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नरेंद्र गिरि का सुसाइड नोट सवालों के घेरे में:करीबियों का दावा लिखना पढ़ना नही जानते थे आखड़ा परिषद के अध्यक्ष, दूसरों का आत्मविश्वास बढ़ाते थे नरेंद्र गिरी, आत्महत्या नही कर सकते

कानपुरएक महीने पहले
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नरेंद्र गिरी - Money Bhaskar
नरेंद्र गिरी

अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरी की मौत का रहस्य गहराता जा रहा है। उनके संपर्क में रहने वाले लोगों का दावा है कि नरेंद्र गिरी लिखना पढ़ना ही नहीं जानते थे। ऐसे में पुलिस को मिला 8 पन्ने का सुसाइड नोट अपने आप में बड़े सवाल खड़े कर रहा है। हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद साफ हो सकेगा कि मौत की असल बजह क्या रही है। फिलहाल नरेंद्र गिरी के संपर्क में रहने वाले लोगों इस बात पर विश्वास नहीं हो रहा है, कि अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष ने आत्महत्या की होगी। गंगा सफाई आंदोलन में कानपुर के श्रमिक नेता रामजी त्रिपाठी के साथ नरेंद्र गिरी भी शामिल हुए थे। इस दौरान दोनों में काफी घनिष्ठता बढ़ गई थी। रामजी त्रिपाठी का दावा हैं कि नरेंद्र गिरी को कुछ भी पढ़ना लिखना नही आता था। यही दावा नरेंद्र गिरी के शिष्य आनद गिरी ने भी किया है।

शिष्य ही लिखते - पढ़ते थे नरेंद्र गिरी के पत्र

रामजी त्रिपाठी बताते है कि जब भी नरेंद्र गिरी जी को कुछ भी पढ़ना होता था, तो वह अपने शिष्य को बुलाकर पढ़ाते थे। इसी तरह से लिखवाने के लिए भी किसी को बुला कर ही पत्र लिखबाते थे। उन्होने बताया कि जब ऐसा पहली बार उनके सामने हुआ कि एक पत्र को पढ़ना था। तो नरेंद्र गिरी ने शिष्य को बुलाया और पत्र पढ़वाया। इस पर रामजी त्रिपाठी के पूछने पर उन्होंने बताया था कि वह लिखना पढ़ना नही जानते है। राम जी त्रिपाठी ने बताया कि गंगा सफाई आंदोलन में लिखे गये पत्रों में उनका नाम अंकित कर दिया जाता था। प्रयागराज में नरेंद्र गिरी के शिष्य सतीश शुक्ल ने भी बताया कि गुरु से पिछले कुछ वर्षों में सिर्फ हस्ताक्षर करना शीख पाये थे। लेकिन वह 8 पन्ने लिख नही सकते थे। उनके हस्ताक्षर से आत्महत्या में लिखे पत्र का मिलान बेहद जरूरी है। सतीश का दावा है कि वह एक लाइन नही लिख सकते थे।

आरोपी शिष्य आनंद गिरी का दावा गुरु जी नही आता था लिखना पढ़ना

नरेंद्र गिरी के आरोपी शिष्य का भी दावा है, कि नरेंद्र गिरी को लिखना पढ़ना नही आता था। सुसाइड नोट में आनंद गिरि का नाम आने के बाद उन्होंने हरिद्वार से सुसाइड नोट पर बड़े सवाल खड़े किए हैं और कहा है कि गुरुजी को लिखना पढ़ना नहीं आता था। ऐसे में 8 पन्ने का सुसाइड नोट किसी के द्वारा लिखा गया है। उन्होंने आत्महत्या नहीं की है बल्कि उनकी साजिश के तहत हत्या की गई है और अब उनको भी फ़साने की कोशिश की जा रही है। आपको बता दे कि आनंद गिरी का नाम आने के बाद उनको उत्तराखंड पुलिस ने हिरासत में लेकर यूपी पुलिस को सौप दिया है। यूपी पुलिस उनको लेकर प्रयागराज पहुँच रही है।

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