पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

राजेश्वर सिंह-असीम अरुण की राह आसान नहीं:मोदी लहर में भी कन्नौज पर सपा ने किया था कब्जा; साहिबाबाद में ढाई लाख ब्राह्मण वोटरों को साधना चुनौती

गाजियाबाद/ कन्नौज8 महीने पहलेलेखक: सचिन गुप्ता
  • कॉपी लिंक
राजेश्वर सिंह और असीम अरुण।

कानपुर पुलिस कमिश्नर पद से वीआरएस लेने वाले असीम अरुण भाजपा के टिकट पर कन्नौज सदर सीट का चुनाव लड़ सकते हैं। वहीं, ED के ज्वाइंट डायरेक्टर पद से VRS लेने वाले राजेश्वर सिंह के गाजियाबाद की साहिबाबाद सीट पर भाजपा से चुनाव लड़ने की चर्चा है। अभी दोनों पूर्व अफसरों के नाम सिर्फ चर्चाओं में हैं। अधिकारिक तौर पर ऐलान होना बाकी है। ऐसे में वर्तमान विधायकों/दावेदारों की टेंशन बढ़ गई है, जिन्हें अपना टिकट कटने का डर है।

पूर्वांचल के 2 लाख वोटर दे सकते हैं ऑक्सीजन
साहिबाबाद सीट वोटरों की संख्या के लिहाज से सबसे बड़ी है। यहां करीब 10 लाख वोटर हैं। इसमें सबसे बड़ी संख्या ब्राह्मणों की करीब ढाई लाख है। डेढ़ लाख मुस्लिम, एक लाख वैश्य, एक लाख एससी, 75 हजार ठाकुर और 50-50 हजार जाट और त्यागी हैं। वर्तमान में भाजपा के सुनील शर्मा विधायक हैं।

अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) के ज्वाइंट डायरेक्टर रहे राजेश्वर सिंह के इस सीट से भाजपा से ताल ठोकने की चर्चाएं हैं। माना जा रहा है कि राजेश्वर के लिए यह सीट आसान नहीं होगी। वह ठाकुर बिरादरी से आते हैं। यहां कुल ठाकुर वोट 75 हजार ही हैं, जो कुल वोटरों का सिर्फ साढ़े 7% है। 2012 और 2017 में इस सीट से ब्राह्मण विधायक चुने गए।

ऐसे में राजेश्वर सिंह के सामने ब्राह्मण वोटरों को साधना चुनौती होगी। हालांकि उनके लिए एक प्लस पॉइंट पूर्वांचल के मतदाता हो सकते हैं, जिनकी साहिबाबाद क्षेत्र में संख्या करीब 2 लाख है। राजेश्वर सिंह खुद सुल्तानपुर जिले से ताल्लुक रखते हैं।

कन्नौज : 1996 के बाद कभी नहीं जीती भाजपा कानपुर पुलिस कमिश्नर पद से VRS लेकर भाजपा के टिकट पर कन्नौज सदर सीट से लड़ने का सपना संजोए असीम अरुण की राह भी आसान नहीं दिख रही। वह खुद को दलित चेहरे के रूप में प्रमोट करना चाहते हैं। इस सीट पर कुल एससी वोटर ही 54,650 हैं। यहां 50,740 मुस्लिम, 31,320 ब्राह्मण, 30,880 यादव, 13,110 ठाकुर, 26,225 लोधी हैं।

मोदी-योगी लहर होने के बावजूद इस सीट पर सपा जीती थी। वर्तमान में यहां से सपा विधायक अनिल दोहरे काबिज हैं। देश की आजादी के बाद से इस सीट पर कुल 17 बार चुनाव हुआ। इसमें 5 बार कांग्रेस, 4 बार सपा और 3 बार भाजपा जीती। जनता दल, जनसंघ और बीकेडी को एक-एक बार जीत मिली। 1985 के बाद कांग्रेस और 1996 के बाद से भाजपा इस सीट पर लौटकर नहीं आई।