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नोएडा में घट रहा भूजल:हर साल 1.79 मीटर धंस रहा है जलस्तर; आंकड़े कहते हैं कि हम 44% धरती के अंदर का पानी उपयोग कर रहे

नोएडा2 महीने पहले
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नोएडा में गिरता भू-जल स्तर भविष्य में बड़ा संकट बन सकता है। इसकी वजह 300 वर्गमीटर से अधिक भूखंड में रिचार्ज वेल का नहीं होना और नहीं बनाना है। ऐसे में बारिश का पानी भू-जल स्तर को बढ़ाने की बजाए वह वेस्ट होता दिख रहा है। इसकी एक वजह हाइ राइज सोसाइटी का निर्माण भी है।

मास्टर प्लान-2031 के अनुसार शहर की आबादी 21 लाख होगी। इसके लिए सप्लाई पानी की क्षमता को बढ़ाकर 590 एमएलडी किया जाएगा। वर्तमान में 240 एमएलडी पानी की सप्लाई की जा रही है। यह सप्लाई 16 लाख की आबादी के अनुसार है। लेकिन डिमांड 332 एमएलडी पानी की है। वर्तमान में यहां 45 हार्वेस्टिंग सिस्टम हैं, जिसमें से 30 काम कर रहे हैं। इसके अलावा 40 स्थानों पर नए सिस्टम लगाए जा रहे है।

यह फोटो नोएडा में सड़क पर जलभराव की है।
यह फोटो नोएडा में सड़क पर जलभराव की है।

पानी की मांग को पूरा करने के लिए नोएडा प्राधिकरण 44 प्रतिशत पानी भू-जल के जरिए निकलता है। बाकी गंगा वाटर गाजियाबाद प्रताप विहार प्लांट से आता है। भूजल रिचार्ज की तुलना में 106.90 प्रतिशत पानी का जमीन से दोहन हो रहा है।

उत्तर प्रदेश भूगर्भ जल विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक जिले में सालाना 29233.06 हेक्टेयर मीटर भूजल रिचार्ज होता है। उससे ज्यादा 31251.26 हेक्टेयर मीटर भूजल का दोहन हो रहा है। यदि यही स्थिति रही तो आने वाले समय में नोएडा व आसपास के क्षेत्र में भूजल समाप्त हो जाएगा। अगस्त -2019 में समिति आकलन के अनुसार नोएडा का भू-जल स्तर औसतन 1.79 मीटर प्रतिवर्ष की दर से घट रहा है।

दादरी सेमी क्रिटिकल और जोवर अतिदोहन श्रेणी में

ग्रेटर नोएडा पाई सिग्मा-3 में यह स्थिति और खराब है। यहां प्रतिवर्ष 3.9 मीटर की दर से भू-जल स्तर गिर रहा है। 2019 में बिसरख ब्लाक को अतिदोहन की श्रेणी में शामिल किया गया था। यहां ड्राइंग दर 149.8 प्रतिशत थी, जबकि दनकौर में 99.84 प्रतिशत की ड्राइंग दर के साथ क्रिटिकल श्रेणी रखा गया था। दादरी सेमी-क्रिटिकल श्रेणी में आता है। जेवर में 108.81 प्रतिशत की निकासी दर के साथ ओवर एक्लोएटेड यानी अतिदोहन की श्रेणी में हैं।

नोएडा में बनाया गया रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम
नोएडा में बनाया गया रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम

बारिश के पानी 65 प्रतिशत पानी ही भूजल को रिचार्ज करने के काफी

यूपी में हर साल करीब 700 से 900 एमएम बारिश होती है। नोएडा में पिछले साल 1450 एमएम बारिश रिकॉर्ड की गई। यह सामान्य नहीं है। इसका अधिकांश हिस्सा दूषित हो गया और काफी बह गया। यदि इसका 65 प्रतिशत हिस्सा रिचार्ज कर भूजल को बढ़ाने में किया जाता तो आने वाले समय में भू-जल की समस्या कुछ कम जरूर होती। जबकि पिछले तीन दिनों में नोएडा में करीब 80 एमएम से ज्यादा बारिश हो चुकी है।

एक नजर में नोएडा में भूजल की स्थित

क्षेत्र

20192020
डिग्री कॉलेज28.0630.38
नोएडा थाना फेज-215.3516.53
इलाबांस12.1313.50
सोरखा18.2419.03
सेक्टर-3929.8436.80
नंगला चरणदास17.1518.12

नोट सभी आंकड़े मीटर में है।
एसटीपी में पानी को करते हुए
एसटीपी में पानी को करते हुए

भूजल रिचार्ज के लिए अपनाए जा रहे तरीके.....

  • पुराने खराब पड़े बोरवेल को रिचार्ज वेल में तब्दील किया गया।
  • सेक्टर-54 और सेक्टर-91 में वेटलैंड का निर्माण
  • सभी 300 वर्गमीटर के भूखंडों पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग और रिचार्ज वेल
  • नोएडा में तालाब और वाटर बाडी बनाने का काम जारी

प्राधिकरण अब करेगा 411 MLD पानी शोधित

गिरते भू-जल स्तर स्थिरता लाने के लिए प्राधिकरण लगातार कार्य कर रहा है। 171 एमएलडी शोधित पानी का प्रयोग किया जा रहा है। यह शोधन सेक्टर-50, सेक्टर-54, सेक्टर-123, सेक्टर-168 में बने एसटीपी से किया जा रहा है। इन एसटीपी से कुल 190 एमएलडी सीवरेज को शोधित होता है। इसके अलावा सेक्टर-123 में 80 और सेक्टर-168 में 100 एमएलडी क्षमता के दो एसटीपी और तैयार किए जा रहे हैं। इसके बाद 411 एमएलडी पानी शोधित किया जा सकेगा।