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कानपुर में जर्जर मकान की छत गिरी, 3 की मौत:70 साल पुराने मकान में 11 परिवार के 41 लोग रहते थे, हादसे में मां और दो बच्चों ने दम तोड़ा; 11 लोगों को रेस्क्यू किया गया

कानपुर9 महीने पहले
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कानपुर में गुरुवार सुबह बड़ा हादसा हुआ। यहां बेकनगंज थाना क्षेत्र के रिजवी रोड पर एक जर्जर मकान अचानक भरभराकर ढह गया। मलबे में दबकर तीन लोगों की मौत हो गई। जान गंवाने वालों में 35 साल की रुखसाना और उनकी 7 साल की बेटी शिफा और 4 साल का बेटा नोमान शामिल है। एक अन्य राजू नाम का युवक घायल है। घायलों को उर्सला अस्पताल में भर्ती किया गया है। बाकी सभी लोगों को रेस्क्यू कर लिया गया है। सभी सुरक्षित हैं। पूरे घर को पुलिस ने खाली करा लिया है।

70 साल पुराने जर्जर मकान में रहते थे 11 परिवारों के 41 लोग
हीरामन के पुरवा में ताहिर अली के 70 साल पुराने तीन मंजिला मकान में 11 परिवार के 41 लोग रहते थे। जबकि मकान मालिक नई सड़क में रहते हैं। एसीपी अनवरगंज अकमल खान ने बताया कि राजू परिवार के साथ ग्राउंड फ्लोर के एक हिस्से में रहता था। जबकि उसके बगल और तीन मंजिल तक अलग-अलग कमरों में अन्य 10 परिवार रहते थे। सुबह राजू पत्नी रुखसाना और बच्चों के साथ जिस कमरे में सो रहा था, ठीक उसी के ऊपर वाली छत भरभरा कर सीधे बेड पर गिर पड़ी।

हादसे में दंपति और बच्चे मलबे में दबकर गंभीर रूप से घायल हो गए। मोहल्ले वालों की सूचना पर पहुंची पुलिस और फायर ब्रिगेड के जवानों ने पब्लिक की मदद से सभी को रेस्क्यू करके बाहर निकाला और उर्सला हॉस्पिटल पहुंचाया।

जांच के बाद डॉक्टरों ने राजू की पत्नी रुखसाना (35) और उसके दो बच्चे 7 साल की बेटी शिफा और 4 साल का बेटा नोमान को मृत घोषित कर दिया। पत्नी और बच्चों के मौत की जानकारी दोपहर बाद राजू को पता चलते ही वह अस्पताल में बदहवास हो गया। डॉक्टरों की टीम ने उसे किसी तरह संभाला।

घटना के वक्त घर में 20 से ज्यादा लोग मौजूद थे।
घटना के वक्त घर में 20 से ज्यादा लोग मौजूद थे।

रेस्क्यू के दौरान कांस्टेबल भी घायल

हादसे की सूचना मिलते ही लाटूश रोड फायर ब्रिगेड के जवान भी मौके पर पहुंचे। कांस्टेबल दीपेंद्र सिंह यादव अपनी जान जोखिम में डालकर भीतर घुस गया और मलबे में दबे सभी लोगों को बाहर निकाल रहा था। इस दौरान जर्जर छत का एक हिस्सा उसके ऊपर गिर पड़ा। इसके साथ ही भारी पत्थर के नीचे दबे परिवार को बचाने के लिए अधिक ताकत लगाने से उनके पेट में तेज दर्द उठा। जिससे वह गश खाकर गिर पड़े। दीपेंद्र को भी इलाज के लिए उर्सला में भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों ने दीपेंद्र की हालत सामान्य बताई है।

जर्जर मकान के गिरने के बाद से नगर निगम के कामकाज पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं।
जर्जर मकान के गिरने के बाद से नगर निगम के कामकाज पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं।

रेस्क्यू कर सभी परिवारों को निकाला गया
मकान में रहने वाले राजू के साथ ही शफीक, कल्लू, निशार, जुल्फकार, सलीम, गोगा, निहाल, बांके, लाम, नबी समेत अन्य सभी के परिवार के 41 लोगों को कड़ी मशक्कत से बाहर निकाला। इस दौरान आनन-फानन में सभी लोग अपनी जान बचाकर बाहर निकले। पुलिस ने अब मकान में किसी को भी जाने से रोक लगा दी है। 11 परिवार अचानक से सड़क पर आ गए हैं। पुलिस ने फिलहाल किसी को अभी अपनी गृहस्थी भी निकालने से रोक लगा दी है। जर्जर मकान के बाहर फोर्स तैनात कर दी गई है। इससे कि कोई भी भीतर नहीं जा सके।

इसी जर्जर मकान में हादसा हुआ। पुलिस अभी मौके पर पड़ताल कर रही है।
इसी जर्जर मकान में हादसा हुआ। पुलिस अभी मौके पर पड़ताल कर रही है।
हादसा तड़के सुबह हुआ, जब घर में सभी लोग सो रहे थे।
हादसा तड़के सुबह हुआ, जब घर में सभी लोग सो रहे थे।

राजू को होश आते ही बोला- अल्लाह मुझे भी उठा लेते
राजू को होश आते ही उसने पहले पत्नी और बच्चों के बारे में पूछा। काफी देर बात उसे पता चला कि पत्नी और दोनों बच्चों का इंतकाल हो गया है तो राजू फफक पड़ा। हॉस्पिटल में रोने लगा और बोला अल्लाह मुझे भी उठा लेते...। मुझे क्यों छोड़ दिया, मेरे बच्चों को तो बक्श देते..., उनके बदले मुझे उठा लेते। अस्पताल में राजू को बिलखता देख सभी की आंखें भर आईं।

घायल राजू को अस्पताल में भर्ती कराया गया।
घायल राजू को अस्पताल में भर्ती कराया गया।

जर्जर मकानों का शहर, हादसों का कहर...
कानपुर के इन पुराने इलाकों में एक-दो नहीं सैकड़ों जर्जर मकान हैं। जिनमें सैकड़ों परिवार अपनी जिंदगी दांव पर लगाकर रहते हैं। नगर निगम ने इस तरह के सैकड़ों जर्जर मकानों को चिह्नित करके नोटिस भी जारी किया है, लेकिन कोई खाली करने को तैयार नहीं है। इसी का नतीजा है कि कानपुर इन जर्जर मकानों में हर साल इसी तरह से बड़े हादसों में रहने वाले लोगों की मौत होती है।

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