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500 के एक असली पर देते थे तीन नकली नोट:गाजियाबाद-दिल्ली में करोड़ों के नकली नोट खपाए; 34 लाख रुपए के बने-अधबने नोट मिले

गाजियाबाद4 महीने पहले
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दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने तीन युवकों को गिरफ्तार कर गाजियाबाद से नकली नोट बरामद किए। - Money Bhaskar
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने तीन युवकों को गिरफ्तार कर गाजियाबाद से नकली नोट बरामद किए।

गाजियाबाद की प्रिंटिंग प्रेस में नकली नोट छापने वाले तीन आरोपियों को दिल्ली पुलिस ने सोमवार को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया। एक आरोपी मिठाई के डिब्बे बनाने और दो प्रिंटिंग प्रेस के काम से जुड़े हैं। मगर, खर्चे पूरे करने के लिए गलत धंधे से जुड़ गए। पिछले करीब ढाई साल से यह प्रिंटिंग प्रेस चल रही थी। कहा जा रहा है कि मार्केट में अब तक करोड़ों रुपए के नकली नोट खपाए जा चुके हैं। दिल्ली पुलिस को मौके से करीब 34 लाख के बने-अधबने नोट मिले हैं। ये लोग 5 सौ के एक असली नोट पर तीन नकली नोट देते थे।

गाजियाबाद में दो दिन हुई कार्रवाई, तीन गिरफ्तार
दिल्ली पुलिस के DCP क्राइम अमित गोयल ने बताया, 19 और 20 मई को गाजियाबाद में एक फैक्ट्री के भीतर इस प्रिंटिंग प्रेस पर छापा मारा गया था। यह फैक्ट्री लोनी थाना क्षेत्र के ट्रोनिका सिटी इंडस्ट्रियल एरिया में है। इस मामले में कुल तीन लोगों की गिरफ्तारी हुई है। उनकी पहचान राजपाल निवासी मौजपुर दिल्ली, अजीम अहमद निवासी मौजपुर दिल्ली और आशीष जैन निवासी उस्मानपुर दिल्ली के रूप में हुई है।

इस प्रिंटिंग प्रेस में नकली नोटों की छपाई हो रही थी।
इस प्रिंटिंग प्रेस में नकली नोटों की छपाई हो रही थी।

कंप्यूटर, प्रिंटर, डाई मशीन सील
पुलिस ने सबसे पहले आशीष जैन को दिल्ली में नकली नोट चलाते हुए पकड़ा। उससे पांच-पांच सौ के डेढ़ लाख रुपए के नकली नोट मिले। पूछताछ में पुलिस को इस प्रिंटिंग प्रेस का पता मिला। जिसके बाद वहां जाकर कार्रवाई की गई। प्रिंटिंग प्रेस से पांच-पांच सौ के 926 तैयार नोट मिले। जबकि 30 लाख रुपए कीमत के नोट तैयार होते हुए पाए गए, जो अधूरे थे। पुलिस ने यहां से कंप्यूटर, प्रिंटर, डाई मशीन, बने-अधबने नोट, स्याही आदि सामान सील कर दिया।

प्रेस में छपते थे सिर्फ पांच सौ के नोट
DCP ने बताया कि किसी व्यक्ति द्वारा पांच सौ रुपए का एक असली नोट देने पर प्रिंटिंग प्रेस से उसको तीन नकली नोट दिए जाते थे। यह गिरोह सिर्फ पांच सौ रुपए के नकली नोट इसलिए छापता था, क्योंकि वह मार्केट में भारी मात्रा में चलन में है। दुकानदार भी बिना जांच-पड़ताल किए उसे आसानी से रख लेता है। दो हजार का नोट छापने पर उसकी जांच होने की आशंका रहती है।

मोटा पैसा कमाने की लालसा में इस धंधे में कूदे
10वीं पास आशीष जैन अपने घर के पास ही मिठाई के डिब्बे बनाने का काम करता है। इस तरह वह प्रिंटिंग प्रेस चलाने वाले राजपाल उर्फ राजू के संपर्क में आया। अजीम भी प्रिंटिंग प्रेस संचालक है, इसलिए वह पहले से राजू से संपर्क में था। इस तरह तीनों ने अच्छे पैसे कमाने का आइडिया बनाया और नकली नोट छापने लगे। पता चला है कि वह दिल्ली-एनसीआर के छोटे-छोटे कस्बों, शहरों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में ये नकली नोट चला रहे थे।

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