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यूपी के मोस्ट वांटेड क्रिमिनल्स नहीं पकड़े गए:छोटे अपराधियों को सजा दिला लूटी वाहवाही, अब टॉप 10 माफियाओं पर कसेगा शिकंजा

गोरखपुर2 महीने पहले
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यूपी का मोस्ट वांटेड और 2.5 लाख का इनामी गोरखपुर का राघवेंद्र यादव। - Money Bhaskar
यूपी का मोस्ट वांटेड और 2.5 लाख का इनामी गोरखपुर का राघवेंद्र यादव।

गोरखपुर पुलिस पिछले 10 माह यानी सितंबर 2021 से 'ऑपरेशन शिकंजा' चला रही है। इसके तहत गोरखपुर पुलिस मुकदमों में प्रभावी पैरवी कर अपराधियों को सजा दिला रही है। गोरखपुर पुलिस का दावा है कि अबतक उसने करीब 104 अपराधियों को सजा दिला दिया है। लेकिन पुलिस की यह तेजी और प्रभावी पैरवी केवल छोटे मोटे अपराधियों तक ही सीमित है। अब तक उसने किसी भी बड़े अपराधी, टॉप टेन माफिया को सजा नहीं दिलाया है।

हालत यह है कि प्रदेश के सबसे बड़े इनामी और यूपी के मोस्ट वांटेड राघवेंद्र यादव की परछाई भी पुलिस छू नहीं पाई है, वो 2016 से ही फरार चल रहा है। उसपर 2.5 लाख का इनाम भी रखा गया है।

यही कारण है कि अब यह बात सामने आने पर एडीजी और डीआईजी स्तर से माफियाओं को सजा दिलाने के लिए योजना बनाई गई है और जिले के टॉप टेन माफियाओं की सूची तैयार कर उनके मुकदमों का स्टेटस जाना जा रहा है।

डीआईजी जे रविंदर गौड़ ने बताया कि बड़े माफियाओं को सजा दिलाने का अभियान शुरू किया गया है। पुलिस का फोकस है कि जिले के टाप टेन माफिया को कम से कम एक मामले में सजा हो।

ये तस्वीर गोरखपुर के टॉप टेन माफिया विनोद उपाध्याय की है।
ये तस्वीर गोरखपुर के टॉप टेन माफिया विनोद उपाध्याय की है।

पिछले दो दिन में तीन को सजा दिलाया
पुलिस का दावा है कि उसने कोर्ट की मदद से प्रेमिका को चाकू मारकर हत्या करने वाले आरोपी सुधीर चौहान को शुक्रवार को आजीवन कारावास और 50 हजार के जुर्माने की दी गई है। सुधीर ने 2018 में कैंट इलाके में चाकू मारकर प्रेमिका की हत्या की थी।

वहीं पुलिस ने 2011 में हरपुर बुदहट में हुए हत्या के आरोपियों संजय सिंह और अनिल सिंह को भी आजीवन कारावास व 30 हजार के अर्थदंड की सजा दिलाने का दावा गुरुवार को किया था। साथ ही 2011 में हुए हत्या के प्रयास के आरोपी नीरज कुमार को भी दस वर्ष के कारावास की सजा दिलाने का दावा गुरुवार को किया था।

ये तस्वीर माफिया और बसपा नेता सुधीर सिंह की है।
ये तस्वीर माफिया और बसपा नेता सुधीर सिंह की है।

एनकाउंटर में भी छुटभैये को किया घायल
यही हाल गोरखपुर पुलिस का एनकाउंटर में भी है। कहने को तो पुलिस ने पिछले दो माह में 7 एनकाउंटर कर 11 अपराधियों को घायल किया है। लेकिन इसमें भी कोई बड़ा अपराधी नहीं है। पुलिस ने 24 अप्रैल 2022 को खोराबार में हुए ट्रिपल मर्डर के आरोपी आलोक पासवान को एनकाउंटर में गोली मारकर घायल किया। लेकिन इस मुकदमे के अलावा उसपर कोई और केस दर्ज नहीं था।

पिछले दो महीने में पुलिस ने रणजीत यादव, शहजादे, तौफिक अहमद, हैरान कुमार, शिवा, वीरेंद्र, करन,मनोज, अजीत उर्फ सोनू को मुठभेड़ में घायल किया है।

माफियाा प्रदीप सिंह।
माफियाा प्रदीप सिंह।

ये है गोरखपुर के टॉप 5 माफिया की कहानी

राघवेंद्र यादव: झंगहा के सुगहा का राघवेंद्र यादव प्रदेश का सबसे बड़ा इनामी है। वह दो साल में चार हत्याओं को करके फरार है। छह साल से पुलिस और एसटीएफ उसे ढूंढ रही है। उसपर ढाई लाख का इनाम है। 2016 में पहली बार जब उसने जयहिंद के परिवार की हत्या की तभी से उनके परिवार को पुलिस लगातार सुरक्षा दे रही है।

उसने ज​यहिंद समेत उनके परिवार के चार लोगों को मौत के घाट उतार दिया है। अभी भी 6 पुलिसकर्मियों की ड्यूटी ज​यहिंद के घर पर रहती है। यह यूपी के टाप 61 माफिया की सूची में भी है।

विनोद उपाध्याय: विनोद उपाध्याय भी गोरखपुर के अलावा रेंज और जोन के टॉप टेन के साथ ही प्रदेश के टॉप 61 माफिया की सूची में शामिल है। एक समय गोरखपुर में उसकी तूती बोलती थी। वह जेल में रहते हुए उस समय के ​जेलर और डिप्टी जेलर के घर हमला करा चुका है। वाच टावर पर तैनात जेलकर्मी को पीटवा चुका है।

विनोद यूनिवर्सिटी चुनाव में भी प्रत्याशियों को लड़ाता था। वह सेंट एंडयूज डिग्री कालेज से एलएलबी की पढ़ाई की है। उसपर करीब 29 मुकदमे हैं। 2007 में वह बसपा के टिकट पर गोरखपुर शहर से विधानसभा चुनाव भी लड़ चुका है। लेकिन एक मामले में भी पुलिस उसे सजा नहीं दिला पाई है।

अजीत शाही: 90 के दशक में जैतपुर में पशु बाजार को लेकर तिहरा हत्याकांड हुआ था। जिसमें अजीत शाही आरोपी था। खौफ इतना की पुलिस इसपर हाथ नहीं डालती थी।

गोरखपुर का माफिया अजीत शाही।
गोरखपुर का माफिया अजीत शाही।

राधे यादव: राधेश्याम उर्फ राधे यादव भी शातिर लुटेरा है। वह पुलिस पर कई बार फायर भी कर चुका है। राधे यादव के खिलाफ बांसगांव थाने में 1994 में लूट का पहला मुकदमा दर्ज किया गया था।इस समय उसपर हत्या, हत्या के प्रयास, लूट समेत 37 मुकदमे हैं। राधे यादव शातिर अमरजीत यादव गैंग का सक्रिय शूटर है।

सुधीर सिंह और प्रदीप: सहजनवां के पिपरौली निवासी सुधीर सिंह और मल्हीपुर निवासी प्रदीप सिंह भी दशकों से गोरखपुर में जरायम की दुनिया में सक्रिय हैं। दोनों एक दूसरे के परिवार के कई लोगों की दिनदहाड़े हत्या कर चुके हैं। कई बार जेल भी जा चुके हैं। सुधीर की संपत्ति भी जब्त हो चुकी है। सुधीर पर 29 से ज्यादा केस हैं। वह बसपा के टिकट पर सहजनवां से 2022 का विधानसभा चुनाव लड़ चुका है। वहीं प्रदीप पर 34 के करीब मुकदमे हैं। लेकिन इनके एक भी मामले में कभी सजा नही हो पाई और न ही पुलिस इनके पैर में गोली मार पाई।

दो दिन पूर्व ही गोरखपुर की हरपुर बुदहट पुलिस ने रणजीत यादव को एनकाउंटर में पैर में गोली मारकर वाहवाही लूटी थी।
दो दिन पूर्व ही गोरखपुर की हरपुर बुदहट पुलिस ने रणजीत यादव को एनकाउंटर में पैर में गोली मारकर वाहवाही लूटी थी।

देवरिया के टॉप टेन माफिया
लार निवासी रवि प्र‌ताप सिंह उर्फ झूला सिंह, कोतवाली इलाके के हृदयशंकर, रामपुर कारखाना के सुनील राजभर, भलुअनी निवासी महेश यादव, गौरीबाजार निवासी विवेक सिंह, सलेमपुर निवासी अनूप सिंह उर्फ बबलू सिंह, खुखुन्दू निवासी मनीष मिश्रा, लार निवासी रामप्रवेश यादव, बनकटा निवासी अमृतांश पांडेय।

कुशीनगर के टॉप टेन माफिया
पड़रौना निवासी रूपक राय उर्फ रूपचंद, कुबेरस्थान निवासी अख्तर, कुबेरस्थान के अफजल, तुर्कपट्टी निवासी अमरेश यादव, हाटा निवासी जितेंद्र चौहान, हाटा के विनोद कुमार पासवान, तरया सुजान निवासी दीपक गुप्ता, हनुमानगंज निवासी श्रीराम उर्फ रामा, तुर्कपट्टी निवासी संतोष यादव, विशुनपुरा निवासी गोलू मिश्रा।

महराजगंज के टॉप टेन माफिया
कोतवाली इलाके के रजनीश सिंह, घुघली निवासी अनिल गुप्ता, पनियरा निवासी हरेकृष्ण मिश्र, फरेंदा निवासी उमा उर्फ उमाशंकर, पुरन्दरपुर निवासी गोविंद, नौतनवां निवासी टीसू उर्फ अकरम, परसामलिक के मुलायम यादव, सौनौली निवासी आफताब अंसारी, परसौनी के अनवर अली और ठूठीबारी के गोविंद कुमार गुप्ता।