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कानपुर हिंसा मामले में पहली जमानत:प्रिंटिंग प्रेस मालिक के खिलाफ 19 दिन में कोर्ट के सामने एक भी सबूत नहीं रख सकी पुलिस

कानपुर3 महीने पहले
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पुलिस ने कानपुर हिंसा मामले में शंकर लाल रमानी को आरोपी बनाकर जेल भेज दिया था। कोर्ट ने अब जमानत दे दी है। - Money Bhaskar
पुलिस ने कानपुर हिंसा मामले में शंकर लाल रमानी को आरोपी बनाकर जेल भेज दिया था। कोर्ट ने अब जमानत दे दी है।

कानपुर में 3 जून को हुई हिंसा में सोमवार को प्रिंटिंग प्रेस मालिक शंकर लाल रमानी को जमानत मिल गई। पुलिस की लचर पैरवी और सबूत न जुटा पाने की वजह से अतिरिक्त जिला जज की कोर्ट ने यह फैसला सुनाया। हिंसा के मामले में यह पहली जमानत है।

एक भी सबूत नहीं पेश कर सकी पुलिस
अधिवक्ता प्राण नाथ मिश्रा ने बताया कि पुलिस ने 6 जून को ब्रह्मनगर स्थित शोभा ग्राफिक्स के मालिक शंकर लाल रमानी को पूछताछ के लिए बुलाया था। 8 जून को गिरफ्तारी दिखाकर use जेल भेज दिया। मगर, कोर्ट में पुलिस शंकर लाल के खिलाफ एक भी सबूत नहीं पेश कर सकी। इसके चलते अतिरिक्त जिला जज की कोर्ट ने 1 लाख रुपए के बॉन्ड पर रिहा करने के आदेश दिए।

20 स्टीकर छापे गए थे
अधिवक्ता ने बताया कि प्रिंटिंग प्रेस में कानपुर बंद को लेकर 20 स्टीकर छापे गए थे। सभी स्टीकर में नियम के मुताबिक प्रेस का पूरा पता भी छापा गया था। स्टीकर में कानपुर बंद की सिर्फ अपील थी। कोई भड़काऊ बात नहीं छापी गई थी। वहीं पुलिस सीडीआर में भी शंकर लाल हिंसा वाले दिन उस क्षेत्र में मौजूद नहीं थे। सबूतों के अभाव में पुलिस ने शंकर लाल को जमानत दी है।

गंभीर धाराओं में बनाया था आरोपी
अधिवक्ता ने बताया कि पुलिस ने शंकर लाल पर 7 सीएलए समेत हिंसा करने, घातक शस्त्र का प्रयोग करने, संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, हत्या के प्रयास करने का आरोपी बनाया था। लेकिन कोर्ट में एक भी आरोप सिद्ध नहीं हो सका।

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