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सरकारी रिकॉर्ड में मर गया जिन्दा आदमी:झांसी में एक दिव्यांग अपने को जिंदा साबित करने के लिए 5 साल से लगा रहा सरकारी दफ्तरों और अधिकारियो के चक्कर

झांसी3 महीने पहले
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500 रूपये के लिए 5 साल से भटक रहा है  गोरेलाल - Money Bhaskar
500 रूपये के लिए 5 साल से भटक रहा है गोरेलाल

झांसी के गरौठा विधानसभा के खरका गांव से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसमें एक दिव्यांग व्यक्ति खुद को जिंदा साबित करने की जद्दोजहद करता फिर रहा है दरअसल व्यक्ति अपनी बंद हो चुकी पेंशन के बारे में पूछने समाज कल्याण कार्यालय पहुंचा तो उसे पता चला वह मर चुका है जिसके बाद से वह एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय खुद को जिंदा साबित करने के लिए 5 सालों से दर-दर भटक रहा है,मगर अधिकारी यह मानने को तैयार नहीं की वह जिंदा, किसान रक्षा पार्टी ने इस मुद्दे को उठया तो विभाग ने ऑनलाइन आवेदन करने की सलाह दी

जन्म से बोलने और सुनने में असमर्थ है गोरेलाल

दिव्यांग के बड़े भाई माखन ने बताया कि मेरा छोटा भाई गोरेलाल जन्म से ना ही सुन तुम पाता है और ना बोल पाता पहले उसकी दिव्यांग पेंशन हर महीने बैंक में आती थी वो 2017 में बंद कर दी गई । हम सब अधिकारियों के पास गए मगर कहीं भी कोई सुनवाई नहीं हुई। हमें बताया गया कि गोरेलाल हमारे रिकॉर्ड में मृत घोषित हो चुके हैं अब कुछ नहीं हो सकता जबकि हम अपने छोटे भाई को भी लेकर उन अधिकारियों के पास गए थे मगर कोई भी मानने को तैयार नहीं हम लोग तीन भाई हैं गरीबी के कारण खाने-पीने की परेशानी है.

पांच सालों से सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगा रहा है

किसान रक्षा पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष गौरी शंकर विदुआ ने बताया कि गोरेलाल पुत्र नाथूराम जन्म से दिव्यांग है इसको सरकारी योजना के तहत पांच सौ रूपये मिलते वो वो भी बंद हो गए। उसे अपने जिंदा होने का सबूत देना पड़ रहा है जबकि वह कहीं भी आने-जाने में सक्षम नहीं है अधिकारियों से बात की उन्होंने बताया ऑनलाइन आवेदन करें तब देखा जाएगा। सरकारी विभागों में की लापरवाही के कारण गरीब दिव्यांग को दर-दर की ठोकरें खानी पड़ रही है

वही विभाग का कहना है कि सभी योजनाओं को पारदर्शी करने के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया को अपनाया जा रहा है और सभी लाभार्थियों को ऑनलाइन आवेदन करना अनिवार्य है

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