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फर्रुखाबाद के तालाब का पानी कभी नहीं सूखा:महाभारतकालीन है ये तालाब; पुरातत्व विभाग यहां की मिट्‌टी-ईट की कर रहा जांच

फर्रुखाबाद3 महीने पहले
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नगला नान में बना चिंतामणि रहस् - Money Bhaskar
नगला नान में बना चिंतामणि रहस्

दक्षिण भारत के कई शहरों में भूमिगत जल खत्म होने के कगार पर है। समय रहते यहां जल संरक्षण नहीं होने से ये दशा हुई। भीषण गर्मी के बीच अलग-अलग शहरों में पानी की किल्लत को लेकर तस्वीरें सामने आने लगी हैं। इन हालात के बीच हम आपको फर्रुखाबाद के एक ऐसे तालाब के बारे में बताने वाले हैं। जिसका पानी कभी नहीं सूखता है। ये तालाब महाभारत काल का है।

किदवंती है कि अज्ञातवास के दौरान पांडव ने यहां समय बिताया था। यहीं पर द्रौपदी और पांडव स्नान किया करते थे। तालाब के पास ही भगवान शंकर और हनुमान की पूजा करते थे। फिर मुगलकाल में भी शासकों के लिए ये तालाब पसंदीदा रहा। यहां तालाब के पास बने गुंबदों में उर्दू भाषा के आयतें लिखी हुई हैं। तालाब के अंदर की तरफ पक्की सीढ़ियां बनी हुईं हैं। यहां कितनी सीढ़ियां हैं, ये आज तक नहीं पता चल सका है। क्योंकि, कभी पानी पूरी तरह से घटा ही नहीं। कुछ हद तक इसका श्रेय यहां के लोगों को भी जाता है। क्योंकि आस्था जुड़ी होने के चलते यहां की साफ-सफाई का जिम्मा उन्होंने उठाया हुआ है। अब पुरातत्व विभाग भी यहां की मिट्‌टी की जांच कर रहा है।

पुरातत्व विभाग तालाब की मिट्‌टी-ईट की कर रहा है जांच

ये तालाब का प्रवेश द्वार है। ये वर्ष 2008 में ही तैयार कराया गया था।
ये तालाब का प्रवेश द्वार है। ये वर्ष 2008 में ही तैयार कराया गया था।

गांव के बुजुर्गों ने बताया कि तालाब के किनारे हर साल कार्तिक पूर्णिमा, माघी पूर्णिमा और ज्येष्ठ दशहरा को मेला लगता है। इसमें एटा, मैनपुरी, शाहजहांपुर, हरदोई, बदायूं और कांशीराम नगर आदि जिलों से श्रद्घालु आकर अपने बच्चों का मुंडन और अन्न प्रासन आदि कार्यक्रम करते हैं। नगला नान के गांव के लोग बताते हैं कि तालाब के जीर्णोद्घार के लिए कोई सरकारी मदद नहीं मिली। सिर्फ एक बार पूर्व विधायक कुलदीप गंगवार ने 11 लाख तालाब के लिए दिए थे। वहीं, वर्ष 2008 में यहां काम कराए गए थे। गांव के लोगों ने बताया पुरातत्व विभाग के लोग तालाब की मिट्टी और इसको बनाने में इस्तेमाल हुई ईंट ले जा चुके हैं।

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ये तालाब है फर्रुखाबाद के शमशाबाद ब्लॉक के नगला नान का तालाब आस्था का केंद्र भी है। गांव के लोग कहते हैं कि राजा चिंतामणि को कोढ़ था। वो गंगा नहाने के लिए हरिद्वार जा रहे थे। नगला नान के पास राजा चिंतामणि ने तालाब स्नान किया तो उन्हें कोढ़ में कुछ फायदा मिला। इस पर उन्होंने रोजाना तालाब में स्नान करना शुरू कर दिया। जिससे उनका कोढ़ का रोग ठीक हो गया। इसके बाद राजा ने इसका जीर्णोद्घार कराया। इसका नाम राजा चिंतामणि तालाब पड़ गया। गांव के लोग मानते हैं कि इस तालाब में स्नान करने से त्वचा के रोग दूर होते हैं।

लोगों की आस्था तालाब से जुड़ी है
नगला नान निवासी ह्रदेश अवस्थी ने बताया कि ये तालाब हजारों साल पुराना है। तालाब का पानी कभी नहीं सूखता है। रामदत्त के मुताबिक इस तालाब में नहाने से त्वचा रोग दूर होते हैं। सुरेंद्र कुमार तिवारी ने बताया कि ये तालाब महाभारत कालीन है। इसकी गहराई लगभग 30 फुट है।

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