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गाजीपुर बॉर्डर बना किसानों की बस्ती:हेयर कटिंग और गर्म कपड़ों की दुकानें खुली, हर तंबू को एक-दूसरे से अच्छा बनाने की होड़

गाजियाबाद2 महीने पहलेलेखक: सचिन गुप्ता
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दिल्ली-यूपी के गाजीपुर बॉर्डर पर चल रहे किसान आंदोलन में 1 साल के भीतर काफी कुछ परिवर्तन हुआ है। 26 नवंबर 2020 को किसान ठंड में खुले आसमान के नीचे सोए थे। आज वहां टेंट-तंबू हैं। कई तंबुओं में एयर कंडीशन लगे हैं। अब ठंड आ गई है तो हीटर और ब्लोअर जैसी व्यवस्थाएं भी होने लगी हैं। गीत-संगीत के भरपूर इंतजाम हैं। लंगर की कोई कमी नहीं है।

यहां रहने वाले किसानों को अब हेयर कटिंग और शेविंग के लिए भी दूर नहीं जाना पड़ता। धरनास्थल पर ही कई टेम्प्रेरी दुकानें भी खुल गईं हैं। ठंड आ गई है, लिहाजा गर्म कपड़े भी बिक रहे हैं। कुल मिलाकर गाजीपुर बॉर्डर के धरना स्थल को अब किसानों की बस्ती कहा जा सकता है।

गाजीपुर बॉर्डर पर ठंड को देखे हुए गर्म वस्त्र बिक्री की दुकान लग गई है।
गाजीपुर बॉर्डर पर ठंड को देखे हुए गर्म वस्त्र बिक्री की दुकान लग गई है।

साहित्य से लेकर झंडे-बिल्लों की बिक्री खूब
कुछ किसानों की हॉबी पढ़ाई होती है। उनका ख्याल रखते हुए गाजीपुर बॉर्डर धरनास्थल पर कई लोग साहित्य और तमाम खेती-बाड़ी की किताबें बेचते दिखाई पड़ते हैं। पान-मसाला, बीड़ी, सिगरेट की भी छोटी-छोटी कई टेम्प्रेरी दुकानें हैं। किसान संगठनों के झंडे, बैनर, टोपियां, बिल्ले बेचने के लिए भी करीब 5 से ज्यादा स्टॉल लगे हुए हैं।

ढोल-मजीरे से रागिनी तक

टोलियां अब ढोल-मजीरे की थाप पर किसान आंदोलन से जुड़े गाने गाती हैं
टोलियां अब ढोल-मजीरे की थाप पर किसान आंदोलन से जुड़े गाने गाती हैं

ऑल इंडिया किसान सभा समेत कई किसान संगठनों ने अपनी-अपनी टोलियां बना ली हैं। ये टोलियां अब ढोल-मजीरे की थाप पर किसान आंदोलन से जुड़े गाने गाती हैं, अपनी मांग उठाती हैं और सरकारों को जगाने का प्रयास करती हैं। जबकि गाजीपुर बॉर्डर धरनास्थल के मुख्य मंच पर किसानों के मनोरंजन के लिए कई रागिनी गायक मौजूद रहते हैं जो समय-समय पर रागनियां गाकर समां बांधे रखते हैं।

मुरादाबाद के प्रोफेसर ने बनाई पेंटिंग

मुरादाबाद के महाराजा हरीशचंद्र डिग्री कॉलेज में एसोसिएट प्रोफेसर हैं डॉक्टर नरेंद्र सिंह।
मुरादाबाद के महाराजा हरीशचंद्र डिग्री कॉलेज में एसोसिएट प्रोफेसर हैं डॉक्टर नरेंद्र सिंह।

मुरादाबाद के महाराजा हरीशचंद्र डिग्री कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर डॉक्टर नरेंद्र सिंह भी गाजीपुर बॉर्डर पर आए हुए हैं। उन्होंने एक किसान की पेंटिंग बनाई है। इसमें किसान के एक हाथ में हल है तो दूसरे हाथ में संयुक्त किसान मोर्चा का झंडा। पैरों तले तीन कृषि कानून हैं, जिन्हें काला कानून के रूप में प्रदर्शित किया हुआ है। प्रोफेसर ने इस पेंटिंग के जरिये किसान की दुर्दशा भी व्यक्त की है।

उत्तराखंड से लाए गए हैं पांच ऊंट

उत्तराखंड के निहंग ऊंटों को गाजीपुर बॉर्डर लेकर आए हैं।
उत्तराखंड के निहंग ऊंटों को गाजीपुर बॉर्डर लेकर आए हैं।

उत्तराखंड में पूरनपुर से निहंगों का समूह पांच ऊंट लेकर आया है। ये ऊंट गाजीपुर बॉर्डर के एंट्री गेट पर लाकर बांधे गए हैं। निहंगों का कहना है कि वे जहां भी जाते हैं, घोड़े-ऊंट साथ लेकर चलते हैं। यह उनके कीर्तन का भी हिस्सा हैं। इसलिए घोड़े सिंघु बॉर्डर पर लाए गए हैं और ऊंटों को गाजीपुर बॉर्डर लाया गया है। पूरनपुर से शाहजहांपुर बॉर्डर तक इन्हें बड़े वाहन में लाया गया। शाहजहांपुर से बॉर्डर तक ये पैदल आए हैं। निहंग समूह ने बताया कि एक ऊंट की प्रतिदिन खुराक करीब 20 किलो होती है। इसमें वह चना, चोखर जैसी चीजें खाते हैं। स्थानीय संगत इन ऊंटों की सेवादारी में लगी रहती हैं।

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