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गेहूं के निर्यात पर रोक, भंडारण करने वालों को झटका:फर्रुखाबाद में भाव गिरने की आशंका से आढ़ती और किसान परेशान, सरकारी क्रय केंद्रों का रुख करेंगे किसान

फर्रुखाबाद3 महीने पहले
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फर्रुखाबाद में बड़ी संख्या में गेहूं की पैदावार होती है। वहीं किसान फसल को बेच देते हैं। आढ़ती इसका भंडारण कर रहे थे। केंद्र सरकार द्वारा निर्यात पर रोक लगा दी गई है। इससे कीमतें गिरने के आसार बढ़ गए हैं। खुले बाजार में भाव गिरे तो खरीद केंद्र पर बिक्री बढ़ने की उम्मीद है। इससे आढ़तियों सहित किसान परेशान हैं।

सरकारी क्रय केंद्रों पर गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2015 रुपए निर्धारित है। गेहूं की सरकारी खरीद के लिए जनपद में एक अप्रैल से 40 क्रय केंद्र संचालित हैं। बाजार में इन दिनों 2,100 से 2,115 रुपए प्रति क्विंटल गेहूं बिक रहा है। केंद्र सरकार ने शनिवार से गेहूं के निर्यात पर रोक लगा दी है। इससे अब भाव गिरने की आशंका बढ़ गई है। हालांकि रोक के पहले दिन बाजार के भाव नहीं गिरे, लेकिन किसानों के साथ ही आढ़तियों के चेहरे पर चिंता की लकीर जरूर नजर आने लगी है। जिन्होंने अच्छी कीमतों की आस में गेहूं का भंडारण किया था, वह अब जल्द इसे बेचने के लिए बाजार की तलाश में जुट गए हैं।

सरकारी केंद्रों पर खरीद बढ़ने के आसार
खुले बाजार में गेहूं के अगर भाव गिरे तो सरकारी केंद्रों पर खरीद बढ़ सकती है। समर्थन मूल्य 2,015 होने से किसान सरकारी केंद्रों का रुख करेंगे। इससे तय लक्ष्य के करीब पहुंचने की भी उम्मीद रहेगी। फिलहाल गेहूं की बढ़ी कीमतों के लिए कुछ लोग, रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध को जिम्मेदार बता रहे हैं।

कुछ का कहना है कि नया गेहूं आने के बाद भी बाजार में आटे का भाव कम नहीं हुआ। भाव अधिक होने से गेहूं की सरकारी खरीद का आलम यह है कि डेढ़ माह में 21 क्रय केंद्रों पर मात्र एक-एक किसान से और 9 क्रय केंद्रों पर दो-दो किसान से गेहूं खरीदा जा सका है। सभी 40 क्रय केंद्रों पर 36 हजार मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य है। इसके सापेक्ष 14 मई तक 78 किसानों से मात्र 217.11 मीट्रिक टन की गेहूं खरीद की गई है।

जानें क्या बोले आढ़ती
आढ़ती प्रवीण यादव ने बताया, कायमगंज मंडी में गेहूं की आवक के सापेक्ष मांग अधिक होने से भाव बढ़े चल रहे हैं। निर्यात पर रोक लगने से भाव गिरने की आशंका है। इसी मंडी के आढ़ती उमेश गुप्ता का कहना है, क्षेत्र में गेहूं का उत्पादन कम हुआ है। कटरी क्षेत्र के किसान अपना गेहूं कासगंज ले जाते हैं। इससे मंडी में आवक कम रहती है। निर्यात पर रोक लगने से बाजार में गेहूं का भाव गिरेगा।

कमालगंज मंडी के आढ़ती एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय कमल का कहना है कि जनपद में वैसे भी गेहूं का उत्पादन कम होता है। समर्थन मूल्य से बाजार भाव अधिक होने से आढ़त पर थोड़ा बहुत गेहूं आ जाता है। जिसे स्थानीय और आसपास के जनपद की फ्लोर मिल और गुजरात की मंडी में भेज दिया जाता है। गेहूं निर्यात पर रोक लगने से भाव में गिरावट आना तय है।

जानें क्या बोले जिम्मेदार
डिप्टी आरएमओ विवेक सिंह ने बताया, केंद्र भारी किसानों के घर जाकर संपर्क कर रहे हैं। इसके बाद दुर्लक्ष का एक फीसदी भी गेहूं की खरीद न होना चिंता का विषय है। 15 जून तक अधिक से अधिक गेहूं खरीदने का प्रयास किया जा रहा है।

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