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जालौन में क्लर्क के खिलाफ धरने पर बैठे ग्रामीण:फर्जी तरीके से भूमि का पट्टा करने का लगाया आरोप

जालौन6 महीने पहले
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ग्रामीणों ने दिया धरना। - Money Bhaskar
ग्रामीणों ने दिया धरना।

जालौन की उरई तहसील में तैनात लिपिक निधि नायक के खिलाफ उरई तहसील के दर्जनों ग्रामीण धरने पर बैठ गए हैं। यह धरना जमीन हड़पने के मामले में लिपिक के खिलाफ दिया जा रहा है। धरना दे रहे ग्रामीणों ने डीएम को ज्ञापन देकर पलक निधि नायक के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

ग्रामीणों का किया विरोध

उरई तहसील के जयपुरा, रहिया के रहने वाले ईश्वरदास, जगराम, चतुर सिंह गांव की महिलाओं और अन्य ग्रामीण के साथ उरई के कलेक्ट्रेट में धरना दे रहे हैं। इन सभी ग्रामीणों का आरोप है कि उरई तहसील के लिपिक पलक निधि नायक ने अनुसूचित जाति की भूमि का पट्टा फर्जी तरीके से अनीता सिंह के नाम दर्ज करा दिया है। बाद में अनीता सिंह को मालिक बना कर प्रार्थी की गाटा संख्या 177/2 में से एक प्लाट का फर्जी तरीके से बैनामा अपने साले राघवेंद्र कुमार के नाम करा दिया। जब इसकी जानकारी ग्रामीणों को हुई तो उन्होंने विरोध किया।

पुलिस ने नहीं की कार्रवाई

इस दौरान पलक निधि नायक ने 17 अक्टूबर को उस प्लाट पर कब्जा करना चाहा। विरोध करने पर पलक निधि नायक ने जातिसूचक गालियां, मारने पीटने और एफआईआर दर्ज कराने की धमकी दी। मामले में शिकायत की गई तो पुलिस ने न तो मामला दर्ज किया और न ही कोई कार्रवाई की।

फर्जी जमीन का किया बैनामा

ग्रामीणों का आरोप है कि पलक निधि नायक की साजिश से कई लोगों ने फर्जी जमीन का बैनामा कर लिया। तहसील में होने के कारण पलक निधि नायक द्वारा दूसरों की जमीन दूसरे के नाम दर्ज करा दी जा रही है।

उसे अवैध रूप से कब्जाया जा रहा है। धरने पर बैठे ग्रामीणों ने बताया कि माननीय डकैती कोर्ट द्वारा पलक निधि नायक के खिलाफ एनबीडब्ल्यू 9 नवंबर को जारी किया गया। इसके बावजूद भी पलक निधि को अभी तक गिरफ्तार नहीं किया गया है। उन्होंने जिलाधिकारी से मांग की है कि पलक के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत किया जाए।

मेरा कोई लेना देना नहीं है

मामले में तहसील के लिपिक पलक निधि नायक का कहना है कि उनका इसमें कोई रोल नहीं है। बल्कि अनावश्यक रूप से जगराम उन पर दबाव बनाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि अनीता सिंह सीओ की पत्नी है, जिन्होंने जमीन के असली मालिक से बैनामा कराया था।

जिसके बाद उन्होंने दूसरे पक्ष को यह जमीन बेची थी। मामले में उन्होंने बताया कि पूरे मामले की जांच जिलाधिकारी द्वारा भी की गई थी। इसमें कोई भी तथ्य गलत नहीं पाया गया था, बल्कि उन्हें अनावश्यक रूप से बदनाम करने की साजिश रची जा रही है।

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