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नक्सली हमले में हाथरस का लाल शहीद:शव देखकर 70 साल की मां बोली- तू देश के लिए कुर्बान हो गया, मुझे अकेला छोड़ गया

हाथरस2 महीने पहले
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ओडिशा में नक्सली हमले में शहीद हुए शिशुपाल सिंह का पार्थिव शरीर बुधवार देर शाम हाथरस पहुंचा। उनके शव को देखकर गांव की हर आंख नम थी। गांव की हर गली से शिशुपाल यादव अमर रहे के नारे गूंज रहे थे। चार जवानों के कंधे पर सवार होकर शहीद शिशुपाल का शव अपने घर पहुंचा। शव देखकर पूरा परिवार भावुक हो गया। कोई कुछ बोल नहीं पा रहा था। हर तरफ से बस रोने की आवाजें आ रही थीं।

मां ने बेटे के ताबूत पर रखा सिर

अपने लाल के शव को देखकर बूढ़ी मां बेसुध हो गई। मां ने कहा कि अभी तू 2 महीने पहले ही मिलने आया था, अब ऐसे आ रहा है। अब तेरी मां बूढ़ी मां क्या करेगी। तू देश के लिए कुर्बान हो गया और अपनी मां को अकेला छोड़ गया। इतना कह कर मां ने अपने बेटे के ताबूत पर सिर रख दिया। शिशुपाल का बेटा पापा, पापा कह कर रोने लगा। वहीं शहीद की पत्नी पति का शव देखकर बेहोश हो गई।

मां बेटे के शव को देखकर बस रो रही थी। वो कह रही थी कि अब मैं अपने लाल को कभी नहीं देख पाउंगी।
मां बेटे के शव को देखकर बस रो रही थी। वो कह रही थी कि अब मैं अपने लाल को कभी नहीं देख पाउंगी।

गांव के लोगों ने किया सैल्यूट

शिशुपाल की शव यात्रा में पूरा गांव शामिल था। गांव के लोग लगातार वंदे मातरम, जय हिंद के नारे लगा रहे थे। मौके पर पुलिस अधिकारी भी मौजूद थे। अधिकारियों ने उनके शव पर फूल चढ़ाए। शिशुपाल को पूरे सम्मान के साथ विदाई दी गई।सिंह गांव के लोगों ने उनको सैल्यूट किया। शिशुपाल के भाई सत्यदेव यादव ने बताया कि शिशुपाल साल 1994 में सीआरपीएफ में भर्ती हुए थे। वर्तमान में वह एएसआइ के पद पर थे। ओडिशा में उनकी तैनाती थी। मंगलवार को हम लोगों को उनके शहीद होने की सूचना मिली। मैं भी सीआरपीएफ में हूं। इस समय मैं छुट्‌टी पर घर आया हुआ था। मैं एटा में था। भाई के शहीद होने की खबर सुनकर अपने गांव पहुंचा।

पिता की पहले हो चुकी है मौत

भाई सत्यदेव ने बताया कि हमारे पिता का पहले ही देहांत हो चुका है। भाई शिशुपाल ने आगरा में भी एक मकान बनवाया है। जहां उनकी पत्नी प्रवेश देवी और 22 साल बेटा गुलशन रहता है। गांव वाले घर में 70 साल की मां रामबेटी ही रहती हैं।

गांव के लोग भी शिशुपाल के शव को कंधा देने के लिए आगे आए।
गांव के लोग भी शिशुपाल के शव को कंधा देने के लिए आगे आए।

पढ़ाई में अच्छे थे शहीद शिशुपाल

बड़े भाई ने बताया कि शिशुपाल सिंह की पढ़ाई सिकंदराराऊ में हुई थी। वह साइकिल से रोजाना सिकंदराराऊ पढ़ने जाते थे। पढ़ाई के समय ही वह होनहार थे। सेना में जाकर उन्होंने क्षेत्र का नाम रोशन किया। गांव के एक युवक ने बताया शिशुपाल सिंह साल 1994 में सीआरपीएफ में भर्ती हुए थे। वर्तमान में वह एएसआइ के पद पर थे। ओडिशा में उनकी तैनाती थी। मंगलवार को हुए हमले के बाद इसकी सूचना गांव वालों को शाम को मिली।

मंगलवार को हुआ था नक्सली हमला

बताते चलें कि नुआपड़ा जिले के बोडेन थाना पाटधरा में सीआरपीएफ का एक नया कैंप बनाया गया है। जिसका नक्सली संगठन विरोध कर रहे थे। कैंप को यहां से हटाने के लिए नक्सलियों ने बैनर-पोस्टर भी लगाए थे। मंगलवार को जब जवान वैषादानी से पाटधरा कैंप जा रहे थे, तभी घात लगाकर बैठे नक्सलियों ने इन पर हमला बोल दिया।