पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

कानपुर से 'विजय संदेश' देंगे भागवत:8 अक्टूबर को आएंगे RSS प्रमुख, वाल्मीकि समाज को भाजपा के करीब लाने के लिए 3 दिन होगा मंथन

कानपुर2 महीने पहले
  • कॉपी लिंक

संघ का आज से स्वर संगम घोष शिविर शुरू हो रहा है। इसके कई राजनीतिक मायने निकाले जा रहे है। दलित वोटों को भाजपा की तरफ लाने की कोशिशें तेज हो गईं हैं। RSS प्रमुख मोहन भागवत 8 अक्टूबर को घोष शिविर में शामिल होंगे। साथ ही फूलबाग में वाल्मीकि समाज के कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि रहेंगे। RSS प्रमुख तीन दिन कानपुर में रहेंगे।

RSS के कानपुर प्रांत में 21 जिले आते हैं। उनके लिए घोष शिविर काफी राजनीतिक मायने रखता है। यहां पर स्वयंसेवकों के साथ छोटी-छोटी बैठकों में मोहन भागवत देश के प्रति उनका दृष्टिकोण जानेंगे। निकाय चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव के लिहाज से मोहन भागवत का कानपुर प्रवास बहुत अहम माना जा रहा है।

अब आपको बताते हैं कि कानपुर आयोजन कैसे अहम है...

संघ की कानपुर, बुंदेलखंड और पश्चिमी जिलों पर निगाहें

पंडित दीन दयाल सनातन धर्म विद्यालय में शिविर आयोजन की तैयारियां पूरी हो गईं हैं।
पंडित दीन दयाल सनातन धर्म विद्यालय में शिविर आयोजन की तैयारियां पूरी हो गईं हैं।

घोष शिविर और संघ की सक्रियता भाजपा के पक्ष में 3 विधानसभा क्षेत्रों में सीधे असर डाल सकती है। वर्तमान में कैंट, आर्यनगर और सीसामऊ पर समाजवादी पार्टी का कब्जा है। 1999 से पहले यहां से कांग्रेस प्रत्याशी जीतता रहा है। यूपी में इसी साल दिसंबर में होने वाले निकाय चुनाव को 2024 के लोकसभा चुनाव का सेमीफाइनल माना जा रहा है। इस लिहाज से भागवत की दलितों के कार्यक्रम में भागीदारी को इसी नजर से देखा जा रहा है।

भाजपा की चिंताओं को कम करने में जुटा संघ
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी साढ़े तीन हजार किमी. की पदयात्रा पर निकले हुए हैं। बिहार के नीतीश कुमार सभी विपक्षी दलों का साझा मंच तैयार करने में जुटे हुए हैं। वहीं, लालू प्रसाद यादव की सक्रियता से भाजपा में हलचल बढ़ी हुई है। भाजपा की इस चिंता से मुक्त करने में संघ भी जुट गया है। भागवत की मुस्लिम बुद्धिजीवियों से हालिया मीटिंग के बाद कानपुर में दलितों से मेल-जोल को लेकर चर्चा जोरों पर है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 4 शिविर में वाद्य यंत्रों की तरह प्रदर्शनी लगाई गई।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 4 शिविर में वाद्य यंत्रों की तरह प्रदर्शनी लगाई गई।

वाल्मीकि समाज की समस्याओं को समझेंगे संघ प्रमुख
9 अक्टूबर को वाल्मीकि जयंती पर कानपुर में 2 बड़े कार्यक्रम होते हैं। एक फूलबाग में वाल्मीकि विकास परिषद का और दूसरा मोतीझील में केंद्रीय वाल्मीकि मेला उत्सव समिति का होता है। पहले आयोजन की बागडोर दयाकुमार के हाथ में है, तो दूसरे के आयोजक प्रकाश हजारिया हैं। वाल्मीकि समाज के नेता राजू वाल्मीकि बताते हैं कि इस समाज की समस्याएं बहुत हैं। जिनका हल न बसपा सरकार में हो पाया और न ही सपा सरकार के कार्यकाल में। समाज की ओर से संघ प्रमुख मोहन भागवत को ज्ञापन देने की तैयारी है जिसमें प्रमुख मांग वाल्मीकि बस्तियों का स्वामित्व का रहेगा।

प्राइवेट हाथों में जाने से रोकने की करेंगे गुहार
दूसरी मांग सफाई कार्य करके जीविका चलाने वाले इस समाज की नौकरियों का निजी क्षेत्र में देने से छुटकारें की मांग है। निजी क्षेत्र में सफाई व्यवस्था जाने से वेतन सात-आठ हजार रुपया ही मिलता है, जिससे परिवार चलाना मुश्किल हो जाता है। दूसरी तरफ एक कार्यक्रम यह भी चल रहा है कि दलितों को भोजन के लिए घर बुलाओ। वाल्मीकि समाज के लोग कहते हैं कि राजनीतिक पार्टियां समाज को छलती रही हैं। भागवत जी के आने के बाद कुछ उम्मीद है। उनकी पहल पर समाज को समस्याओं से निजात मिल जाएगी।

जनवरी 2019 के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत यहीं पर आ रहे हैं।
जनवरी 2019 के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत यहीं पर आ रहे हैं।

वाल्मीकि समाज को करीब लाने की कोशिश
कानपुर वाल्मीकि समाज का गढ़ माना जाता है। यहां पर 27 ऐसी बस्तियां हैं, जहां इस समाज के लोग रहते हैं। इसके अलावा कुछ विधानसभा क्षेत्र में इनकी भूमिका निर्णायक भी बतायी जाती है। वाल्मीकि समाज और भाजपा के बीच की दूरियां अब तक बरकरार हैं। अब इसको भाजपा के करीब लाने की कवायद तेज कर दी गई है।

राजनीतिक गुणाभाग समझने के बाद अब आपको आयोजन के बारे में बताते हैं...

2025 में है शताब्दी वर्ष, तैयारियां अभी से शुरू
दशहरा के दिन 1925 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की नागपुर में स्थापना हुई थी। 2 वर्ष बाद 1927 में घोष वादन का कार्यक्रम प्रारंभ कर दिया गया था। अब 2025 में संघ का शताब्दी वर्ष होगा। इसके लिए तैयारी अभी से शुरू हो रही है। कानपुर के नवाबगंज के पंडित दीन दयाल सनातन धर्म विद्यालय में स्वर संगम घोष शिविर आयोजित हुआ है। शिविर के लिए दीनदयाल विद्यालय और वीएसएसडी कॉलेज में 1500 लोगों के ठहरने की व्यवस्था की गई है। सर संघचालक भी यहीं रहेंगे।

चलन से बाहर हो चुके वाद्य यंत्र भी देखे जा सकेंगे
वाद्य यंत्रों की प्रदर्शनी का उद्घाटन 6 अक्टूबर यानी आज शाम उत्तर प्रदेश नाट्य अकादमी के अध्यक्ष राजेश्वर आचार्य करेंगे। प्रदर्शनी के प्रमुख अजीत अग्रवाल ने बताया कि नाट्य शास्त्र में सुषिर वाद्य, चर्मज वाद्य, घन वाद्य, तंतु वाद्य रहते हैं।

पारंपरिक वाद्य यंत्र में ढोलक, तबला, पखावज, बांसुरी, सितार, तानपुरा, शहनाई रहेंगी। आधुनिक वाद्य यंत्र में सैक्सोफोन, इलेक्ट्रानिक की-बोर्ड, गिटार होगा। यहां 70 तरह के वाद्य यंत्र लोगों के लिए रखे गए हैं। शिविर में चलन से बाहर हो चुके वाद्य यंत्र भी होंगे। जैसे मेन्डोलियन, पैर से हवा देकर बजाया जाने वाला हारमोनियम।

शिविर में पारंपरिक वाद्य यंत्रों को लोग देख सकेंगे।
शिविर में पारंपरिक वाद्य यंत्रों को लोग देख सकेंगे।

21 जिलों के बालक 17 तरह के वाद्य यंत्र बजाएंगे
प्रांत के 21 जिलों से बालक चयनित होकर आएंगे। उनका प्रदर्शन सर संघचालक के सामने होगा। ये सभी 17 प्रकार के वाद्य यंत्रों का वादन करेंगे। प्रांत के सभी जिलों में 25 सितंबर को संचलन से अंतिम अभ्यास हुआ था। इस अभ्यास के बाद चयनित किए गए वादक ही घोष शिविर में सम्मिलित किए गए हैं।

3 कमरों का अस्थाई अस्पताल
शिविर में अस्थाई अस्पताल भी बनाया गया है। जिसमें 3 बड़े कमरों में बेड सुरक्षित रखे गए हैं । जिसमें अलग-अलग डॉक्टर मौजूद रहेंगे। एक डॉक्टर सौरभ को चिकित्सा व्यवस्था का प्रमुख बनाया गया है। वह शिविर में स्थाई तौर पर प्रवास करेंगे।

वीएसएसडी मैदान से सर संघचालक संबोधित करेंगे
9 अक्टूबर की सुबह दीनदयाल विद्यालय से पथ संचलन होगा। 10 अक्टूबर को शाम 4.30 बजे वीएसएसडी कॉलेज मैदान पर आयोजित सार्वजनिक सभा को मोहन भागवत संबोधित करेंगे। इस आयोजन की तैयारियां प्रांतीय पदाधिकारियों की देखरेख में पूरी हुई हैं।

प्रांत प्रचार प्रमुख डॉ. अनुपम के मुताबिक संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी शिविर में आ चुके हैं। संघ के अखिल भारतीय सह शारीरिक प्रमुख जगदीश और अखिल भारतीय सह व्यवस्था प्रमुख अनिल ओक पूरे समय शिविर में उपस्थित रहेंगे।