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हमीरपुर में किसान ने शुरू की मशरूम की खेती:लोग अधिकतर करते हैं गेहूं,चावल की खेती, 200 रुपए किलो होती है बिक्री

हमीरपुर4 महीने पहले
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हमीरपुर में किसान ने शुरू की मशरूम की खेती - Money Bhaskar
हमीरपुर में किसान ने शुरू की मशरूम की खेती

हमीरपुर के बुन्देलखण्ड इलाके का छोटा सा ज़िला हमीरपुर जो खेती किसानी के नाम से जाना जाता है। और इस इलाके के लोग परंपरागत गेंहू चना सरसों मटर मसूर की खेती करते है। लेकिन बदलते वक़्त के हिसाब से कुछ लोग नया करने की कोशिश में लगे हैं। ऐसा ही करने की कोशिश में लगे एक युवा ने यहां मशरूम की खेती करनी शुरू की है। और अच्छा मुनाफा कमाने का दावा किया है।

नेहरू युवा केंद्र से जुड़े हैं मनोज कुमार

मशरूम खेती कर के अच्छा मुनाफा कमाने का दावा करने वाला युवा हमीरपुर ज़िले में मौदहा ब्लॉक क्षेत्र का रहने वाला है। जो सामान्य घराने से आता है, मनोज कुमार नाम का यह शख्स नेहरू युवा केंद्र से जुड़ा और फिर एनजीओ चलाते हुए इसने भैंसता गाँव में एक गौसंरक्षण केंद्र को गोद ले लिया। और फिर वहीँ मशरूम की खेती करनी शुरू कर दी। जिससे इसको ख़ासा मुनाफा हुआ और अब मनोज ने दो तीन एम्प्लोयी लगा कर इस काम को आगे बढ़ा दिया है। मनोज के अनुसार मशरूम की खेती अँधेरे में की जाती है। जिसके लिए उसने टट्टर और तिरपाल से हट बनाई हुई है। और उन्ही हट के अन्दर मशरूम की पैदावार की जा रही है, जो ठीक तरीके से हो रही है।

40 प्रतिशत का हो रहा फायदा

मशरूम की खेती करने वाले मनोज ने बताया की अभी उसकी जितनी पैदावार हो रही है वह मौदहा और आस-पास में ही बिक जाती है। और अगर थोड़ी बहुत बाख गई तो वह इसका अचार या पाउडर तैयार कर के बेंच लेता है। कच्चा माल 200 रूपये किलो बिक जाता है। जिसमें उसे 40 प्रतिशत का फायदा हो रहा है, और अगर इसी मशरूम को अचार बना कर बेंचा जाता है तो 70 प्रतिशत का फायदा होता है।

बचत के पैसों से करते हैं गौरक्षा

मनोज ने बताया की सब खर्चे और मेहनत निकलने के बाद जो बचत आती है उससे वह जिस गौसंरक्षण केंद्र को गोद लिए है। उसमें गायों के भूसे चारे सहित रखरखाव का इंतज़ाम करता है। जब की गाँव की गौशाला के नाम पर जो सरकार की तरफ से धन आता है। वह उसे मिलना चाहिए ताकि गायों की और अच्छे से देखरेख हो सके। जिसके लिए उसने बीडीओ सहित सचिव से कई बार लिखित तौर पर मदद मांगी, लेकिन मिल नहीं सकी।

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