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फिरोजाबाद के 46 गांवों में खारे पानी की समस्या:30 हजार जनता को चाहिए 'गंगाजल', हर चुनाव में पानी बनता है मुद्दा

फिरोजाबाद5 महीने पहले
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उत्तर प्रदेश का फिरोजाबाद जिला वैसे तो VIP जिला कहलाता है। सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव के तमाम रिश्तेदार इस जिले में रहते हैं। इस जिले की टूंडला विधानसभा की किस्मत में शायद इसके बाद भी जल संकट का सामना करना लिखा हुआ है। यही कारण है कि 75 साल बाद भी 46 गांव में खारे पानी की समस्या से निजात की कहानी की पटकथा अभी तक नहीं लिखी जा सकी।

लगातार गिर रहा जल स्तर

10 साल के अंदर भूगर्भ का जलस्तर 60 फीट से 300 फीट पर पहुंच गया है। वहीं पहले की अपेक्षा आबादी में भी इजाफा हुआ है। पहले जहां शहर की आबादी करीब 10 लाख के करीब थी तो अब 20 लाख से ऊपर पहुंच गई है। ऐसे में पानी की किल्लत बढ़ना लाजमी है। स्थिति को देखते हुए अनुमान लगाया जा सकता है कि गर्मी बढ़ने के साथ ही शहर में पानी की किल्लत भी बढ़ने लगेगी। ये स्थिति शहर के साथ-साथ गांव के लोगों को भी परेशान करेगी।

हर दल को दिया मौका, लेकिन नहीं बुझी प्यास

सुरक्षित सीट टूंडला में सबसे बड़ा मुद्दा खारा पानी है। 40 से ज्यादा गांव पीने के पानी के लिए भी तरस रहे हैं। क्षेत्रीय लोग अब तक सभी दल को मौका दे चुके हैं, लेकिन नहीं हल हो सकी है तो खारे पानी की समस्या। हर बार योजनाएं बनती हैं। कुछ परवान चढ़ती हैं तो कुछ कागजों में ही फंस जाती हैं। ऐसे में जनता एक बार फिर चुनावी वादों के शोर में प्रत्याशियों के बीच उठाने वाली है। फिर वही पुराना सवाल, 'वोट तो मिल जाएंगे, लेकिन क्षेत्र की प्यास कैसे बुझेगी'।

एक-एक किमी दूर से लाते हैं पानी

क्षेत्र में पानी की बड़ी समस्या है। रिजावली में ही देखें तो पूरे गांव में पानी खारा है। इस पानी में दाल भी नहीं पक पाती है। करीब एक किमी दूर वनखंडेश्वर आश्रम से पानी भरकर लाना पड़ता है। करीब-करीब हर गांव में ऐसी ही स्थिति है। हंसराम गढ़ी में गांव के बाहर टीटीएसपी काम भी कर रही है तो पाइप लाइन खराब है। लोगों को सुबह ही उठकर पानी के लिए लाइन में लगना पड़ता है।

साइकिल पर लाते हैं पानी

सच है गांवों में भी विकास हुआ है, लेकिन टूंडला के 46 गांव ऐसे हैं, जहां आज भी वही पुराना भारत बसता दिख रहा है। देहात की पगडंडियों पर साइकिल पर पीछे पानी की बड़ी टंकी, आगे हैंडल पर दोनों तरफ पानी की केन ही टंगी रहती हैं। यह बात जुदा है कि गांव में हैंडपंप भी हैं तो समरसेबल भी, लेकिन कहीं पानी नहीं है तो कहीं पर पानी खारा है।

टीटीएसपी एवं ओवरहेड टंकी फेल

गांवों में टैंक टाइप स्टैंड पोस्ट लगवाई गई थी। इनसे पानी की पाइप लाइन जोड़ी गई थी, लेकिन वह भी कुछ ही वक्त बाद दम तोड़ गई। इसके बाद में कुछ गांवों में ओवरहेड टंकी बनवाकर आसपास के गांवों में सप्लाई का प्रयास किया गया, लेकिन आज यह टंकियां भी शोपीस बनी हुई हैं।

पानी को लेकर होते हैं झगड़े, लगते हैं जाम

कई गांवों में पानी पहुंचाने के लिए आसपास के गांव से मीठे पानी की पाइप लाइन डाली गई है। इसको लेकर भी झगड़े होते हैं। पिछले साल रजावली चौराहा से पहाड़पुर जा रही पाइप लाइन को काटने पर विवाद हो गया। गुस्से में ग्रामीणों ने टूंडला-एटा मार्ग जाम कर पथराव भी किया। पानी कई बार इस क्षेत्र में आंदोलन का सबब बना है।

इन गांवों में है प्रमुख समस्या

राजमल, गोधुआ, मिलिक, पहाड़ीपुर, नारखी धौंकल, नारखी तालुका, गढ़ी हंसराम, गढ़ी अफोह, कायथा, मिलिक, कनवार, लौकी गढ़ी, चिलासनी, तजापुर, रामगढ़, उम्मरगढ़, कुतुकपुर, ऐरई, नगला रैय्या, भैंसा, मंडनपुर, सिकंदरपुर, कातिकी, रिजावली, बाघई, हटी गढ़ी, रती गढ़ी, रूधऊ।

ढाई हजार करोड़ का भेजा है प्रस्ताव

इन 46 गांवों में पेयजल मुहैया कराने के लिए ढाई हजार करोड़ रुपए का प्रस्ताव भेजा गया है। इन क्षेत्रों में जमीन में पानी नहीं है। इसके लिए नरौरा बैराज से पानी लाने की योजना है।

  • 46 गांवों में है खारे पानी की समस्या।
  • 30 हजार के करीब है इन गांवों में आबादी।