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हाटा में गेहूं क्रय केंद्र देख रहे किसानों की राह:तत्काल पेमेंट होने से परेशानी हो रही दूर, तमाम दिक्कतों से मिला छुटकारा

हाटाएक महीने पहले
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तहसील क्षेत्र हाटा के किसानों ने इस बार पिछले साल की अपेक्षा बहुत कम गेहूं क्रय केंद्रों पर दिया है। जबकि पिछले वर्ष क्रय केंद्रों पर गेहूं बेचने के लिए किसानों को दो से तीन दिनों तक लाइन लगा रात दिन इंतजार पड़ता था। तहसील क्षेत्र हाटा के मोतीचक ब्लॉक की बात करें तो मोतीचक में केवल एक गेहूं खरीद केंद्र बनाया गया है। जिसमें 2850.50 कुंटल गेहूं 91 किसानों द्वारा बेचा गया है। जबकि सुकरौली विकासखंड में चार क्रय केंद्र बनाए गए है, जिसमें केवल पट्टन गोदाम स्थित क्रय केंद्र पर 192 किसानों द्वारा 5718.800 कुंटल गेहूं बेचा गया है,जो पिछले वर्ष की अपेक्षा बहुत ही कम है।

आखिर किसान अपना गेहूं क्रय केंद्रों पर क्यों दें?

तहसील क्षेत्र हाटा के किसानों को इस बार गेहूं बेचने में पिछले वर्ष से अधिक मुनाफा भी मिला तथा बेचने के लिए झंझट भी कम झेलनी पड़ी। जब कि बीते वर्ष में किसानों को गेहूं बेचने के लिए क्रय केंद्रों पर कई -कई दिनों तक लाइन लगाकर गाड़ियों के नीचे सोना पड़ता था। नंबर आने पर उनके गेहूं का तौल होता था तथा 10 से 15 दिन बाद उनके खाते में पेमेंट आता था। पिछले सत्र में हाटा क्षेत्र के किसानों के लिए सबसे बड़ी समस्या बैंक के कन्वर्जन को लेकर था। पूर्वांचल बैंक को बैंक ऑफ बड़ौदा में कन्वर्ट होने की वजह से किसानों का पैसा बैंक में जाने में काफी समय लग गया। जिससे किसान काफी दिनों तक बैंक तथा क्रय केंद्रों का चक्कर लगाते ही रह गए लेकिन इस बार क्रय केंद्रों पर किसान एक्का -दुक्का ही पहुंच रहे हैं। क्योंकि क्रय केंद्र पर गेहूं का जो समर्थन मूल्य है। उससे ज्यादा प्राइवेट में ही किसानों दरवाजे पर मिल जा रहा है।

गेहूं बेचने जाते किसान
गेहूं बेचने जाते किसान

गेहूं के समर्थन मूल्य से ज्यादा प्राइवेट में मिल रही कीमत

शासन द्वारा इस वर्ष गेहूं का सरकारी रेट 2015 रूपये प्रति क्विंटल तय किया गया है। जबकि स्थानीय व्यापारियों द्वारा 1950 से लेकर दो हजार बीस रूपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं खरीदा जा रहा है। जबकि वहीं फ्लोर मिलों पर गेहूं की कीमत 2040 से 2060 रुपए प्रति कुंतल तक है। सरकारी क्रय केंद्र पर गेहूं बेचने के लिए किसानों को केंद्र तक अपने साधन से गेहूं ले जाना होता है और वहां पल्लेदारी भी देनी पड़ती है। जहां 70 से ₹80 प्रति कुंटल तक खर्चा आ जाता है। ऑनलाइन पंजीकरण और राजस्व कर्मियों से प्रमाणित कराने का झंझट अलग से। यही नहीं गेहूं का भुगतान किसानों के खाते में आने में कम से कम एक सप्ताह से 15 दिन का समय लग जाता है। जबकि प्राइवेट व्यापारी स्वयं किसान के दरवाजे पर जाकर गेहूं खरीदता है और नगद पैसा देता है।

क्रय केंद्रों पर मौजूद किसान
क्रय केंद्रों पर मौजूद किसान

स्थानीय व्यापारियों को बेचना हो रहा आसान

जिसके चलते किसानों को इस बार सरकारी क्रय केंद्र की बजाय स्थानीय व्यापारियों को गेहूं बेचना आसान लग रहा है।*किसानों ने कहा क्रय केंद्रों पर गेहूं बेचने में झंझट ।दरवाजे पर बेचना आसान*नगर पंचायत सुकरौली के बड़े काश्तकार सुनील दत्त शाही ने बताया कि मैं प्रत्येक साल गेहूं क्रय केंद्रों पर दो से तीन सौ क्विंटल गेहूं देता था। लेकिन इस बार क्रय केंद्रों पर गेहूं न देकर दरवाजे से 1950 रुपये प्रति कुंतल भाव से बेच दिया हु।क्यों कि क्रय केंद्रों पर गेहूं बेचने के लिए भाड़ा पल्लेदारी आदी मिला कर खर्च 70 से ₹80 प्रति कुंतल आ जाता है। और ऑनलाइन पंजीकरण आदि का झंझट रहता है।

किसान वीरेंद्र तिवारी ने बताया कि इस बार गेहूं का रेट प्राइवेट में अच्छा है। दरवाजे से बेचने पर ही अच्छा खासा रेट मिल जा रहा है तो फिर क्रय केंद्रों पर बेंचने से क्या फायदा ।जँहा पलदारी आदी का झंझट होता है। तथा पेमेंट भी आने में टाइम लग जाता है। जब कि प्राइवेट में बनिया सब दरवाजे से ही नगद अच्छी कीमत देकर गेहूं खरीद ले जा रहे हैं।

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