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जिन्हें मिली सर तन से जुदा धमकी, उन्होंने किया पिंडदान:श्रीकृष्ण जन्मभूमि के पक्षकार, कमलेश तिवारी के दोस्त समेत चार लोग गाजियाबाद में बने सन्यासी

गाजियाबाद2 महीने पहले
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गाजियाबाद के शिव शक्ति धाम डासना में अपना पिंडदान करके सन्यासी दीक्षा लेते चार लोग।

उत्तर प्रदेश में जिन लोगों को 'सर तन से जुदा' करने की धमकियां मिली थीं, उन्होंने आज यानि रविवार को गाजियाबाद के शिव शक्ति धाम डासना में अपना पिंडदान करके सन्यास की दीक्षा ग्रहण कर ली। इसमें लखनऊ के कमलेश तिवारी के मित्र सरोजनाथ, श्रीकृष्ण जन्मभूमि के पक्षकार पंडित राजेशमणि त्रिपाठी, गाजियाबाद के डॉक्टर अरविंद वत्स अकेला समेत झारखंड के रिटायर इंस्पेक्टर रणविजय सिंह भी शामिल हैं।

नरसिंहानंद बोले- सन्यासी का पहला कर्तव्य प्राणों की बलिदानी

नव सन्यासियों को दीक्षा देते हुए महामंडलेश्वर नरसिंहानंद गिरि महाराज ने कहा कि सन्यासी का पहला कर्तव्य ही धर्म की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान करना है। आज शिव शक्ति धाम डासना के दीक्षित सन्यासी पूरे भारतवर्ष में धर्म रक्षा की अलख जगा रहे हैं। इन चारों योद्धाओं के सन्यास लेने से धर्म रक्षा का मार्ग प्रशस्त होगा और इस्लाम के जिहादियों के विनाश का पथ सुनिश्चित होगा।

आज गाजियाबाद के हिन्दी भवन में हो रहे तर्पण महाश्राद्ध के बारे में जानकारी देते यति नरसिंहानंद गिरि।
आज गाजियाबाद के हिन्दी भवन में हो रहे तर्पण महाश्राद्ध के बारे में जानकारी देते यति नरसिंहानंद गिरि।

हिन्दी भवन में लाखों मृत आत्माओं के लिए शांति

पिछले 1300 वर्षों में देश की खातिर शहीद हुए बेनाम हिन्दू लोगों के लिए उप्र के जिला गाजियाबाद में आज 'तर्पण एक महाश्राद्ध' कार्यक्रम हिन्दी भवन लोहियानगर में आयोजित किया जा रहा है। सुबह पहले हवन हुआ और फिर 1008 दीप यज्ञ चल रहा है। इस कार्यक्रम में लाखों मृत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना की जा रही है और फिर उनका तर्पण होगा श्राद्ध का आज आखिरी दिन भी है।

'योद्धाओं को भूलने वालों का नहीं होता भविष्य'
महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद सरस्वती ने कहा, जितने भी अभी तक इस्लाम के जिहाद से लड़ते हुए हमारे हिन्दू सनातनी मारे गए हैं, उनकी आत्मशांति के लिए यज्ञ का आयोजन है। मेरी सभी से अपील है कि उन लोगों का तर्पण करने के लिए आइये, जिन्होंने आपके लिए अपने प्राण दिए हैं। जो कौम, जो लोग समाज के लिए प्राण देने वाले योद्धाओं को भूल जाते हैं, उनका कोई भविष्य नहीं होता।

सुबह हवन और फिर 1008 दीप यज्ञ
अमर बलिदानी मेजर आशाराम त्यागी सेवा संस्थान के महामंत्री अक्षय त्यागी ने बताया, 25 सितंबर यानि रविवार को गाजियाबाद के हिन्दी भवन में सुबह 10 बजे से 'तर्पण एक महाश्राद्ध' कार्यक्रम है। इसमें उन सभी लोगों का तर्पण होगा, जो देश के लिए शहीद हुए। इसके बाद कवि सम्मेलन होगा, जो शाम 4 बजे तक चलेगा। नीरज त्यागी ने कहा, धर्म और राष्ट्र के लिए मर मिटने वाले अमर बलिदानियों को याद करना हमारा नैतिक दायित्व है।

1300 साल ही क्यों?
अक्षय त्यागी बताते हैं, ''भारत में पहला मुस्लिम शासन सातवीं शताब्दी में आया। 711-13 ईस्वी में मुहम्मद बिन कासिम के अधीन बसरा के गर्वनर के भतीजे ने भारत पर हमला किया और सिंघ व मुल्तान पर विजय प्राप्त की। इसलिए हम मानते हैं कि पिछले करीब 1300 साल से हिन्दू समाज के लोग देश के लिए शहीद होते आए हैं। विभाजन की विभीषिका में ही करीब 15 लाख लोग मारे गए थे।''

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