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जेल की सलाखों से नहीं बच पाएंगे 41 माफिया:आपरेशन शिकंजा के तहत राजन तिवारी, सुधीर, राघवेंद्र, विनोद उपाध्याय जैसे अपराधियों को सजा दिलाएगी पुलिस

गोरखपुरएक महीने पहले
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गोरखपुर का माफिया विनोद उपाध्याय और माला पहने राजन तिवारी। - Money Bhaskar
गोरखपुर का माफिया विनोद उपाध्याय और माला पहने राजन तिवारी।

गोरखपुर रेंज के सभी चार जिलों के टॉप-10 माफियाओं पर अब पुलिस का 'बुलडोजर' चलेगा। पुलिस उनके खिलाफ दर्ज मुकदमों की सूची तैयार कर मॉनिटरिंग सेल की मदद से मुकदमों के ट्रायल की स्थित जानेगी। इसके बाद कोर्ट में प्रभावी पैरवी कर उन्हें कोर्ट से सजा दिलाई जाएगी।

ये ऐसे बदमाश हैं, जो जिलों की टॉप टेन सूची में हैं। हर बदमाश पर 20 से 40 मुकदमे तक दर्ज हैं, लेकिन अभी तक किसी मामले में उन्हें सजा नहीं हो सकी है। यही वजह है कि इसे प्राथमिकता में शामिल कर कोर्ट में पैरवी करने का आदेश डीआईजी जे. रविंदर गौड़ ने दिया है।

गोरखपुर का माफिया सुधीर सिंह काले जैकेट में और प्रदीप सिंह।
गोरखपुर का माफिया सुधीर सिंह काले जैकेट में और प्रदीप सिंह।

डीआईजी ने 'ऑपरेशन शिकंजा' को और प्रभावी बनाने का आदेश दिया है। अब केस की तारीख पर पुलिस की ओर से कड़ी पैरवी की जाएगी, ताकि अपराधियों को सजा हो सके। चारों जिलों को मिलाकर कुल 41 माफियाओं की सूची तैयार की गई है। अभी तक पिछले छह महीने में अकेले गोरखपुर में 100 से ज्यादा मुकदमों में प्रभावी पैरवी कर पुलिस ने 'ऑपरेशन शिकंजा' के तहत आरोपियों को सजा दिलाई है।

रेंज की बात करें, तो 150 और जोन की बात करें तो 200 आरोपियों को सजा दिलाई जा चुकी है। मगर, किसी बड़े माफिया को सजा दिलाने में पुलिस नाकाम रही। अब पुलिस ने माफिया को कम से कम एक मुकदमे में सजा दिलाने की तैयारी की है, ताकि वे सजायाफ्ता कहलाएं और यह न कह सकें कि कोर्ट या कानून उनका कुछ नहीं बिगाड़ पा रहा है।

गोरखपुर का माफिया राकेश यादव सफेद शर्ट में और राघवेंद्र यादव।
गोरखपुर का माफिया राकेश यादव सफेद शर्ट में और राघवेंद्र यादव।

ये हैं गोरखपुर के टॉप 10 माफिया
गगहा के रहने वाले राजन तिवारी, झंगहा के रहने वाले राघवेंद्र यादव, गुलरिहा के राकेश यादव, बेलघाट के शैलेंद्र प्रताप सिंह, बांसगांव के राधे उर्फ राधेश्याम यादव, कैंट के सत्यव्रत राय, खजनी के सुभाष शर्मा, कैंट के अजीत शाही, गीडा के मल्हीपुर के प्रदीप सिंह, शाहपुर के सुधीर सिंह, गोरखनाथ के विनोद उपाध्याय का नाम इस लिस्ट में शामिल किया गया है।

गोरखपुर का माफिया विनोद उपाध्याय और माला पहने राजन तिवारी।
गोरखपुर का माफिया विनोद उपाध्याय और माला पहने राजन तिवारी।

गोरखपुर के माफियाओं का ये है इतिहास

  • राजन तिवारी बिहार से दो बार विधायक रह चुके हैं। उन पर करीब 40 मुकदमे दर्ज हैं। वह माफिया श्रीप्रकाश शुक्ला के साथी रह चुके हैं।
  • विनोद उपाध्याय पर 30 से ज्यादा केस हैं। वह बसपा के नेता रह चुके हैं। वह शहर विधानसभा से बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ चुका है।
  • सत्यव्रत राय पर भी 20 से ज्यादा मुकदमे दर्ज हैं। वह भी श्रीप्रकाश शुक्ला का साथी रहा है। एक मामले में सजायाफ्ता भी है।
  • सत्यव्रत हाल ही में उसके बस्ती जेल से जमानत पर छूटने पर भी विवाद चल रहा है, जिसकी जांच की जा रही है।
  • सुधीर सिंह बसपा नेता हैं और 2022 विधानसभा चुनाव में बसपा के टिकट पर सहजनवां से चुनाव लड़ चुके हैं। उन पर 29 से ज्यादा केस दर्ज हैं।
  • झंगहा का राघवेंद्र यादव चार हत्याओं का आरोपी है। वह 2016 से फरार है। प्रदेश का मोस्ट वाटेंड है, उस पर 2.5 लाख का इनाम है।
  • राजन तिवारी, सुधीर, विनोद प्रदेश के टॉप 61 बदमाशों की सूची में भी शामिल हैं।
  • राकेश यादव पर भी 20 से ज्यादा केस है। वह बांसगांव के विधायक रहे ओमप्रकाश पासवान हत्याकांड का आरोपी था। वर्तमान में वह इस मामले से बरी हो चुका है।
  • अजीत शाही जैतपुर तिहरे हत्याकांड का आरोपी है। प्रदीप सिंह पर 48 से ज्यादा केस हैं।
गोरखपुर का माफिया अजीत शाही सफेद शर्ट में और सत्यव्रत राय नीली टी-शर्ट में।
गोरखपुर का माफिया अजीत शाही सफेद शर्ट में और सत्यव्रत राय नीली टी-शर्ट में।

देवरिया के टॉप टेन माफिया
लार निवासी रवि प्र‌ताप सिंह उर्फ झूला सिंह, कोतवाली इलाके के हृदयशंकर, रामपुर कारखाना के सुनील राजभर, भलुअनी निवासी महेश यादव, गौरीबाजार निवासी विवेक सिंह, सलेमपुर निवासी अनूप सिंह उर्फ बबलू सिंह, खुखुन्दू निवासी मनीष मिश्रा, लार निवासी रामप्रवेश यादव, बनकटा निवासी अमृतांश पांडेय का ना‌म पुलिस की लिस्ट में शामिल गया है।

कुशीनगर के टॉप टेन माफिया
पड़रौना निवासी रूपक राय उर्फ रूपचंद, कुबेरस्थान निवासी अख्तर, कुबेरस्थान के अफजल, तुर्कपट्टी निवासी अमरेश यादव, हाटा निवासी जितेंद्र चौहान, हाटा के विनोद कुमार पासवान, तरया सुजान निवासी दीपक गुप्ता, हनुमानगंज निवासी श्रीराम उर्फ रामा, तुर्कपट्टी निवासी संतोष यादव, विशुनपुरा निवासी गोलू मिश्रा का नाम कुशीनगर के टॉप टेन माफिया की लिस्ट में शामिल है।

महराजगंज के टॉप टेन माफिया
कोतवाली इलाके के रजनीश सिंह, घुघली निवासी अनिल गुप्ता, पनियरा निवासी हरेकृष्ण मिश्र, फरेंदा निवासी उमा उर्फ उमाशंकर, पुरन्दरपुर निवासी गोविंद, नौतनवां निवासी टीसू उर्फ अकरम, परसामलिक के मुलायम यादव, सौनौली निवासी आफताब अंसारी, परसौनी के अनवर अली और ठूठीबारी के गोविंद कुमार गुप्ता का नाम टॉप टेन माफिया की लिस्ट में है।

एडीजी जोन भी थानों के टॉप 5 माफियाओं और हिस्ट्रीशीटरों की सूची तैयार करा रहे

एडीजी जोन अखिल हर एक माफिया के पीछे एक दरोगा लगाकर उनको सजा दिलाएंगे।
एडीजी जोन अखिल हर एक माफिया के पीछे एक दरोगा लगाकर उनको सजा दिलाएंगे।

इसी प्रकार एडीजी जोन अखिल कुमार भी जोन के 11 जिलों के 194 थानों के टॉप 5 माफियाओं और हिस्ट्रीशीटरों की सूची तैयार करा रहे हैं। उनके मुकदमों की सूची भी वह तैयार करा रहे हैं। इसके बाद उन्हें कोर्ट से सजा दिलाई जाएगी। जोन के कुल 2000 बदमाशों को चिह्नित किया गया है।

प्रदेश का सबसे बड़ा इनामी है राघवेंद्र
झंगहा के सुगहा का राघवेंद्र यादव प्रदेश का सबसे बड़ा इनामी है। वह दो साल में चार हत्याओं को करके फरार है। छह साल से पुलिस और एसटीएफ उसे ढूंढ रही है। उसपर ढाई लाख का इनाम है। 2016 में पहली बार जब उसने जयहिंद के परिवार की हत्या की तभी से उनके परिवार को पुलिस लगातार सुरक्षा दे रही है। उसने ज​यहिंद समेत उनके परिवार के चार लोगों को मौत के घाट उतार दिया है। अभी भी 6 पुलिसकर्मियों की ड्यूटी ज​यहिंद के घर पर रहती है।

जेलर के घर हमला करा चुका है विनोद उपाध्याय
वहीं अगर बात करें विनोद उपाध्याय की तो 2000 के दशक में गोरखपुर में उसकी तूती बोलती थी। वह जेल में रहते हुए उस समय के ​जेलर और डिप्टी जेलर के घर हमला करा चुका है। वाच टावर पर तैनात जेलकर्मी को पीटवा चुका है। विनोद ने नेपाल के एक बदमाश की हत्या इसलिए करा दी थी क्योंकि उसने जेल में विनोद को थप्पड़ मार दिया था। विनोद यूनिवर्सिटी चुनाव में भी प्रत्याशियों को लड़ाता था। वह सेंट एंडयूज डिग्री कालेज से एलएलबी की पढ़ाई की है।

अजीत शाही और सुभाष शर्मा भी कम नहीं है
90 के दशक में जैतपुर में पशु बाजार को लेकर तिहरा हत्याकांड हुआ था। जिसमें अजीत शाही आरोपी था। खौफ इतना की पुलिस इसपर हाथ नहीं डालती थी। वहीं सुभाष शर्मा की दहशत खजनी इलाके में ज्यादा है। वह कार्बाइन की तस्करी करता था। कार्बाइन के साथ गिरफ्तार भी हुआ था।

राधे यादव है दक्षिणांचल का शातिर लुटेरा
राधेश्याम उर्फ राधे यादव भी शातिर लुटेरा है। उसकी दहशत बांसगांव यानि दक्षिणांचल में ज्यादा है। वह पुलिस पर कई बार फायर भी कर चुका है। वहीं बेलघाट का शैलेंद्र प्रताप सिंह भी लुटेरा है उसकी गैंग है। उसने भी पुलिस पर कई बार फायर किया है।राधे यादव के खिलाफ बांसगांव थाने में 1994 में लूट का पहला मुकदमा दर्ज किया गया था।इस समय उसपर हत्या, हत्या के प्रयास, लूट समेत 37 मुकदमे हैं। राधे यादव शातिर अमरजीत यादव गैंग का सक्रिय शूटर है।

सुधीर और प्रदीप की है दुश्मनी
इसके अलावा सहजनवां के पिपरौली निवासी सुधीर सिंह और मल्हीपुर निवासी प्रदीप सिंह भी दशकों से गोरखपुर में जरायम की दुनिया में सक्रिय हैं। इन दोनों में आपसी एदावत चलती है। दोनों एक दूसरे के परिवार के कई लोगों की दिनदहाड़े हत्या कर चुके हैं। कई बार जेल भी जा चुके हैं। सुधीर ने एक बार पैडलेगंज में गाड़ी पर फायरिंग कर हत्या की थी। उसकी संपत्ति भी जब्त हो चुकी है। साथ ही उसकी पत्नी पिपरौली की ब्लाक प्रमुख भी रह चुकी हैं।