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कोरथा के 5 परिवारों की कहानी:किसी का पूरा परिवार उजड़ गया, किसी के बेटे का सपना टूटा; अर्थियां उठी तो कंधे कम पड़े

कानपुर4 महीने पहले
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एक झटके में कोरथा गांव के 26 लोगों की मौत हो गई। गांव की हर गली में शव और रोते-बिलखते लोग दिख रहे थे। अंतिम विदाई की बारी आई, तो अर्थियों को कंधा देने वाले लोग कम पड़ गए। किसी परिवार ने अपने मुखिया को खो दिया तो किसी ने बेटी-बेटा। दैनिक भास्कर 5 परिवारों की कहानी लेकर आया है। इन परिवारों ने 14 सदस्यों को खो दिया।

  • पढ़िए ग्रांउड रिपोर्ट

परिवार 1. एक ही आंगन में छह अर्थियां, कम पड़े कंधे

सियाराम के घर के चबुतरे पर बैठे लोगों के पास शब्द नहीं थे।
सियाराम के घर के चबुतरे पर बैठे लोगों के पास शब्द नहीं थे।

भास्कर टीम कोरथा गांव के सियाराम के घर पहुंची। झोपड़ी नुमा इस घर के एक कोने में सियाराम बैठे दिखे। उन्होंने इस हादसे में अपनी पत्नी फूलमती, बेटे श्रीराम की पत्नी जय देवी और उसका बेटा रवि, दूसरे बेटे राम दुलारे की पत्नी लीलावती, बेटा रोहित और बेटी मनीषा को खो दिया।

घर का सन्नाटा दिल चीर रहा था। हमारे बिना पूछे ही सियाराम की आंखों में आंसू आ गए। फिर वो घर के बाहर रखे शव को देखने लगे। हम भी कुछ देर के लिए इसी घर के चबुतरे पर बैठ गए। कुछ देर में बाहर से आवाज आई कि श्मशान चलना है, अर्थी उठाओ। एक साथ 6 शव उठाए जाने थे। मगर रोते बिलखते लोगों में कंधा देने वाले भी कम पड़ गए। परिवार में सिर्फ 4 लोग बचे थे। पहला कंधा परिवार का ही सदस्य देता है। कुछ पुलिस वाले और कुछ गांव के लोगों ने कंधा दिया। एंबुलेंस में रखकर शवों को श्मशान तक पहुंचाया गया।

परिवार 2. बाबू जी नहीं थे, अब अम्मा और बिटिया भी छोड़कर चली गईं

ये दृश्य सुनीता के घर के बाहर था। शव रखे थे, मगर घर में इतने लोग नहीं बचे कि कंधा दे सके।
ये दृश्य सुनीता के घर के बाहर था। शव रखे थे, मगर घर में इतने लोग नहीं बचे कि कंधा दे सके।

इसके बाद हम करीब 20 कदम की दूरी पर सुनीता के घर पहुंचे। गांव की कुछ महिलाएं उन्हें संभाल रही थीं। बोलीं कि पहले बाबू जी नहीं रहे। अब अम्मा और बिटिया भी छोड़कर चली गईं। आखिरी बदनसीबी कब तक पीछा करेगी…। हमें भी उठा लेते भगवान। ये चीत्कारें गांव के लोगों का दिल दहला रही थी। ये परिवार तारा देवी का है। तारा देवी के पति टिल्लू का पहले निधन हो चुका है। अब उनकी भी मौत हो गई। साथ में तारा के बेटी सुनीता की चार साल की बेटी पारुल भी नहीं रही।

परिवार 3. कल्लू बोले- मेरा पूरा कुनबा उजड़ गया

कल्लू के घर में उनकी पत्नी विनीता की बहन तस्वीर लेकर रोती हुई दिखीं।
कल्लू के घर में उनकी पत्नी विनीता की बहन तस्वीर लेकर रोती हुई दिखीं।

अब हम एक और घर के करीब पहुंचे। गांव के एक शख्स ने बताया कि ये कल्लू का घर है। हादसे में उनका पूरा परिवार ही खत्म हो गया। राजू निषाद के बेटे के मुंडन में उनकी पत्नी विनीता और दो बच्चे गए थे। पत्नी और चार वर्षीय बेटा शिवम व पांच वर्षीय बेटी जानकी की मौत हो गई।

ये तस्वीर कल्लू के घर के बाहर की है। लाशें देखकर लोगों का दिल दहल रहा था।
ये तस्वीर कल्लू के घर के बाहर की है। लाशें देखकर लोगों का दिल दहल रहा था।

हम थोड़ा और आगे बढ़े, तो देखा कि कल्लू घर के बाहर बैठे रो रहे थे। बुदबुदा रह थे कि अच्छा भला बच्चे स्कूल जा रहे थे। विनीता को मुंडन में जाना था। जिद बच्चे कर बैठे कि हम भी जाएंगे। बच्चों को भेजना ही नहीं चाहिए था। मेरी गलती है, अब किसके सहारे जिंदगी चलेगी।

परिवार 4. मैं तो बच्चों की शादी तक नहीं कर सका
गांव में रहने वाली केसकली की भी हादसे में मौत हो गई। बेटा पंकज घायल हो गया। केसकली की मौत के बाद पति देशराज यही कहकर दहाड़े मारकर रोते रहे कि बच्चों की शादी का सपना-सपना ही रह गया। हमें अकेले छोड़कर चली गईं केसकली। परिवार के कई लोग हैलट में थे, गांव के लोगों की मदद से केसकली का अंतिम संस्कार हुआ।

परिवार 5. मां और बेटी को अंतिम विदाई भी नहीं दे सका

राजू घर नहीं लौटा, तो उसके परिवार में रिश्तेदारों ने अंतिम संस्कार किया।
राजू घर नहीं लौटा, तो उसके परिवार में रिश्तेदारों ने अंतिम संस्कार किया।

हादसे में मुख्य आरोपी का घर भी यहां से थोड़ी दूर था। भले ही उसे दोष दिया जा रहा हो, लेकिन हादसे में उसने भी अपने खो दिए। हादसे में राजू की मां राम जानकी और बेटी रिया उर्फ बिंदिया की मौत हो गई। जबकि पत्नी ज्ञानवती अपने दुधमुंहे बेटे के साथ हैलट में भर्ती हैं। परिवार के लोगों और रिश्तेदारों ने दोनों का अंतिम संस्कार किया। मां-बाप बेटी का आखिरी बार चेहरा भी नहीं देख सके।