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जितेंद्र नारायण उर्फ वसीम रिजवी से बातचीत:बोले- परिवार मुझे नहीं स्वीकार करेगा तो पत्नी-बच्चों का त्याग कर दूंगा, ताउम्र सनातन में रहूंगा

गाजियाबाद5 महीने पहले
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यूपी शिया वक्फ बोर्ड के पूर्व चेयरमैन सैयद वसीम रिजवी ने सोमवार को इस्लाम को अलविदा कह दिया। गाजियाबाद के डासना देवी मंदिर में उन्होंने हिंदू धर्म ग्रहण कर लिया। उन्हें जाति त्यागी मिली है। उनका अब नया नाम जितेंद्र नारायण सिंह त्यागी है। पेश है, उनसे बातचीत के अंश।

सवाल : आपने हिंदू धर्म क्यों स्वीकार किया?
जवाब : श्रीराम जन्मभूमि के मुद्दे पर बयान देने के बाद कहा जा रहा था कि मुझे इस्लाम से निकाल दिया गया है। जब मुझे इस्लाम से खारिज कर दिया गया, तो अब यह मेरी मर्जी है कि मैं किस धर्म को स्वीकार करूं। सनातन धर्म दुनिया का सबसे पहला धर्म है। जितनी अच्छाइयां इसमें हैं, वह किसी दूसरे धर्म में नहीं। इस्लाम कोई धर्म ही नहीं है।

सवाल : क्या आपके इस फैसले को आपका परिवार मानेगा?

जवाब : परिवार को मेरे साथ आना चाहिए। अगर वह मुझे स्वीकार नहीं करते हैं, तो उनका भी त्याग कर दूंगा। मैं ताउम्र सनातन में रहूंगा।

गाजियाबाद के डासना देवी मंदिर में जितेंद्र नारायण सिंह त्यागी उर्फ वसीम रिजवी ने महाकाली की पूजा-अर्चना की।
गाजियाबाद के डासना देवी मंदिर में जितेंद्र नारायण सिंह त्यागी उर्फ वसीम रिजवी ने महाकाली की पूजा-अर्चना की।

सवाल : धर्म परिवर्तन के लिए 6 दिसंबर की ही तारीख क्यों चुनी?
जवाब : 6 दिसंबर को भगवान श्रीराम के जन्मस्थान से बाबरी ढांचा की जमीन मुक्त हुई थी। मेरी कहानी भी भगवान श्रीराम से शुरू होती है। मंदिर निर्माण के लिए मेरा संघर्ष रहा है।

सवाल : आपके इस फैसले से नाराजगी तो नहीं होगी?

जवाब : मुझे इस्लाम से उन्होंने निकाल दिया। उसके बाद मैंने मदरसों, कुरान, मोहम्मद पर बात की। उसके बाद मुझे पूरी तरह इस्लाम से बैन कर दिया। हमारा यह फैसला, अधिकार है कि कहां जाएं और किस रूप में ईश्वर को मानें? हमने अपनी मर्जी से सनातन धर्म को स्वीकारा है।

सवाल : क्या यह सब आपने चुनाव लड़ने के लिए किया है?

जवाब : जो हमारे साथ नहीं हैं, वो चाहे परिवार हो या दोस्त हो, हम धार्मिक हिसाब से उनका त्याग कर देंगे। तमाम लोग मुसलमानों के वोटों की राजनीति कर रहे हैं। आज मेरे कार्यक्रम को वे अपने हिसाब से देख रहे हैं। भगवान महादेव जानते हैं कि मैंने राजनीति से अलग हटकर आज यह काम किया है। चुनाव में उतरने की मेरी कोई तैयारी नहीं है। मैं एक फौजी की तरह मैदान में आया हूं।

यूपी शिया वक्फ बोर्ड के पूर्व चेयरमैन वसीम रिजवी ने इस्लाम छोड़कर हिंदू धर्म ग्रहण कर लिया। इस दौरान नरसिंहानंद गिरि भी मौजूद रहे।
यूपी शिया वक्फ बोर्ड के पूर्व चेयरमैन वसीम रिजवी ने इस्लाम छोड़कर हिंदू धर्म ग्रहण कर लिया। इस दौरान नरसिंहानंद गिरि भी मौजूद रहे।

सवाल : मुस्लिम वोट बैंक पर आपकी क्या राय है?

जवाब : मुसलमान किसी का वोट बैंक नहीं है। मैंने खुद इतने सालों तक यह देखा है। मुसलमान सिर्फ हिंदुत्व के खिलाफ वोट डालता है, न कि किसी पार्टी या दल को। जो कैंडिडेट हिंदुत्व का सपोर्टर होगा, उसको हराने के लिए मुसलमान वोट करेगा। इसलिए, हिंदुओं को भी एकजुट होना चाहिए।

सवाल : आपने त्यागी बिरादरी ही क्यों अपनाई?
जवाब : डासना देवी मंदिर के पीठाधीश्वर जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर नरिसंहानंद गिरि हैं। उनका मूल नाम दीपेंद्र नारायण सिंह त्यागी था। संन्यासी जीवन शुरू करने के बाद उनका नाम नरसिंहानंद पड़ गया। दीपेंद्र नारायण उर्फ नरसिंहानंद गिरि के दूसरे भाई का नाम मृगेंद्र नारायण सिंह त्यागी है। इसी से मिलता-जुलता होने की वजह से मेरा नया नाम जितेंद्र नारायण सिंह त्यागी रखा गया है।

सवाल : नरसिंहानंद गिरि से आपका क्या रिश्ता है?

जवाब : नरसिंहानंद गिरि ने मुझे अपने पिता की दूसरी औलाद माना है। मैं अपनी मृत्यु के बाद सनातन धर्म से अंतिम संस्कार का अधिकार नरसिंहानंद गिरि को पहले ही दे चुका हूं।