पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

फतेहपुर में बाढ़ का कहर:4 और गांवों में घुसा बाढ़ का पानी, कुल 10 गांव बाढ़ से प्रभावित; सुरक्षित स्थानों की तरफ जा रहे ग्रामीण

फतेहपुर8 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
फतेहपुर में बाढ़ का कहर। - Money Bhaskar
फतेहपुर में बाढ़ का कहर।

फतेहपुर जिले के गंगा नदी में आई बाढ़ ने रौद्र रूप ले लिया है। लगातार गंगा नदी के बढ़ रहे जलस्तर के कारण छठवें दिन चार और गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया। बाढ़ के कारण ग्रामीण अपना घरेलू सामान सुरक्षित करते दिखाई दिए। प्रशासन से मदद न मिलने के कारण ग्रामीणों में रोष है। अब तक कुल 10 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। ग्रामीण गृहस्थी का सामान लेकर सुरक्षित ठिकानों पर खुद पहुंच रहे हैं। डीएम के निर्देश के बाद भी बाढ़ चौकियां में तैनात कर्मी नदारद हैं।

मलवां ब्लॉक के आशापुर और अभयपुर ग्राम सभा के गांवों बाढ़ से हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। छठवें दिन भी लगातार पानी का बढ़ना जारी है। चार और गांव पानी से घिर गए हैं। घरों से गृहस्थी का सामान नाव में लादकर ग्रामीण सुरक्षित ठिकानों पर पहुंच रहे हैं। बिंदकी फार्म, सदनहा, कालीकुंडी, बेनी खेड़ा, जाड़े का पुरवा बाढ़ से सर्वाधिक प्रभावित हैं। प्रशासन की तरफ से बनाई गई बाढ़ चौकिंया सिर्फ कागजों में सीमित हैं। किसान अपने संसाधनों का उपयोग कर रहे हैं।

तीन बार गंगा में समा चुका कालीकुंडी गांव

बता दें कि 1978 में गंगा नदी में आई भयंकर बाढ़ में कालीकुंडी गांव पानी में समा गया था। 30 साल पहले दूसरी बार गांव गंगा की पानी में कट गया। तीसरी बार 2005 में कालीकुंडी पूरी तरह से कट गया था। हर बार यहां के ग्रामीण अलग हटकर मकान बनाकर गांव बना लेते हैं। इस बार भी 35 परिवारों के गांव को गंगा में कट जाने का भय सता रहा है। हालांकि सरकार ने पिछली बार बाढ़ से प्रभावित यहां के वाशिंदों को दरियापुर बांगर में आवास और जमीन दे दी थी, लेकिन खेती बाड़ी करने वाले किसान कालीकुंडी में ही करते हैं। ग्रामीण गांव में सब्जी की खेती कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं।

जान जोखिम में डालकर बाढ़ के पानी से निकल रहे ग्रामीण

पर्याप्त नाव की व्यवस्था न होने की वजह से ग्रामीण जान जोखिम में डालकर सड़क के किनारे पहुंच रहे हैं। कालीकुंडी निवासी दिनेश की पत्नी सविता ननद नेहा के साथ सामान लेकर सड़क किनारे दरियापुर पहुंचने के लिए साधन का इंतजार कर रही थीं। धूप से बचने के लिए छाते के नीचे बच्चों को बैठा रखा था। खेतों में झोपड़ी बनाकर रह रहे नया खेड़ा के लक्ष्मण नाव से सामान लाकर साधन की प्रतीक्षा कर रहे थे। बड़ा खेड़ा के कमल नाव से सामान लाकर साधन का इंतजार कर रहे थे।

बाढ़ के चलते कच्ची फसल को उखाड़ रहे किसान

खेत में लगी कच्ची फसल में बाढ़ का पानी भरने की वजह से किसान उखाड़ कर व्यापारियों को औने-पौने दामों में बेच रहे हैं। प्याज, मिर्च, परवल की सब्जी और मसाले की फसलें तोड़कर कानपुर मंडी भेज रहे हैं। किसानों को दो जून की रोटी के लिए कच्ची फसल को उखाड़ कर बेचना पड़ रहा है। बाढ़ के कारण हर तरफ पानी ही पानी नजर आ रहा है।

बाढ़ के पानी को रोकने के लिए बना रहे बंधा

गंगा और पांडु नदी के संयुक्त पानी से फसल बचाने के लिए किसानों ने फावड़ा उठा लिया है। खेतों के चारों तरफ पानी को रोकने के लिए बंधा बना रहे हैं। कई किसानों की खड़ी फसल पानी में डूब कर खेतों में बर्बाद हो गई है। वहीं आगे की फसलों की बुवाई के लिए समय निकल रहा है। ग्रामीणों ने आपस में मिलकर फसल को बचाने का प्रयास शुरू कर दिया है।

नदी पार कर मवेशियों को ला रहे चारा

यहां के किसानों का सब्जी की खेती और मवेशी पालन मुख्य व्यवसाय है। यहां से सब्जी और दूध की सप्लाई फतेहपुर और कानपुर नगर तक होती है। बाढ़ में मवेशियों को चारे की समस्या उत्पन्न हो गई है। अधिकतर किसानों के खेत नदी के दूसरे पार हैं। ग्रामीण पानी से डूबने से बची फसल को काटकर मवेशियों का पेट पाल रहे हैं। गांव के किनारे भूसे में पानी भर गया है, जिससे अब किसानों को मवेशियों के चारा को लेकर चिंता देखी जा रही है।

खबरें और भी हैं...