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हरिदित्य ने हाईस्कूल, दीक्षा ने इंटर में किया झांसी टॉप:टॉपरों ने कहा- स्कूल-कोचिंग के साथ घर पर पढ़ाई और रिवीजन से मिली सफलता

झांसी5 महीने पहले
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जिला टॉप करने पर हरिदित्य को माला पहनाकर सम्मानित करते टीचर। - Money Bhaskar
जिला टॉप करने पर हरिदित्य को माला पहनाकर सम्मानित करते टीचर।

झांसी में यूपी बोर्ड के परीक्षा परिणाम में शहर के ज्ञानस्थली पब्लिक स्कूल की हरिदित्य राजपूत ने हाई स्कूल में जिला टॉप किया है। वहीं, गुरसराय के एमबीएसएसकेआई इंटर कॉलेज की छात्रा दीक्षा भदौरिया इंटरमीडिएट में जिला टॉपर बनी है। हरिदित्य ने 92% और दीक्षा ने 90.80% अंक हासिल किए हैं। जिले में 10वीं का परिणाम 79.60 और 12वीं का 84.40 रहा।

हाईस्कूल में 91.83% अंक लेकर न्यू एरा पब्लिक स्कूल के लव यादव दूसरे, सरस्वती विद्या मंदिर मऊरानीपुर की प्रतीक्षा कुशवाहा ने 91.67% अंकों के साथ तीसरा स्थान पाया है। इंटरमीडिएट में 90.7% अंक लाकर ज्ञानस्थली पब्लिक स्कूल के मनीष जाटव दूसरे और एमबीएसएसकेआई गुरसराय की प्रिंसी साहू 90.40% अंक लाकर जिले में तीसरे स्थान पर रही हैं।

किसान माता-पिता को पता नहीं कि बेटा जिला टॉपर

जालौन के बसोब गांव निवासी हरिदित्य पुत्र सतेंद्र पाल राजपूत पढ़ने के लिए ही बड़े भाई उत्तरादित्य और बड़ी बहन हर्षिता व सफलता के साथ राजपूत कॉलोनी में किराए पर रहता है। रिजल्ट आने के बाद हरिदत्य कमरे से स्कूल पहुंचा। तब उसे पता चला कि उसने जिला टॉप किया है। करीब 3 घंटे बाद वह लौटकर कमरे पर पहुंचा तो भाई-बहनों और माता-पिता को फोन कर टॉप करने की जानकारी दी।

पिता किसान है और मां उमादेवी हाउसवाइफ हैं। उसका एयरफोर्स में जाने का सपना है। हरिदित्य का कहना है कि बड़ा भाई एक क्लास आगे है। वह भी स्कूल टॉपर हैं। घर पर कोई डाउट होते थे तो भाई क्लियर कर देते थे।

सिक्योरिटी गार्ड के बेटे ने पाया दूसरा स्थान

12वीं की जिला मेरिट लिस्ट में मनीष जाटव ने दूसरा स्थान प्राप्त किया।
12वीं की जिला मेरिट लिस्ट में मनीष जाटव ने दूसरा स्थान प्राप्त किया।

12वीं में 90.60% अंक लेकर जिला मेरिट में दूसरा स्थान हासिल करने वाला छात्र मनीष जावट जालौन के बसोट गांव का निवासी है। पिता ओमप्रकाश जाटव पैरामेडिकल कॉलेज में सिक्योरिटी गार्ड हैं। वह पिता, मां पुष्पा देवी, बहन लक्ष्मी के साथ पैरामेडिकल कैम्पस में रहता है।

मनीष का कहना है कि वह इंजीनियर बनना चाहता है। दसवीं में 87% अंक आए थे। जो गलतियां दसवीं में की, उनको नहीं दोहराया। तय कर लिया था कि दसवीं से कम अंक नहीं आना चाहिए। इसलिए स्कूल-कोचिंग के साथ घर पर पढ़ाई की। यही सफलता की कुंजी है। मेरा मानना है कि स्कूल और कोचिंग के साथ घर पर पढ़ाई और रिवीजन जरूर करना चाहिए। इससे सफलता मिलती है।