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CSA कॉल सेंटर से किसानों को मिलेगा समस्याओं से समाधान:एक कॉल में हर मुश्किल होगी आसान, कृषि विश्वविद्यालय से जुड़ेगा देश भर का किसान

कानपुर3 महीने पहले
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चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय। - Money Bhaskar
चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय।

किसानों की समस्याओं को लेकर सोमवार को चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (CSA) के सस्य विज्ञान विभाग में एक कॉल सेंटर की स्थापना की गई। इसके माध्यम से किसान कृषि संबंधित जानकारी व सहायता प्राप्त कर सकेंगे। इसके अलावा किसान अपनी कृषि समस्या के लिए देश भर के किसान कॉल सेंटर पर मुफ्त कॉल भी कर सकते हैं। शोधरत छात्र राम नरेश ने किसान कॉल सेंटर के लिए एडवाइजरी जारी की है।

खेती की हर समस्या का तुरंत होगा समाधान

खेती को अधिक उन्नतशील बनाने के लिए कई तकनीकें उपलब्ध हैं, जिनका किसान प्रयोग भी कर रहे हैं। लेकिन जब वे खेती की नई तकनीक का प्रयोग करते हैं, तो उन्हें कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इसीलिए भारत सरकार ने किसान कॉल सेंटर की स्थापना की है। किसान कॉल सेंटर सुबह 6 से रात 10 बजे तक काम करते हैं। इसके एजेंट को फार्म टेली एडवाइजर (FTA) के रूप में जाना जाता है। ये कृषि या संबद्ध क्षेत्रों (बागवानी, पशुपालन, मत्स्य पालन, मुर्गी पालन, मधुमक्खी पालन, सेरीकल्चर, एक्वाकल्चर, एग्रीकल्चरल इंजीनियरिंग) में स्नातक या उससे ऊपर (यानी पीजी या डॉक्टरेट) हैं। साथ ही कृषि विपणन, जैव प्रौद्योगिकी, गृह विज्ञान और संबंधित स्थानीय भाषा में भी इन्हें महारत हासिल है।

टोल फ्री नंबर 1800-180-1551 पर कर सकते हैं कॉल

किसान की सुविधा के लिए कॉल सेंटर का नंबर 1800-180-1551 जारी किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य है कि टेलीफोन के माध्यम से कोई भी किसान घर बैठे अपनी कृषि समस्याओं के बारे में विशेषज्ञों से सलाह-मशवरा कर सके।

2004 से काम कर रहे हैं कॉल सेंटर

कृषि मंत्रालय और भारत सरकार ने 21 जनवरी 2004 में पूरे देश में एक साथ किसान कॉल सेंटर की शुरुआत की थी। इसको शुरू करने का मुख्य उद्देश्य किसानों की समस्या का तुरंत समाधान और उपज बढ़ाने के तरीके उनकी लोकल भाषा में बताना था। किसान कॉल सेंटर पर उपस्थित व्यक्ति किसानों की समस्या का समाधान तुरंत उसी वक्त करता है। अगर कॉल रिसीव करने वाला व्यक्ति किसान की समस्या का समाधान करने मे समर्थ नहीं है, तो वह उसी समय कॉल को किसी स्पेशलिस्ट को ट्रांसफर करता है।

कई भाषाओं में कार्य कर रहे हैं 21 सेंटर

पूरे देश में कुल 21 किसान कॉल सेंटर चल रहे हैं। किसानों के प्रश्नों के उत्तर 22 स्थानीय भाषाओं में दिए जाते हैं। यहां आए कॉल को रेकॉर्ड किया जाता है। किसानों की जानकारी को दिन, तारीख, समस्या, जगह व समाधान के हिसाब से एक डाटा बेस बनाया जाता है। इसे नेट पर अपलोड भी किया जाता है।

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