब हमें नवनिर्वाचित विधायक विवेकानन्द पाण्डेय से ही आस है।

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