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US बेस्ड एडफिस कंपनी ध्वस्त करेगी सुपरटेक एमराल्ड के टावर:नोएडा प्राधिकरण और CBRI की देखरेख में होगा काम, डायवर्जन का भी देना होगा प्लान

नोएडा5 महीने पहले
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टावर गिराने का कार्य एडफिस कंपनी सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (CBRI) व नोएडा प्राधिकरण की देखरेख में करेगी। - Money Bhaskar
टावर गिराने का कार्य एडफिस कंपनी सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (CBRI) व नोएडा प्राधिकरण की देखरेख में करेगी।

नोएडा के दोनों टावरों को ध्वस्त करने के लिए सुपरटेक ने यूएसए बेस्ड एडफिस कंपनी को काम अवार्ड किया है। इस पर प्राधिकरण ने सहमति दे दी है। टावर गिराने का कार्य एडफिस कंपनी सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (CBRI) व नोएडा प्राधिकरण की देखरेख में करेगी।

इसके लिए कंपनी ने यातायात विभाग, एक्सप्लोसिव को स्टोर करने और उसे प्रयोग करने की अनुमति, प्रदूषण विभाग से एनओसी लेने की कवायद शुरू कर दी है। साथ ही कंपनी को यातायात डायवर्जन का प्लान भी देने होगा। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में 17 जनवरी तक कंपनी आवार्ड कर जवाब देने के लिए कहा था।

जोहान्सबर्ग में ध्वस्त कर चुकी है 108 मीटर ऊंची इमारत

कंपनी दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग में 108 मीटर ऊची इमारत को ध्वस्त कर चुकी है। इस इमारत की दूसरी इमारत से दूरी 8 मीटर थी। जोकि काफी पेचीदा काम था। यहा भी यही स्थिति है। सियान और एपेक्स दोनों टावरों की ऊंचाई 100 मीटर है और अन्य टावर से दूरी 9 मीटर की है। अधिकारियों ने बताया कि दोनों की संरचनात्क स्टडी एक जैसी है। इसके अलावा कंपनी कोच्चि में भी इमारत को ध्वस्त कर चुकी है।

3० नवंबर तक ध्वस्त किए जाने थे दोनों टावर

सुप्रीम कोर्ट ने 31 अगस्त 2021 को दोनों टावरों को ध्वस्त करने के लिए 30 नवंबर तक का समय दिया था। टावर तय समय में ध्वस्त नहीं किए जा सके। प्राधिकरण व सुपरटेक दोनों ही इस मामले में अपना जवाब सुप्रीम कोर्ट में जमा कर चुकी है।

टावर ध्वस्तीकरण के लिए देना था जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने 31 अगस्त 2021 को सुपरटेक के दोनों टावरों सियान और एपेक्स को ध्वस्त करने के लिए 3० नवंबर तक का समय दिया था। टावर तय समय में ध्वस्त नहीं किए जा सके। बहरहाल सुप्रीम कोर्ट ने प्राधिकरण को 17 जनवरी तक अपना जवाब देने के लिए कहा था। इसी के चलते सुपरटेक ने रविवार को कंपनी को कार्य अवार्ड कर दिया।

252 बायर्स को 12 प्रतिशत ब्याज के साथ देनी है धनराशि

तय समय बीतने के बावजूद फ्लैट 252 खरीदारों को 12 प्रतिशत ब्याज के साथ रुपये नहीं लौटाए जा सके हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार सुपरटेक ग्रुप को 30 अक्तूबर तक 252 खरीदारों को 12 प्रतिशत ब्याज के साथ रकम लौटानी थी। यह रकम करीब 100 करोड़ रुपये से अधिक बैठ रही थी। इसके चलते ग्रुप के अधिकारी पिछले दो माह से प्रयास में जुटे थे कि इन खरीदारों को वह ग्रुप के दूसरे प्रोजेक्ट में यूनिट देकर समझौता कर सकें लेकिन अधिकांश खरीदार अपनी रकम वापस मांग रहे थे।