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हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक बनी कैंट की रामलीला:64 साल से हो रहा है मंचन, मुस्लिम समाज के लोग भी करते हैं सहयोग

कानपुर2 महीने पहले
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रेल बाजार, कैंट में हर साल आयोजित होने वाली रामलीला हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक बन गई है। करीब 64 साल से श्री छावनी रामलीला कमेटी हर साल इसका आयोजन करती आ रही है। खास बात ये है कि इस रामलीला के मंचन में मुस्लिम समाज के लोग भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। यहीं वजह है कि कमेटी में मुस्लिम सदस्यों को भी जिम्मेदारी दी गई है। वह तन-मन और धन से पूरा सहयोग देते हैं। रामलीला में स्मारिका प्रमुख से लेकर मीडिया प्रभारी का कार्य मुस्लिम समाज के लोग संभाल रहे हैं।

श्री छावनी रामलीला कमेटी के अध्यक्ष सिद्धार्थ काशीवार
श्री छावनी रामलीला कमेटी के अध्यक्ष सिद्धार्थ काशीवार

मुस्लिम समाज ने खड़ा किया था रावण का पुतला

64 साल पुरानी श्री छावनी रामलीला कमेटी के अध्यक्ष सिद्धार्थ काशीवार बताते हैं कि यह इलाके की सबसे बड़ी रामलीला है जो हिंदू-मुस्लिम एकता की प्रतीक बन गई है। 1960 में रामलीला मैदान में मंचन चल रहा था तभी अचानक रावण का पुतला गिर गया।

इससे वहां अफरा-तफरी मच गई। कमेटी को चिंता सताने लगी कि इतनी जल्दी पुतला कैसे तैयार होगा और फिर उसका दहन कैसे किया जाएगा। इसका पता चलते ही इलाके के मुस्लिम परिवार आगे आए। उन्होंने कमेटी के पदाधिकारियों संग कंधे से कंधा मिलाकर रातभर काम किया और रावण का पुतला फिर से जोड़कर खड़ा कर दिया।

शिरीष छावनी रामलीला कमेटी के कार्यवाह अजय प्रकाश तिवारी
शिरीष छावनी रामलीला कमेटी के कार्यवाह अजय प्रकाश तिवारी
श्री छावनी रामलीला कमेटी के स्मारिका समिति प्रमुख खालिद रशीद
श्री छावनी रामलीला कमेटी के स्मारिका समिति प्रमुख खालिद रशीद

महिलाओं को भी अहम जिम्मेदारी

इसके बाद से ही मुस्लिम समाज के लोग भी इस रामलीला में बढ़-चढ़कर हिस्सेदारी और सहयोग देते हैं। यहीं नहीं, सौ लोगों की कमेटी में सात मुस्लिम सदस्यों को भी रखा गया है। कमेटी के इकबाल राईना मंच सज्जा का काम देखते हैं। सिद्धार्थ बताते हैं कि यह शहर की ऐसी रामलीला कमेटी है जिसमें महिलाओं को भी जिम्मेदारी दी गई है। कमेटी का महिला प्रकोष्ठ भी है जो महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देखती हैं। महिला प्रकोष्ठ की अध्यक्ष पूनम सिंह और नारी शसक्तिकरण अभियान की संरक्षक अमिता गुप्ता है।

रामलीला मंचन के दौरान होने वाले हवन पूजन में सक्रिय भूमिका निभाते हैं, दलित समाज के पदाधिकारी शिवम स्वरूप और उनकी टीम
रामलीला मंचन के दौरान होने वाले हवन पूजन में सक्रिय भूमिका निभाते हैं, दलित समाज के पदाधिकारी शिवम स्वरूप और उनकी टीम

रामचरित मानस पर आधारित होती है रामलीला

सिद्धार्थ ने बताया कि रामलीला का मंचन रामचरित मानस पर आधारित होता है। रामलीला मंचन में पूरा पाठ और एक-एक प्रसंग का वर्णन रामचरित मानस के पर आधारित होता है। कलाकार भी संस्कृत और हिंदी में दोहा पढ़ते हैं। यह रामलीला इस बार 24 सितंबर को शुरू हुई थी जिसका समापन 7 अक्टूबर को होगा। इस दौरान विभिन्न तरह के आयोजन लोगों को आकर्षित करते हैं। उन्होंने बताया कि कमेटी के अन्य पदाधिकारी कोषाध्यक्ष सुशील वर्मा, रामलीला मंचन प्रमुख राम शंकर (बउआ), कार्यवाहक अजय प्रकाश तिवाी, महामंत्री अजय गुप्ता (राजू) एवं अन्य हैं।