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न इंश्योरेंस न फिटनेस फिर भी फर्राटा भर रहे एंबुलेंस:अस्पताल के वाहनों को नहीं है नियम कानून की कोई परवाह, 82 सरकारी अस्पताल

गोंडा2 महीने पहले
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जिला अस्पतला में तैनात शवदाह एंबुलेंस। - Money Bhaskar
जिला अस्पतला में तैनात शवदाह एंबुलेंस।

गोंडा जनपद में सरकारी वाहनों के लिए कोई नियम कानून नहीं है। गाड़ियों के न तो इंश्योरेंस है न ही फिटनेस फिर भी मरीज और अस्पताल के कर्मचारियों की जान जोखिम में डालकर सड़कों पर फर्राटा भरते नजर आ रहे हैं। जिला और महिला चिकित्सालय में मरीजों को आपातकाल की 108 व 102 एंबुलेंस का संचालन किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त एक टाटा सुमो तथा मंडल के चारों जनपदों में ब्लड कलेक्शन के लिए चलाई जा रही है। बस के न बीमा है और न ही इंश्योरेंस के साथ-साथ कोई कागजात ही है। फिर भी इससे ब्लड कलेक्शन का कार्य किया जा रहा है।

आपातकाल की 108 व 102 एंबुलेंस का संचालन किया जा रहा है।
आपातकाल की 108 व 102 एंबुलेंस का संचालन किया जा रहा है।

ऐसा लग रहा है कि संभागीय परिवहन विभाग के नियम कानून से इनका कोई लेना देना नहीं है। जिससे मरीजों की जान जोखिम में डालकर सड़कों पर यह वाहन फर्राटा भरते नजर आ जाएंगे। मजे की बात यह है कि स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारी भी ऐसे वाहनों से चल रहे हैं। इस संबंध में अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक ने बताया कि हमारे यहां 4 शव वाहन है। जिसमें दो अस्पताल से तथा दो सीएमओ कार्यालय से संबद्ध हैं। जिसमें सीएमओ कार्यालय के एक वाहन चल नहीं रहा है।

जिले में संचालित हैं 82 सरकारी अस्पताल
दूसरे में बताया जा रहा है कि तेल का बजट नहीं मिल रहा। हमारे पास दो राजकीय एंबुलेंस हैं। जो चल रही हैं। 108 और 102 वाहनों की संख्या 82 है। एक पूरे मंडल के लिए ब्लड कलेक्शन बस है। इन वाहनों के फिटनेस और इंश्योरेंस ना होने की बात पर मुख्य चिकित्सा अधीक्षक बचाव करती नजर आईं। उनका कहना है कि मुझे इसकी जानकारी नहीं ऑफिस से यह बताया गया है कि सारे कागजात ड्राइवर के पास होते हैं।

30 लाख रुपये शुल्क
मुझे इसकी अब जानकारी हुई है। यदि नहीं है तो उसे विभागीय नियमानुसार कराया जाएगा। हालांकि मुख्य चिकित्साधिकारी राधेश्याम केसरी वाहनों के फिटनेस व इंश्योरेंस कराने को लेकर आरटीओ को पत्र लिख चुके हैं।इस संबंध में एआरटीओ बबीता वर्मा ने बताया कि शासन द्वारा15 मई से 19 जून तक अट्ठारह कैटेगरी में विशेष अभियान चलाया गया था। जिसके तहत करीब एक हजार वाहनों का चालान कर 30 लाख रुपए शुल्क वसूला गया था। एंबुलेंस व सरकारी वाहनों के बाबत जानकारी देते हुए कहा इसके लिए भी एक सप्ताह का अभियान चलाया गया।