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राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती आज:गोंडा की यादों में भी बसी है बापू की संकल्प यात्रा,1950 में स्थापित हुई थी प्रतिमा

गोंडा2 महीने पहले
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प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वच्छता को अभियान के रूप में घोषित और पोषित किया, तो महात्मा गांधी के अधूरे सपनों को पूरा होने की लालसा जगी। काम भी बहुत हुए पर आज भी लोग पूरी तरह जागरूक नहीं हो पाए। महान सपूतों के कारण देश को आजादी तो मिल गई पर उसे गांधी के संकल्प और संविधान की मर्यादा के अनुरूप ढाल नहीं पाए।

दो अक्बटूर को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती है तो एक बार फिर संकल्प लेने का समय है। “ मैं, सत्यनिष्ठा से प्रतिज्ञा करता हूं कि राष्ट्र की स्वतंत्रता एवं अखंडता को सुरक्षित रखने तथा सुदृढ़ करने के लिए निष्ठापूर्वक कार्य करता रहूंगा। मैं यह भी पुष्टि करता हूं कि मैं कभी हिंसा का आश्रय नहीं लूंगा और यह भी कि धर्म, भाषा या अन्य राजनैतिक या आर्थिक विवादों से संबंधित मतभेद तथा शिकायत शांति एवं संवैधानिक उपायों से निस्तारित करूंगा।” यह संकल्प लेने के दूसरे ही छड़ मर्यादा तार- तार हो जाती है। जगह-जगह लगे कूड़े के ढेर, जमीन विवाद में हत्याएं आम बात है। फिर भी बापू के शांति संकल्प अभियान को आगे बढ़ाना है।

बापू से जुड़ी हैं गोंडा की यादें
स्वतंत्रता आंदोलन चरम पर था। 1929 में पूर्ण स्वराज की घोषणा हो चुकी थी। पूरे देश में जागृति अभियान चल रहा था। तभी मनकापुर के राजा रघुराज सिंह के बुलावे पर बापू ट्रेन के जरिए मनकापुर पहुंचे। मनकापुर के राजसदन के भीतर बापू ने सभा की और मनकापुर, छपिया के तमाम सपूत इसमें शामिल हुए। बापू के आह्वान पर गोंडा नगर के मालवीय नगर में प्रेम पकड़िया मैदान पर प्रतिज्ञा करने की योजना पर सुदामा प्रवचन हुआ।

स्वाधीनता संग्राम सेनानी उत्तराधिकार संगठन के सदस्य बताते हैं कि बापू मनकापुर से गोंडा पहुंचे। तो यहां के लोगों ने बापू को चार हजार रुपये (चांदी ) की थैली भेंट की। इसके बाद दुखहरननाथ मंदिर के पास बापू की सभा हुई।सभा में आए। लोगों ने सामूहिक रूप से एकत्र कर 500 रुपये की पुनः थैली भेंट की और आंदोलन को तेज करने का आग्रह किया।

बच्चों की प्रार्थना सभा में भाग लिया था
सरयू प्रसाद कन्या पाठशाला में रात्रि विश्राम किया था और दूसरे दिन बच्चों की प्रार्थना सभा में भाग लिया था। पं. गोविंद बल्लभ पंत ने बापू की प्रतिमा का किया था अनावरण। 1947 में देश आजाद होने के बाद गोंडा में महात्मा गांधी के योगदान को याद करते हुए गांधी संस्थान बापू की प्रतिमा स्थापित करने के लिए प्रयास में जुट गया। संस्थान के अध्यक्ष लाल बिहारी टंडन ने गवर्नमेंट आर्ट्स एंड क्राफ्ट कालेज लखनऊ के प्रिंसिपल राय चौधरी से मुलाकात की और प्रतिमा का माडल तैयार किया गया।

9.5 फिट सफेद संगमरमर की प्रतिमा
इसके बाद इटली के शिल्पकार एंटोनियो मारजोलो से प्रतिमा और उसका आधार तैयार कराया गया। 9.5 फिट सफेद संगमरमर की प्रतिमा के निर्माण पर उस वक्त 50 हजार रुपये का खर्च आया। आधार निर्माण पर 20 हजार और इटली से भारत लाने पर पांच हजार रुपये किराए पर खर्च हुआ। कुल 75 हजार रुपये खर्च हुआ।

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