पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Market Watch
  • SENSEX57107.15-2.87 %
  • NIFTY17026.45-2.91 %
  • GOLD(MCX 10 GM)481531.33 %
  • SILVER(MCX 1 KG)633740.45 %

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जयंती स्पेशल:आजादी की जंग को लेकर 1926 में फिरोजाबाद आए थे बापू, लगाए थे इंकलाब जिंदाबाद के नारे; तिलक हाल में बैठकर बनाई थी योजना

फिरोजाबाद2 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जयंती स्पेशल। - Money Bhaskar
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जयंती स्पेशल।

आज राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती पूरे देश में मनाई जा रही है। हाथ में लाठी लेकर अंग्रेजों को इस देश से भगाने वाले राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले में भी लोगों के दिलों में क्रांतिकारी की ज्वाला जगाई थी। यहां उन्होंने इंकलाब जिंदाबाद और अंग्रेजों भारत छोड़ो की आवाज बुलंद की थी। आज उसी स्थान पर विद्यालय का संचालन किया जा रहा है।

गोपनीय बैठक में आए थे गांधी जी

शहर के बाल गोविंद शर्मा बताते हैं कि हमारे बुजुर्गों ने हमें बताया था कि शहर की बहुत ही तंग गली कही जाने वाली बौहरान गली में स्थित तिलक हाल में रात्रि के समय एक गोपनीय बैठक वर्ष 1926 में हुई थी, जिसमें राष्ट्रपिता महात्मा गांधी गोपनीय तरीके भाग लेने आए थे। यहां उन्होंने आजादी की जंग को लेकर रूपरेखा तैयार की थी। बता दें कि आजादी से पहले क्रांतिकारियों और देशभक्तों द्वारा गोपनीय बैठकें की जाती थीं, जिससे अंग्रेजों को उनकी योजना की जानकारी न हो सके।

शहर भर में चले थे आंदोलन

बीजेपी नेता हरी शर्मा बताते हैं कि भारत छोड़ो आंदोलन को लेकर अंग्रेजों के अत्याचारों से आजादी पाने के लिए शहरभर में आंदोलन चले थे, लेकिन बौहरान गली का तिलक भवन गोपनीय बैठकों के लिए प्रयोग किया जाता था। तिलक भवन में आज की तरह कुर्सियां नहीं थीं। वहां जमीन पर टाट-पट्टियां हुआ करती थीं। इशारों में अक्सर आजादी के दीवाने बातचीत किया करते थे। जब भी कोई मीटिंग होती थी तो शहर भर के चुनिंदा लोगों को अति गोपनीय तरीके से बुलाया जाता था। हां, कोई सभा करनी होती थी तो फिर इसकी सूचना सार्वजनिक रूप से दी जाती थी।

महात्मा गांधी को सुनने उमड़ी थी भीड़

70 वर्षीय पंडित रमेश चंद्र शर्मा बताते हैं कि वर्ष 1926 में जब राष्ट्रपिता महात्मा गांधी तिलक भवन में आए थे, तब उन्हें देखने और उनकी बात सुनने के लिए लोगों की भीड़ एकत्रित हुई थी। बापू के बाद तिलक भवन में सन 1940 को गरम दल के नेता कहे जाने वाले सुभाष चंद्र बोस की दस्तक हुई। उन्होंने अपने जोशीले भाषणों से लोगों में जोश भरा तो तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा भवन गूंज उठा था।

तिलक भवन में अब भारती भवन पुस्तकालय है

रमेश चंद्र शर्मा बताते हैं कि गणेश शंकर विद्यार्थी भी एक बार यहां पर कार्यक्रम में भाग लेने आए थे। वर्तमान में तिलक भवन में भारती भवन पुस्तकालय संचालित है। भारत विकास परिषद द्वारा संचालित इस पुस्तकालय में हजारों पुस्तकें विभिन्न विषयों पर आधारित हैं। लोगों को जब भी आजादी की दास्तान हो या फिर किसी विषय की जानकारी लेनी होती है तो इस पुस्तकालय जा पहुंचते हैं।

खबरें और भी हैं...