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महिला उत्पीड़न में ‘फुल स्टॉप’ लगाता वन स्टॉप सेंटर:दो सालों में 668 मामलों का निस्तारण, आधा दर्जन किशोरियों को बाल विवाह से बचाया

हमीरपुर2 महीने पहले
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हमीरपुर में घर की बाउंड्री में महिलाओं के खिलाफ होने वाली हिंसा, बिखरते परिवार या फिर राह चलते कसी जाने वाली अश्लील फब्तियां हो, सखी वन स्टॉप सेंटर की मदद से ऐसे अपराधों में तत्कालिक कार्रवाई के नतीजे सामने आने लगे हैं। पहले ऐसे मामलों को भय या शर्म की वजह से बर्दाश्त करने वालों के लिए वन स्टॉप सेंटर बड़े मददगार की भूमिका निभा रहा है। दो सालों में इस सेंटर ने 668 महिलाओं और बालिकाओं की मदद कर उन्हें न्याय दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

जिला प्रोबेशन अधिकारी राजीव कुमार सिंह ने बताया कि वर्ष 2020 में सखी वन स्टॉप सेंटर की आधारशिला रखी गई थी। इसी साल 2020-21 में इस सेंटर में 302 मामले रजिस्टर्ड हुए, जिसमें सभी का निस्तारण हुआ। इनमें अकेले घरेलू हिंसा के 139 मामले थे। इसके बाद बलात्कार के तीन, छेड़खानी के 22, बाल विवाह के 3, अपहरण के 5, दहेज उत्पीड़न का एक और 129 अन्य मामले थे। इसके बाद वर्ष 2021-22 में 352 महिला हिंसा से जुड़े केस दर्ज हुए। इसमें घरेलू हिंसा के 135, छेड़खानी के 18, बाल विवाह के 3, अपहरण का एक, साइबर क्राइम का एक, दहेज के दो व अन्य 172 मामले थे। इनमें से 316 मामलों का निस्तारण किया गया।

एक छत के नीचे सारी सुविधाएं
सखी वन स्टॉप सेंटर की मैनेजर मोनिका गुप्ता ने बताया कि सेंटर का उद्देश्य महिलाओं एवं बालिकाओं के साथ हो रही हिंसा पर प्रभावी कार्रवाई एवं उनके अधिकार और पहचान को वापस दिलवाना है। वन स्टॉप सेंटर में एक ही छत के नीचे सारी सुविधाएं दी जा रही हैं। हिंसा की शिकार महिला को मेडिकल और कानूनी सहायता मुहैया कराई जाती है। ससुराल में होने वाली हिंसा के मामलों में काउंसिलिंग कराई जाती है। महिलाओं को सेंटर में पांच दिन तक रोकने की भी व्यवस्था है। इस मुहिम में टीम की राहिला परवीन और अस्फिया तनवीर भी अहम भूमिका निभा रही हैं।

आधा दर्जन किशोरियों को बाल विवाह से बचाया
सेंटर की मदद से दो सालों में आधा दर्जन किशोरियों को बाल विवाह जैसी कुप्रथा से बचाया गया है। जनपद के अलग-अलग हिस्सों से मिली शिकायतों पर कार्रवाई करते हुए वन स्टॉप सेंटर की टीम ने ऐसी किशोरियों को बाल विवाह से बचा लिया, जिनकी विवाह की पूरी तैयार हो चुकी थी। इसके लिए दोनों पक्षों को बातचीत के जरिए राजी किया। जिसने हठधर्मिता दिखाई उसे कानूनी भाषा में समझाया गया।

डेढ़ साल बाद एक हुआ दो बच्चों का परिवार
वन स्टॉप सेंटर की मदद से डेढ़ सालों से अलग-अलग रहे दो बच्चों के माता-पिता को फिर से एक साथ रहने को तैयार कर लिया गया। कुरारा ब्लाक के एक गांव की महिला पारिवारिक कलह के बाद अपनी दो छोटी बच्चियों के साथ डेढ़ साल से मायके में रह रही थी। पति और ससुराल वालों ने उसे छोड़ दिया था। परेशान हाल महिला ने 8 जून को वन स्टॉप सेंटर में अपनी अर्जी लगाई। जिसके बाद सेंटर की मैनेजर मोनिका गुप्ता ने उसके पति को सेंटर बुलाकर दोनों की काउंसिलिंग कराई। बातचीत के बाद दंपति साथ रहने को राजी हो गए। मां-बाप के एक साथ रहने की बात सुनकर मासूम बच्चियां भी खुशी से उछल पड़ी। सेंटर से ही दंपति को समझा-बुझाकर घर भेज दिया गया।

आपसी सहमति से कराया घर का बंटवारा, झगड़ा खत्म
सेंटर मैनेजर मोनिका गुप्ता ने बताया कि सुमेरपुर ब्लाक के एक गांव में एक ही परिवार के बीच चल रहे झगड़े का निपटारा घर का बंटवारा करवाने से हो गया। पीड़ित महिला सास और जेठ के उत्पीड़न का शिकार थी। उसे घर से निकाल दिया गया था। महिला की गोद में छोटी बच्ची थी। महिला का पति दिल्ली कमाने गया था। दोनों पक्षों को बुलाकर आपसी सहमति से झगड़े की वजह बना घर का दोनों भाइयों के बीच बंटवारा करवा दिया गया। अब दोनों पक्ष अलग-अलग रहेंगे। सास और जेठ ने महिला के साथ हिंसा न करने की बात लिखित तौर पर दी है।

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