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डेंगू से तप रहे UP में मिसाल बना… रामनगर:कानपुर के जिस कुरसौली में 13 जानें गईं, उसके दो किमी दूर 25 हजार आबादी वाले गांव में डेंगू को पैर पसारने नहीं दे रहे युवा

कानपुर3 महीने पहले
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कानपुर में कल्यानपुर ब्लॉक का कुरसौली गांव डेंगू से बीते 25 दिन में 13 अपनों को खो चुका है। तमाम लोग डेंगू के डर से पलायन भी कर चुके हैं...लेकिन इसी गांव से महज 2 किमी दूर रामनगर गांव खुद में एक नजीर बनकर सामने आया है। कोरोना की दूसरी लहर में इस गांव में 20 लोगों की मौत हुई थी। अब रामनगर गांव में डेंगू का एक भी केस नहीं है।

गांव की आबादी 24 हजार के आसपास है। गांव में रहने वाले 16 युवाओं एक टीम बना रखी है, जो दो शिफ्टों में काम करती है। कभी लोगों को ये युवा डेंगू, कोरोना, वायरल बुखार के प्रति जागरुक करते हैं तो कभी पूरे गांव में सफाई अभियान और एंटी लार्वा का छिड़काव किया जाता है। इस पर होने वाले खर्च को भी खुद उठाते हैं। गांव वाले अब जल्द अपनी एंबुलेंस भी लाने वाले हैं।

गांव वालों ने किस तरह खुद को सुरक्षित रखा? उनकी सफाई को लेकर क्या प्लानिंग है? इलाज के लिए कैसा इंतजाम रखते हैं? इन्हीं सब बातों पर रामनगर गांव से एक रिपोर्ट...

रामनगर में कोरोना के बाद से सक्रिय युवा।
रामनगर में कोरोना के बाद से सक्रिय युवा।

कोरोना की दूसरी लहर में 20 लोगों की हुई थी मौत
रामनगर गांव में कोरोना की दूसरी लहर के दौरान 20 लोगों की मौत हुई थी। अब गांव के लोग कोई भी जोखिम उठाने की स्थिति में नहीं थे। ग्रामीण क्षेत्रों में तेज बुखार और डेंगू के मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए रामनगर के लोग पहले से ही सक्रिय हो गए। रामनगरवासियों ने सबसे पहले गांव और आसपास के इलाकों से जलभराव खत्म कराया। साथ ही हर घर में तय किया कि कहीं भी और किसी भी घर में पानी का ठहराव ना होने पाए।
इसके लिए सबसे पहले कूलर के पानी को खाली कराया गया। गड्ढों के पानी में रेगुलर एंटी लार्वा का छिड़काव शुरू कराया गया। नालियों में हर दिन युवाओं की टीम छिड़काव में जुटी हुई है। छतों और खुले में पानी के भराव को हटाया गया।

बैठक कर लिया निर्णय, आपसी सहयोग से कर रहे छिड़काव
गांव के बुजुर्गों ने युवाओं के प्रयासों को सराहा और उनको प्रोत्साहित भी किया। सभी बुजुर्गों ने बैठक कर सहयोग करने की बात कही। कमेटी के अजय पांडेय ने बताया कि फिलहाल आपसी सहयोग से कोरोना में एकत्र किए गए फंड से काम चल रहा है। अजय का कहना है कि गांव में जिन्हें मामूली बुखार भी आया, उनके इलाज में पूरी एहतियात बरती गई। गांव के अजय शुक्ल ने बताया कि उन्हें बुखार हुआ तो उनके प्लेटलेट्स 35 हजार तक आ गए थे। सही समय पर सजगता के चलते नियंत्रण पा लिया गया।

कमेटी के सदस्य निर्मल त्रिवेदी ने बताया कि कोरोना की दूसरी लहर में बनाई गई इस युवा कमेटी को साल भर सक्रिय रखा जाएगा। अनूप बाजपाई ने बताया कि बहुत जल्द गांव में एक एंबुलेंस लाने की तैयारी है। इसे रामनगर के साथ आसपास के गांव में स्वाथ्य सेवाओ में लगाया जाएगा। अविलाष चंद्र पांडेय का कहना है कि आकस्मिक स्वाथ्य सेवाओं के लिए कमेटी का कुछ डाक्टर्स के साथ 24 घंटे संपर्क रहता है। हिमांशु शुक्ल ने बताया किसी ग्रामीण की तबीयत बिगड़ने पर नजदीक के एक निजी अस्पताल में इलाज कराया जाता है।

रामनगर गांव में एंटी लार्वा का छिड़काव करते यूथ कमेटी के सदस्य।
रामनगर गांव में एंटी लार्वा का छिड़काव करते यूथ कमेटी के सदस्य।

इमरजेंसी में निजी गाड़ियों को बनाते है एंबुलेंस
सिब्बू त्रिपाठी ने बताया कि कोरोनाकाल में रामनगर में टीम के द्वारा आक्सीजन सिलेंडर के अलावा ऑक्सीमीटर, थर्मामीटर, बीपी मशीन, शुगर टेस्टिंग मशीन सहित जीवन रक्षक सभी आवश्यक उपकरण उपलब्ध रहे हैं। इनका इस्तेमाल अभी भी हो रहा है। इमरजेंसी में घरेलू गाड़ियों को एंबुलेंस की तरह इस्तेमाल करते हैं।

कोरोना काल में 24 घंटे सक्रिय रहकर मौत के आंकड़ों को थामने का कार्य किया गया। रामनगर के इन युवाओं के कार्य आसपास चर्चा का विषय बने हुए हैं। टीम के सदस्य गोर बाजपेई का कहना है कि अब गांव की सेवा उन सभी युवाओं के जीवन का हिस्सा बन चुकी है।

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