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क्षेत्र पंचायत के परिसीमन पर उच्च न्यायालय की बड़ी कार्रवाई:कोर्ट ने शासन से मांगा जवाब, याचिका के निर्णय के बाद होगी कार्रवाई

करनैलगंज2 महीने पहले
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नगर पालिका परिषद के सीमा विस्तार को लेकर पूरे जिले में राजनीतिक घमासान मचा हुआ है। सीमा विस्तार को लेकर एक तरफ जहां सत्ता पक्ष के नेता अपनी पूरी ताकत के साथ सीमा विस्तार कराने में लगे हुए हैं, वहीं दूसरी ओर विपक्षी दलों के द्वारा सीमा विस्तार को रोकने के लिए ताबड़तोड़ आपत्तियों के साथ उच्च न्यायालय की शरण ली जा रही है।

इसको लेकर एक तरफ जहां नगर पालिका परिषद कर्नलगंज में घमासान छिड़ा हुआ है, तो वहीं दूसरी ओर विधानसभा कटरा के क्षेत्र पंचायत के सीमा विस्तार में माननीय उच्च न्यायालय के आदेश के बाद एक नया मोड़ आ चुका है। जिसमें क्षेत्र पंचायत कटरा के सीमा विस्तार को लेकर उच्च न्यायालय ने शासन से जवाब तलब करते हुए सरकार के अंतिम निर्णय को अपने समक्ष लंबित याचिका के आदेश के उपरांत कार्रवाई करने का आदेश पारित किया है।

क्षेत्रीय विधायक ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र
सीमा विस्तार को लेकर कटरा विधानसभा के विधायक बावन सिंह ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर सीमा विस्तार कराने की मांग की। अपने पत्र में उन्होंने कहा कि नगर पंचायत कटरा में वर्तमान समय में विशेष वर्ग की आबादी 80 प्रतिशत है, जिसके चलते नगर के चेयरमैन अल्पसंख्यक समुदाय का ही बनता चला रहा है। जिसके चलते शेष बची 20 प्रतिशत पिछड़ी, अनुसूचित व सामान्य वर्ग के लोगों को कोई लाभ नहीं मिल रहा है। यह नहीं गरीब विकास से वंचित हैं तथा आए दिन उनका उत्पीड़न भी हो रहा है। जिस पर उन्होंने कहा कि इसका समाधान तभी हो सकता है, जब नगर पंचायत के चारों और कुछ हिंदू बहुल इलाकों को जोड़ा जाए। जिस पर चित्र विधायक ने जनहित को दृष्टिगत रखते हुए मुख्यमंत्री से सीमा विस्तार की याचिका की।

विधायक ने 4 गांवों का दिया प्रस्ताव
क्षेत्र की जनता के हितों को ध्यान में रखते हुए विधायक बावन सिंह ने क्षेत्र पंचायत कटरा के सीमा विस्तार के लिए 4 ग्राम पंचायत को जोड़ने का प्रस्ताव मुख्यमंत्री को भेजा। जिनमें ग्राम पंचायत बीरपुर कटरा, चरेरा, बाबूपुर व मझौवा हैं।

मझौवा प्रधान ने सीमा विस्तार पर जताई आपत्ति
सीमा विस्तार को लेकर एक तरफ जहां क्षेत्रीय विधायक बावन सिंह के द्वारा प्रयास किया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर सीमा विस्तार में शामिल होने वाले 4 गांवों में से मझौवा गांव की प्रधान प्रेमा देवी के द्वारा सीमा विस्तार पर आपत्ति दर्ज कराते हुए, जिलाधिकारी को पत्र लिखकर सीमा विस्तार से मझौवा गांव को हटाने की मांग भी की गई।

ग्राम प्रधान ने अपने आपत्ति पत्र में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं को दर्शाया
प्रधान ने कहा कि उनके गांव की दूरी कटरा बाजार की सीमा से 2 किलोमीटर सड़क मार्ग पर स्थित है, तथा गांव के मजरे भी काफी दूरी पर स्थित है। उन्होंने कहा कि ग्राम सभा में शहरी विकास वर्तमान में नहीं हैं। प्रधान ने कहा कि गांव को नगर पंचायत में शामिल किया जाना उचित नहीं है, तथा गांव की जनता भी इसका विरोध कर रही है। प्रधान के पत्र पर प्रशासन ने रिपोर्ट में कहा कि, सीमा विस्तार में सम्मिलित किए जाने वाले 4 गांवों में बीरपुर कटरा तथा चरेरा सम्मिलित किए जाने योग्य हैं, वही मझौवा व बाबूपुर सीमा विस्तार के योग्य नहीं है। जिसके बाद मझौवा गांव की प्रधान प्रेमा देवी ने इस मामले को लेकर उच्च न्यायालय में याचिका भी दायर की, जिस पर उच्च न्यायालय ने सुनवाई के दौरान आदेश भी पारित कर दिया।

वादी के अधिवक्ता मनोज मिश्रा ने दी जानकारी
सीमा विस्तार पर मझौवा गांव की प्रधान प्रेमा देवी के द्वारा जताई गई आपत्ति के बाद माननीय उच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई। जिस पर उच्च न्यायालय ने सुनवाई करते हुए शासन के द्वारा जारी की गई, अंतिम अधिसूचना पर जवाब तलब करते हुए अपने समक्ष लंबित वाद को देखते हुए शासन के निर्णय को अपने अधीन कर लिया है। ग्राम प्रधान के विद्वान अधिवक्ता मनोज कुमार मिश्रा ने आज जानकारी देते हुए बताया कि, क्षेत्र पंचायत कटरा के सीमा विस्तार को लेकर उच्च न्यायालय में दायर की गई याचिका में 30 सितंबर को माननीय उच्च न्यायालय ने एक आदेश पारित कर शासन से जवाब तलब किया है। यहीं नहीं शासन के द्वारा अंतिम अधिसूचना जारी करने के बाद उच्च न्यायालय ने याचिका के अंतिम फैसले के बाद ही कार्रवाई करने के लिए शासन को निर्देशित किया है।

सीमा विस्तार कराए जाने पर 20 करोड़ का आएगा खर्चा
अधिवक्ता मनोज कुमार मिश्रा ने बताया कि विधायक बावन सिंह की इच्छा अनुसार सीमा विस्तार कराए जाने पर नगर पंचायत पर ₹20 करोड़ का खर्चा आएगा, वही 10 लाख रुपए की ही वार्षिक आमदनी होगी। जिसकी रिपोर्ट प्रशासन के द्वारा शासन को भेजी गई, जिस पर शासन के विशेष सचिव ने इस रिपोर्ट पर 20 करोड़ के खर्च का औचित्य मांगा। अधिवक्ता ने बताया कि प्रशासन के द्वारा ₹20 करोड़ रुपये के खर्च के रिपोर्ट को शासन स्तर पर सही स्वीकारा गया है। ऐसे में इन गांवों को सीमा विस्तार में शामिल किया जाना पूर्णतया अनुचित होगा। उन्होंने कहा कि फिलहाल अब अंतिम निर्णय माननीय उच्च न्यायालय के अधीन है, ऐसे में उच्च न्यायालय जो आदेश करेगा उसे सभी के द्वारा स्वीकार किया जाएगा।