पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

झांसी में मंत्री की नाराजगी पर PHC इंचार्ज को हटाया:3 दिन पहले नंदगोपाल गुप्ता के निरीक्षण के दौरान मिली थी खामियां

झांसी8 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
13 जून को मंत्री ने अम्बावाय पीएचसी का निरीक्षण किया था। - Money Bhaskar
13 जून को मंत्री ने अम्बावाय पीएचसी का निरीक्षण किया था।

झांसी मंडल के प्रभारी मंत्री नंदगोपाल गुप्ता उर्फ नंदी की नाराजगी के बाद झांसी के अम्बावाय पीएससी इंचार्ज डॉ. संतोष भोइया पर गाज गिर गई है। उनको पीएचसी से हटा दिया गया है, जबकि एक फार्मासिस्ट पर भी कार्रवाई हुई है। 3 दिन पहले मंत्री ने पीएचसी का निरीक्षण किया था। वहां कई खामियां मिलने पर मंत्री खफा हो गए थे। वहीं, अवैध कब्जा करने पर एक एफआईआर दर्ज की गई है।

पीएचसी में दवाइयों में रख रखाव में मिली थी खामियां

13 जून को मंत्री नंदी झांसी के दौरे पर आए थे। उन्होंने सीडीओ शैलेष कुमार और सीएमओ डॉ. अनिल कुमार के साथ बड़ागांव विकास खंड की पीएचसी अम्बावाय का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि पीएचसी अम्बावाय में प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. संतोष भोइया द्वारा अपने पदीय दायित्वों का निर्वहन नहीं करने व फार्मासिस्ट नीलू सचान द्वारा दवाइयों का रख रखाव सही ढंग से नहीं किया जा रहा है।

न ही दवाइयों की प्रविष्टि का रजिस्टर बनाया गया है। रजिस्टर के विषय में प्रभारी मंत्री ने नीलू सचान से पूछा तो उन्होंने अनभिज्ञता जाहिर की थी। इस पर मंत्री ने नाराजगी जाहिर की थी। नीलू सचान पर कठोर कार्रवाई के लिए उच्चाधिकारियों एवं उप्र शासन को पत्राचार किया गया है। मंत्री ने पीएचसी इंचार्ज का तबादला करने के निर्देश दिए थे।

अवैध कब्जा करने पर केस दर्ज

बरुआसागर के फुटेरा लेखपाल नीरज आर्य ने बरुआसागर थाना में तहरीर दी कि पूर्व में सिकन्दर उर्फ मुन्ना (75) पुत्र हरगोविन्द ने सरकारी जमीन पर बल्ली लगाकर झोपड़ी बनाने का प्रयास किया था। 22 अक्टूबर 2021 को बल्लियों को हटवा दिया था। मौके पर यथास्थित रखने के संबंध में सिकन्दर व ग्राम प्रधान व ग्रामवासियो के हस्ताक्षर कराए गए थे। जिसमें सिकन्दर ने रातों रात में लकड़ी की बल्लियों पर पॉलीथिन झोपड़ीनुमा बनाकर पत्नी के साथ रहने लगा। जिसको मौके पर जाकर कब्जा हटाने के लिए कहा गया। तब सिकन्दर ने अपने चारो पुत्रों करन सिंह, बबलू उर्फ रणवीर सिंह, शिरोमन सिंह, देवी सिंह को बुला लिया। कब्जा हटाने को कहा गया तो सभी ने गालियां देते हुए लेखपाल पर हमलावर हुए और धमकी दी।