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गोरखपुर को आज मिलेगी एक नई पहचान:AIIMS में होगा बेहतर इलाज, किसानों के खाद का संकट भी खत्म; सड़कों पर दौडेंगी इलेक्ट्रिक बसें

गोरखपुरएक महीने पहले
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सीएम योगी के इस ड्रीम प्रोजेक्ट का उद्घाटन करने के लिए पीएम मोदी आज गोरखपुर आ रहे हैं। - Money Bhaskar
सीएम योगी के इस ड्रीम प्रोजेक्ट का उद्घाटन करने के लिए पीएम मोदी आज गोरखपुर आ रहे हैं।

गोरखपुर की आज से पहचान बदल जाएगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज खुद यहां तीन बड़ी विकास परियोजनाओं की सौगात देंगे। खाद कारखाने के रूप में गोरखपुर को केंद्रित कर पूर्वांचल के किसानों और नौजवानों के हित में योगी आदित्यनाथ का सपना साकार गया है। अपने संसदीय कार्यकाल में करीब दो दशक तक जिसके लिए वह संघर्षरत रहे, उसका परिणाम आज देश-दुनिया के सामने है।

सीएम योगी के इस ड्रीम प्रोजेक्ट का उद्घाटन करने के लिए पीएम मोदी आज गोरखपुर आ रहे हैं। गोरखपुर एम्स की चिकित्सकीय सुविधाओं का फायदा पूर्वी उत्तर प्रदेश के साथ ही बिहार, झारखंड और नेपाल तक के लोगों को मिलेगा। एक अनुमान के मुताबिक करीब सात करोड़ की आबादी के लिए विश्व स्तरीय विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा के किए यह एम्स सबसे बड़ा केंद्र बना है।

गोरखपुर खाद कारखाने के निर्माण में करीब 8603 करोड़ रुपये की लागत आई है।
गोरखपुर खाद कारखाने के निर्माण में करीब 8603 करोड़ रुपये की लागत आई है।

किसानों- नौजवानों को मिलेगा फायदा
नीम कोटेड यूरिया से खेतों में हरियाली बढाने तथा करीब बीस हजार प्रत्यक्ष-परोक्ष रोजगार की संभावनाओं के साथ किसानों-नौजवानों के जीवन में खुशहाली लाने को यह कारखाना बनकर पूरी तरह तैयार है। इस खाद कारखाने से केवल उत्तर प्रदेश और अन्य सीमाई राज्यों को पर्याप्त उर्वरक की उपलब्धता ही सुनिश्चित नहीं होगी बल्कि इससे खाद आपूर्ति के मामले में आयात पर निर्भरता भी कम होगी।

8603 करोड़ की लागत से बना कारखाना
गोरखपुर के खाद कारखाने की स्थापना व संचालन की जिम्मेदारी हिंदुस्तान उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड (एचयूआरएल) ने निभाई है। एचयूआरएल एक संयुक्त उपक्रम है जिसमें कोल इंडिया लिमिटेड, एनटीपीसी, इंडियन ऑयल कोर्पोरेशन लीड प्रमोटर्स हैं जबकि इसमें फर्टिलाइजर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड और हिंदुस्तान फर्टिलाइजर कॉर्पोरेशन लिमिटेड भी साझीदार हैं। इस संयुक्त उपक्रम के अधीन गोरखपुर खाद कारखाने के निर्माण में करीब 8603 करोड़ रुपये की लागत आई है। कारखाना परिसर में दक्षिण कोरिया की विशेष तकनीक से 30 करोड़ की लागत से विशेष रबर भी बना है जिस पर गोलियों का भी असर नहीं होता है। एचयूआरएल के इस खाद कारखाने की उत्पादन क्षमता प्रतिदिन 3850 मीट्रिक टन और प्रतिवर्ष 12.7 लाख मीट्रिक टन उर्वरक उत्पादन की है।

इस खाद कारखाने के प्रिलिंग टॉवर की ऊंचाई कुतुब मीनार की ऊंचाई से दोगुनी से भी अधिक है। यह विश्व में किसी भी खाद कारखाने का सबसे ऊंचा प्रिलिंग टॉवर है।
इस खाद कारखाने के प्रिलिंग टॉवर की ऊंचाई कुतुब मीनार की ऊंचाई से दोगुनी से भी अधिक है। यह विश्व में किसी भी खाद कारखाने का सबसे ऊंचा प्रिलिंग टॉवर है।

कुतुब मीनार से दोगुना ऊंचा है प्रिलिंग टॉवर
पीएम मोदी के हाथों सात दिसंबर को लोकार्पित होने जा रहे हिंदुस्तान उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड (HURL) के इस खाद कारखाने के प्रिलिंग टॉवर की ऊंचाई कुतुब मीनार की ऊंचाई से दोगुनी से भी अधिक है। यह विश्व में किसी भी खाद कारखाने का सबसे ऊंचा प्रिलिंग टॉवर है। करीब 600 एकड़ में 8603 करोड़ रुपये की लागत से अब यह खाद कारखाना तमाम खूबियों के साथ बनकर तैयार है। ऐसी ही खासियत यहां बने प्रिलिंग टॉवर की है। इसकी ऊंचाई 149.2 मीटर है जो पूरे विश्व में अबतक की सर्वाधिक ऊंचाई वाला प्रिलिंग टॉवर है। तुलनात्मक विश्लेषण करें तो यह कुतुब मीनार से भी दोगुना ऊंचा है। कुतुब मीनार की ऊंचाई 72.5 मीटर है।

AIIMS के उद्घाटन के साथ ही 35 बेड का इमरजेंसी वार्ड भी सेवा में आ जाएगा जिससे गंभीर रोगियों को त्वरित इलाज की सुविधा मिलेगी।
AIIMS के उद्घाटन के साथ ही 35 बेड का इमरजेंसी वार्ड भी सेवा में आ जाएगा जिससे गंभीर रोगियों को त्वरित इलाज की सुविधा मिलेगी।

1011 करोड़ की लागत से बना 750 बेड की क्षमता वाला AIIMS
1011 करोड़ रुपये की लागत वाला एम्स गोरखपुर में अब बनकर तैयार है। आज प्रधानमंत्री के हाथों लोकार्पण के साथ ही यहां 300 बेड का अस्पताल क्रियाशील हो जाएगा। आने वाले दिनों में एम्स के अस्पताल की क्षमता 750 तक विस्तारित होगी। उद्घाटन के साथ ही 35 बेड का इमरजेंसी वार्ड भी सेवा में आ जाएगा जिससे गंभीर रोगियों को त्वरित इलाज की सुविधा मिलेगी। गोरखपुर एम्स की ओपीडी (आउटडोर पेशेंट डिपार्टमेंट) फरवरी 2019 से ही शुरू है।

अब तक करीब 7 लाख लोग एम्स की ओपीडी में आ चुके हैं। 14 सामान्य और 13 स्पेशल ओपीडी की सेवा से लोगों को अब किसी भी बीमारी पर परामर्श और इलाज के लिए अन्य शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा। यही नहीं, इस वर्ष मई माह से ही आईपीडी (इनडोर पेशेंट डिपार्टमेंट) में मरीज चिकित्सकीय सुविधा का लाभ लेने लगे हैं। सामान्य मरीजों की भर्ती के साथ ही अब तक 200 से अधिक सामान्य ऑपरेशन हो चुके हैं।

AIIMS में अब तक 200 से अधिक सामान्य ऑपरेशन हो चुके हैं।
AIIMS में अब तक 200 से अधिक सामान्य ऑपरेशन हो चुके हैं।

गोरखपुर एम्स में होंगी यह सुविधाएं

  • 14 मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर
  • मेडिसिन, जनरल सर्जरी, डेंटिस्ट्री (दंत संबंधी), पीडियाट्रिक्स, गायनिक, आर्थोपेडिक्स, डर्माटालोजी, साइकाट्री, आप्थाल्मोलोजी, ईएनटी, रेडियोलोजी, डाग्यनोस्टिक, पीएमआर हीमेटोलॉजी (रक्तशास्त्र) आदि की ओपीडी
  • पैथालॉजी, डिजिटल एक्सरे, सीटी स्कैन, एमआरआई, अल्ट्रासाउंड
  • कैंसर रोग डिपार्टमेंट में हेड एंड नेक क्लीनिक। रेडियोथेरेपी। 18 करोड़ रुपये की लागत से डुअल एनर्जी की रेडियोथेरेपी, ब्रेकीथेरेपी, सीटी सिम्युलेटर मशीनें भी जल्द
  • हीमोफीलिया मरीजों की जांच व इलाज
  • दो ऑक्सीजन प्लांट ( लिक्विड ऑक्सीजन व एयर प्रेशर आधारित दोनों)
  • आयुष ब्लॉक व नर्सिंग कॉलेज
बीआरडी मेडिकल कॉलेज में बनकर तैयार आरएमआरसी की इन लैब्स के जरिये वर्ल्ड क्लास अनुसंधान भी हो सकेगा।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज में बनकर तैयार आरएमआरसी की इन लैब्स के जरिये वर्ल्ड क्लास अनुसंधान भी हो सकेगा।

अब गोरखपुर में ही होगी वल्र्ड क्लास जांचें
बीआरडी मेडिकल कॉलेज में बनकर तैयार आरएमआरसी की इन लैब्स के जरिये न केवल बीमारियों के वायरस की पहचान होगी बल्कि बीमारी के कारण, इलाज और रोकथाम को लेकर व्यापक स्तर पर वर्ल्ड क्लास अनुसंधान भी हो सकेगा। सबसे खास बात यह भी अब गोरखपुर में ही आने वाले समय में कोरोनाकाल के वर्तमान दौर की सबसे चर्चित और सबसे डिमांडिंग जीनोम सिक्वेंसिंग भी हो सकेगी। यह पता चल सकेगा कि कोरोना का कौन सा वैरिएंट अधिक प्रभावित कर रहा है। यह लैब्स करीब 35 करोड़ की लागत से बनकर तैयार हुई है।

आज से महानगर में अत्याधुनिक इलेक्ट्रिक बसें भी फर्राटा भरने लगेंगी। इसे लेकर सोमवार को चार्जिंग पैनल का ट्रायल भी कर लिया गया।
आज से महानगर में अत्याधुनिक इलेक्ट्रिक बसें भी फर्राटा भरने लगेंगी। इसे लेकर सोमवार को चार्जिंग पैनल का ट्रायल भी कर लिया गया।

आज से फर्राटा भरेंगी इलेक्ट्रिक बसें
इसके साथ ही आज से महानगर में अत्याधुनिक इलेक्ट्रिक बसें भी फर्राटा भरने लगेंगी। इसे लेकर सोमवार को चार्जिंग पैनल का ट्रायल भी कर लिया गया। इन इलेक्ट्रिक बसों को पीएम मोदी 5 अक्टूबर को लखनऊ से ही हरी झंडी दिखा चुके हैं। 28 अक्टूबर को 15 इलेक्ट्रिक बसें गोरखपुर पहुंच गई थीं। इन बसों को नौसड़ बस स्टेशन में खड़ा कर दिया गया था। प्रधानमंत्री के आगमन की सूचना मिलते ही इलेक्ट्रिक बसों का संचालन करने के लिए तैयारियां तेज कर दी गईं। अब नौसड़ में खड़ी सभी इलेक्ट्रिक बसें महेसरा स्थित इलेक्ट्रिक बस चार्जिंग स्टेशन पर पहुंच गई हैं। आज से इन बसों का भी संचालन शुरू कर दिया जाएगा।

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