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नरसिंहानंद गिरि से बिना मिले चले गए वसीम रिजवी:जिन्होंने कराया धर्मांतरण, रिहाई के बाद उन्हीं से नहीं मिले रिजवी; भाई संग गुपचुप निकले

गाजियाबादएक महीने पहले
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हरिद्वार धर्म संसद में हेट स्पीच के मामले में 13 जनवरी से जेल में बंद वसीम रिजवी उर्फ जितेंद्र नारायण सिंह त्यागी 19 मई को जमानत पर रिहा हो गए। इसके बाद वह अपने छोटे भाई के साथ घर चले गए। रिहाई पर उनके स्वागत के लिए महामंडलेश्वर नरसिंहानंद गिरि अपनी टीम के साथ दो दिन से हरिद्वार में डेरा डाले हुए थे। यह पता होने के बावजूद वसीम उर्फ जितेंद्र किसी से मिले तक नहीं और गुपचुप तरीके से निकल गए। वसीम रिजवी को सनातन धर्म ग्रहण कराने में बड़ी भूमिका निभाने वाले नरसिंहानंद गिरि भी सन्न हैं। वह नहीं समझ पा रहे हैं कि आखिर हुआ क्या?

वसीम रिजवी उर्फ जितेंद्र नारायण सिंह त्यागी 19 मई की दोपहर को हरिद्वार जेल से बाहर आते हुए।
वसीम रिजवी उर्फ जितेंद्र नारायण सिंह त्यागी 19 मई की दोपहर को हरिद्वार जेल से बाहर आते हुए।

धर्मांतरण, पुस्तक विमोचन और जेल जाने तक वसीम के साथ रहे नरसिंहानंद
यूपी शिया वक्फ बोर्ड के पूर्व चेयरमैन वसीम रिजवी लखनऊ में रहते हैं। उन्होंने 6 दिसंबर, 2021 को गाजियाबाद के डासना देवी मंदिर में सनातन धर्म अपनाया था। उनके सारे कर्मकांड महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरि ने पूरे कराए। साथ ही उन्हें नया नाम जितेंद्र नारायण सिंह त्यागी भी दिया। इसके बाद वसीम रिजवी ने अपनी पुस्तक का विमोचन भी नरसिंहानंद गिरि के हाथों कराया था, जिस पर खूब विवाद हुआ।
हरिद्वार में 17 से 19 दिसंबर, 2021 तक चली धर्म संसद में भी दोनों साथ-साथ शामिल भी हुए। हरिद्वार की ज्वालापुर पुलिस ने जब धर्म संसद में हेट स्पीच का मुकदमा दर्ज किया, तो दोनों साथ जेल में बंद रहे। हालांकि नरसिंहानंद गिरि की रिहाई पहले हो गई और वसीम उर्फ जितेंद्र अब 4 महीने बाद 19 मई को रिहा हो पाए। इन बातों से जाहिर होता है कि दोनों के संबंध कितने मधुर थे। साफतौर से यह भी कहा जा सकता है कि यति नरसिंहानंद गिरि की वजह से ही वसीम रिजवी सनातन धर्म में आए थे।

वसीम रिजवी के नहीं मिलने से व्यथित होकर नरसिंहानंद गिरि ने सार्वजनिक जीवन त्याग कर सिर्फ धार्मिक जीवन जीने का ऐलान कर दिया।
वसीम रिजवी के नहीं मिलने से व्यथित होकर नरसिंहानंद गिरि ने सार्वजनिक जीवन त्याग कर सिर्फ धार्मिक जीवन जीने का ऐलान कर दिया।

नरसिंहानंद ने रिहाई पर की थी भव्य स्वागत की तैयारी
यति नरसिंहानंद गिरि की पूरी टीम वसीम उर्फ जितेंद्र की रिहाई के लिए चार महीने से कोशिश कर रही थी। हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में उनके लिए टॉप मोस्ट एडवोकेट हायर किए गए थे। रिहाई से दो दिन पहले नरसिंहानंद गिरि अपनी पूरी टीम के साथ हरिद्वार में डेरा डाले थे। रिहाई के बाद वसीम उर्फ जितेंद्र के हरिद्वार से गाजियाबाद तक भव्य स्वागत की तैयारियां थीं।
यति नरसिंहानंद सरस्वती फाउंडेशन की राष्ट्रीय महासचिव डॉ. उदिता त्यागी ने जमानती मुहैया कराने से लेकर कोर्ट की सारी दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। गुरुवार दोपहर 12 बजे कोर्ट से रिहाई परवाना जेल गया। माना जा रहा था कि शाम तक वसीम उर्फ जितेंद्र की रिहाई होगी। मगर, वह दोपहर 2 बजे ही रिहा हो गए। वसीम उर्फ जितेंद्र को उनके छोटे भाई जेल के बहार से अपनी गाड़ी में लेकर कहीं रवाना हो गए।

वसीम रिजवी ने 6 दिसंबर को गाजियाबाद के डासना देवी मंदिर में सनातन धर्म अपनाया था, फिर वे जितेंद्र नारायण त्यागी बने थे।
वसीम रिजवी ने 6 दिसंबर को गाजियाबाद के डासना देवी मंदिर में सनातन धर्म अपनाया था, फिर वे जितेंद्र नारायण त्यागी बने थे।

रिजवी और उनके भाई का मोबाइल स्विच ऑफ हुआ
यति नरसिंहानंद गिरि को शाम करीब चार बजे पता चला कि वसीम रिजवी रिहा होकर चले गए हैं। उन्होंने फोन मिलाया, तो वह स्विच ऑफ जाता रहा। वसीम रिजवी और उनके छोटे भाई दोनों को यह बात पता था कि स्वागत के लिए नरसिंहानंद गिरि अपनी टीम के साथ रिहाई पर स्वागत करने के लिए पहुंचे हैं। इसके बावजूद वे किसी से मिले तक नहीं और चुपचाप चले गए। अब आपस में उनका संपर्क भी नहीं हो पा रहा है। इससे परेशान होकर यति नरसिंहानंद गिरि ने अब इस्लाम के जिहाद के खिलाफ कहीं भी धर्म संसद नहीं करने और सार्वजनिक जीवन को त्यागने का ऐलान कर दिया है।

हरिद्वार धर्म संसद की हेट स्पीच मामले में 13 जनवरी को वसीम उर्फ जितेंद्र गिरफ्तार हुए और चार महीने जेल में बंद रहे।
हरिद्वार धर्म संसद की हेट स्पीच मामले में 13 जनवरी को वसीम उर्फ जितेंद्र गिरफ्तार हुए और चार महीने जेल में बंद रहे।

हाईप्रोफाइल केस में नए टर्न पर प्रतिक्रियाएं

  • यति नरसिंहानंद सरस्वती फाउंडेशन की राष्ट्रीय महासचिव डॉ. उदिता त्यागी ने कहा, मुझे इस केस में साजिश लगती है। ऐसा लगता है, जैसे जेल के अंदर जितेंद्र नारायण सिंह त्यागी पर उनके परिवार या अन्य लोगों ने किसी तरह का दबाव बनाया हो। संभवत: इसी के चलते वे किसी से बिना मिले अपने घर चले गए हों। हालांकि उदिता त्यागी ने यह भी आशंका जताई है कि शायद स्वास्थ्य कारणों के चलते जितेंद्र नारायण किसी से नहीं मिल पाए हों।
  • डासना देवी मंदिर की महंत एवं अधिवक्ता चेतनानंद सरस्वती ने कहा, मैं खुद अचंभित हूं कि ऐसा कैसे हुआ। जिनकी रिहाई के लिए हम चार महीने से संघर्षरत थे, अचानक वे बिना मिले कैसे चले गए।
  • यति नरसिंहानंद गिरि ने वीडियो बयान जारी करते हुए कहा, हम लोग जितेंद्र नारायण त्यागी को लेने जेल पर आए थे, लेकिन वो हमसे बिना मिले ही चले गए हैं। उनका हमारा यहीं तक का साथ था। जैसा भी सुखद या दुखद उनका अनुभव रहा, उसके लिए मैं पूर्णत: दोषी हूं। मेरी कमजोरी के कारण उन्हें चार महीने तक जेल में रहना पड़ा। इसके लिए मैं खुद को जिम्मेदार मानता हूं। इसलिए मैं अब अपना बचा हुआ जीवन महायज्ञ और गीता के प्रचार-प्रसार में लगाना चाहता हूं। आज के बाद मैं किसी सार्वजनिक जीवन में नहीं हूं।

महंत बोलीं- हम कई बार मिले, पर मनमुटाव जाहिर नहीं हुए
डासना देवी मंदिर की महंत चेतनानंद सरस्वती ने बताया, 'हम अक्सर हरिद्वार जेल में वसीम उर्फ जितेंद्र से मिलने के लिए जाते थे। उन्हें बॉयल फूड्स पसंद थे। इसलिए उनके लिए मशरूम, पनीर, कीवी, सेब आदि फ्रूट्स लेकर जाते थे। अक्सर हमारी उनसे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बात होती थी, लेकिन कभी उन्होंने मनमुटाव जैसी बात जाहिर नहीं होने दी। हां, कई बार उन्हें अपमान महसूस जरूर होता था, जब जेल में मुलाकात के दौरान हम कुर्सी पर बैठते थे और जेल मेन्युअल के हिसाब से वो खड़े रहते थे। ऐसे में रिहाई के बाद उनका किसी से नहीं मिलना, हम सबको हतप्रभ जरूर करता है'।

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