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बेरोजगार खिलाड़ियों का स्किल डवलप करेगा E2 S2 कोर्स:IMT गाजियाबाद में खिलाड़ियों को पांच महीने की ट्रेनिंग देकर बनाएंगे नौकरी लायक

गाजियाबाद2 महीने पहले
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गाजियाबाद के आईएमटी कैंपस में स्पोटर्स पर्सन के लिए स्किल डवलपमेंट कोर्स लॉन्च के मौके पर मंचासीन अतिथि। - Money Bhaskar
गाजियाबाद के आईएमटी कैंपस में स्पोटर्स पर्सन के लिए स्किल डवलपमेंट कोर्स लॉन्च के मौके पर मंचासीन अतिथि।

स्टेट और नेशनल लेवल प्लेयर्स को रोजगार हेतु सक्षम-समर्थ बनाने के लिए गाजियाबाद के IMT कैंपस में मंगलवार को खिलाड़ी रोजगारपरक कौशल संवर्द्धन प्रमाणीकरण कार्यक्रम (E2 S2) लॉन्च हुआ। संस्थान के स्पोटर्स रिसर्च सेंटर प्रभारी डॉ. कनिष्क पांडेय ने कहा, अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को पुरस्कार, नौकरी मिल जाती है लेकिन राज्य और राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी नौकरी की समस्या से जूझते हैं। इन्हीं खिलाड़ियों के सशक्तीकरण के लिए ये कार्यक्रम लॉन्च हुआ है। ऐसे खिलाड़ियों को MS ऑफिस, एडॉप्टबिल्टी स्किल, इफेक्टिव टाइम मैनेजमेंट, प्रॉब्लम सॉल्विंग स्किल, ऑर्गेनाइजेशन स्किल, कॉन्फ्लिक्ट मैनेजमेंट स्किल, प्रेजेंटेशन स्किल में निपुण बनाया जाएगा। कनिष्क पांडेय के अनुसार, किसी भी तरह की नौकरी में आने और सफल होने के लिए खिलाड़ियों को 16 पॉइंट पर अध्ययन कराया जाएगा। इसके बाद वो अपनी पेशेवर, प्रबंधकीय क्षमताओं के आधार पर किसी भी क्षेत्र में नौकरी के लिए दावेदारी प्रस्तुत कर सकते हैं। कार्यक्रम में आईएमटी गाजियाबाद के निदेशक डॉ. विशाल तलवार, विख्यात शिक्षाविद अनिल सहस्रबुद्धे, सत्यपाल सिंह, सुभाष वर्मा, सतीश शिवलिंगम, नवीन कुमार पूनिया, विजय शर्मा, मोहिंदर पाल सिंह, प्रोफेसर सपना पोपली, अली अंसारी आदि मौजूद रहे।

किसने क्या कहा, पढ़िए

  • हॉकी जादूगर मेजर ध्यानचंद के पुत्र अशोक ध्यानचंद ने इस कार्यक्रम में कहा, भारत में अभिभावक बच्चों को खेल से इसलिए भी दूर रखते हैं, क्योंकि खिलाड़ियों के पास रोजगार की संभावनाएं कम होती हैं। आईएमटी गाजियाबाद का ये प्रसास खिलाड़ियों को रोजगार की संभावनाओं को जन्म देगा।
  • पूर्व ओलंपियन इकबाल जफर ने कहा, ये कार्यक्रम भारतीय खेल इतिहास में एक गेम चेंजर साबित होगा। खिलाड़ियों को खेल जीवन समाप्त होने के बाद सरकारी-प्राइवेट नौकरी दिलाने में मदद करेगा।
  • भारतीय हैंडबॉल टीम के उप कप्तान नवीन पूनिया ने कहा, हमारे बीच कई ऐसे राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी हैं जो जीवन यापन के लिए भी संघर्ष कर रहे हैं। वे ठेली-रेहड़ी लगाने या ऑटो चलाने को मजबूर हैं। इस तरह के पाठ्यक्रमों से खिलाड़ियों का स्किल मजबूत होगा और वे अन्य नौकरियां कर पाएंगे।
  • भारत सरकार के पूर्व सचिव रिटायर IAS अजय शंकर पांडेय ने देश के सभी शिक्षण संस्थानों से अपील करते हुए कहा, वे भी इस तरह के पाठ्यक्रम अपने यहां लागू करें ताकि खिलाड़ियों को रोजगार मिल सके।