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कानपुर-हादसे में बची 3 महिलाएं, जिन्हें खरोंच तक नहीं आई:बोलीं- अंधेरे में सिर्फ चीख-पुकार सुनाई दी; आंखों के सामने हमारे अपने डूब गए

कानपुर2 महीने पहले
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कानपुर के घाटमपुर इलाके के कोरथा गांव के तालाब में 26 लोगों ने दम तोड़ दिया। ट्रैक्टर-ट्राली पलटने के दौरान करीब 46 लोग इसमें मौजूद थे। ज्यादातर को चोटिल होने के बाद भर्ती कराना पड़ा। दैनिक भास्कर इस हादसे में बची 3 ऐसी महिलाओं तक पहुंचा। जिन्हें इस हादसे में खरोंच तक नहीं आई।

  • पढ़ते हैं उनके सुरक्षित बचने की कहानी...

पानी में सांस नहीं आ रही थी, लगा मैं मर जाऊंगी, फिर किसी ने बाहर खींच लिया

ये तस्वीर रंजीता की है, बड़े हादसे में उन्हें चोट नहीं आई।
ये तस्वीर रंजीता की है, बड़े हादसे में उन्हें चोट नहीं आई।

गांव के राजनारायण की बेटी रंजीता भी राजू निषाद के बेटे के मुंडन संस्कार में शामिल होने गई थी। हादसे के वक्त वो ट्राली में बैठी हुई थीं। कहती है कि ट्रैक्टर-ट्राली तेज चल रही थी। मुझे नहीं पता कि राजू भैया ने शराब पी थी या नहीं। लोग ऐसा कहते हैं। अंधेरा था तो रोड के पक्का और कच्चे होने के बारे में भी अंदाजा नहीं।

हम बस गांव पहुंचने ही वाले थे कि अचानक एक तरफ ट्राली पलटने लगी। महिलाएं एक-दूसरे के ऊपर आ गईं। इससे कुछ लोग नीचे दब गए। कुछ सेकंडों में ही ट्राली पूरी पलट गई और हम पानी में थे। डूबने के डर से जो भी हाथ में आ रहा था, उसको पकड़कर हम अपनी तरफ खींचने लगे। लगा ऐसे लगा कि पानी से बाहर निकल सकते हैं। फिर अंधेरे में मुझे किसी ने बाहर की तरफ खींच लिया। कुछ उथले पानी तक आने के बाद मैं खुद को खींचते हुए पानी से बाहर ले आई। तब तक मुंह में पानी भर चुका था। सांस भी मुश्किल से आ रही थी। मगर मैं बच चुकी थी। चोट भी नहीं आई थी।

ट्रैक्टर ट्रॉली पर बैठीं राजरानी और उनके दो बच्चे अभिषेक व यश को एक खरोंच भी नहीं आई।
ट्रैक्टर ट्रॉली पर बैठीं राजरानी और उनके दो बच्चे अभिषेक व यश को एक खरोंच भी नहीं आई।

'ये हमारी किस्मत थी जो हम जमीन पर गिरे'
अब बात करते हैं राजरानी की। वो भी ट्रैक्टर-ट्राली में मौजूद थीं। उनके दो छोटे बच्चे अभिषेक और यश भी साथ थे। कहती हैं कि ट्रैक्टर-ट्रॉली पलटने के दौरान वह अंदर नहीं दबीं। झटका लगने से दूर जाकर गिरी गईं। ट्रैक्टर तेज रफ्तार होने की वजह से वह अपने दोनों बच्चों को भी गोद में ली थीं। इससे वो भी बाल-बाल बच गए।
हमें तब हादसे का पता चला, जब लोग पानी में गिर चुके थे। किस्मत ही थी, जो पानी में गिरने से बचे। अगर जमीन पर न गिरे होते तो बचना मुश्किल हो जाता।

67 साल की गुलाब देवी बोली- मेरी आंखों के सामने लोग मर रहे थे

हादसे में बाल-बाल बचने वाली गुलाब देवी को एक खरोंच भी नहीं आई।
हादसे में बाल-बाल बचने वाली गुलाब देवी को एक खरोंच भी नहीं आई।

गुलाब देवी 67 साल की हैं। कहती है कि उम्र के इस पड़ाव पर लोगों को अपनी आंख के सामने मरते देखा, तो कलेजा फट गया। चाहकर भी कुछ नहीं कर सकती थी। हम रो रहे थे, लोग चिल्ला रहे थे। सभी एक दूसरे से लोगों को बचाने के लिए कह रहे थे। कुछ लोग पानी से निकलकर आ भी गए, मगर बहुत से हमारे अपने डूब गए। वो तस्वीरे दिमाग में जैसे छप गई है। नींद भी नहीं आती, इससे बुरा कुछ नहीं हो सकता था। मुझे बताया गया कि बड़े-बड़े नेता गांव में आए। मुझे सिर्फ इतना कहना कि गांव की सड़कों को ठीक करना चाहिए।

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