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कुत्ते पर मालिकाना हक की लड़ाई, थाने तक आई:घंटों चली पंचायत, एक ने मंदिर में खाई कसम, कहा- यह मेरा 'जॉली' है

एटा (अलीगंज)एक महीने पहले
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मोती शब्द सुनते ही कुछ याद आता है आपको? हम अधिक सस्पेंस न रखते हुए बता दें कि मोती से हम आपको कुत्ते की याद दिलाना चाहते हैं। कई हिंदी फिल्मों में मोती नाम का जांबाज कुत्ता होता है। वह अपने मालिक और उसके परिजनों को बेहद प्यार करता है, उनको हर हाल में बचाता है। मेगास्टार अमिताभ बच्चन की 'मर्द' में अंग्रेजों से लड़ाई में उनका कुत्ता 'मोती' साथ होता है, तो 'सच्चा-झूठा' नामक फिल्म में नायिका की विकलांग बहन अपने कुत्ते 'मोती' के साथ भाई को खोजती है। 'तेरी मेहरबानियां' फिल्म में हीरो तो जैकी श्रॉफ थे, लेकिन असल नायक कुत्ता 'मोती' ही था। वह न केवल अपने मालिक की हत्या का बदला सभी विलेन को मारकर लेता है, बल्कि पुलिस को सबूत भी देता है।

हमने इतनी भूमिका इसलिए दी, ताकि आप कुत्ते और आदमी के बीच के प्यार को याद कर लें। अब बताते हैं आज की कहानी। इस कहानी में ड्रामा भी है, इमोशन भी है और खूब सारी पंचायत भी। तो, चलिए आगे पढ़ते हैं।

कुत्ते के मालिकाना हक को लेकर हुआ झगड़ा

एटा के अलीगंज थाने में कुत्ते पर मालिकाना हक को लेकर घंटों पंचायत चली। लेकिन, इसमें कोई हल नहीं निकला।
एटा के अलीगंज थाने में कुत्ते पर मालिकाना हक को लेकर घंटों पंचायत चली। लेकिन, इसमें कोई हल नहीं निकला।

एटा के अलीगंज में एक पालतू कुत्ते पर मालिकाना हक को लेकर दो लोग आमने-सामने आ गए। मामला थाने पहुंच गया। कई घंटे तक पंचायत चली। लेकिन बात नहीं बनी। तय हुआ कि जो थाना परिसर में बने मंदिर में भगवान की कसम खाकर कुत्ते को अपना बताएगा, डॉगी उसी के साथ जाएगा। यह फैसला होते ही एक व्यक्ति ने मंदिर में कसम खाई। कहा, "यह मेरा जॉली है। इसके बाद डॉगी उसे सौंप दिया गया।"

आठ महीने पहले फर्रुखाबाद से पहुंचा एटा
मामला एटा जिले के अलीगंज कोतवाली क्षेत्र का है। फर्रुखाबाद जिले के पुरौरी गांव के रहने वाले उमेश सक्सेना ने अलीगंज कोतवाली पर शिकायत की। कहा, "आठ महीने पहले उनका पालतू कुत्ता जॉली घर से भाग कर अलीगंज क्षेत्र के फरसोली गांव के प्रधान धर्मपाल सिंह यादव के यहां आ गया था।"

शिकायत पर पुलिस ने धर्मपाल सिंह यादव को कुत्ते के साथ थाने पर बुलाया। इसके बाद कुत्ता लेकर प्रधान थाने पहुंचे। पुलिस असली मालिक का पता लगाने में जुट गई। हालांकि, जॉली धर्मपाल को पहचान रहा था। नाम से बुलाने पर वह उनकी ओर देखने लगता।

धर्मपाल बोले- आठ साल तक हमने जॉली को पाला
दोनों पक्ष कुत्ते पर अपना अधिकार जता रहे थे। धर्मपाल ने कहा, "जॉली उनका पालतू कुत्ता है। वह आठ साल से उसे पाल रहे थे।" वहीं, उमेश सक्सेना का कहना है कि कुत्ता 8 महीने पहले फर्रुखाबाद से भागकर धर्मपाल सिंह यादव के यहां आ गया था।

थाने में बने मंदिर के सामने खड़े होकर कसम खाते धर्मपाल सिंह यादव (कुर्ते में)।
थाने में बने मंदिर के सामने खड़े होकर कसम खाते धर्मपाल सिंह यादव (कुर्ते में)।

थाने पर नहीं बनी बात, मंदिर से निकला निष्कर्ष
थाने पर घंटों चली पंचायत के बावजूद भी कोई निष्कर्ष नहीं निकाला जा सका। दोनों पक्षों के लोगों ने तय किया कि थाना परिसर में बने मंदिर में ईश्वर को साक्षी मानकर जो कसम खाएगा। वही, कुत्ता ले जाएगा। दूसरे पक्ष से उमेश इस बात पर तैयार हो गए।

उमेश ने कहा, "अगर धर्मपाल ईश्वर को साक्षी मानते हुए कसम खाने को तैयार हैं तो हम किसी कानूनी कार्यवाही के बिना जॉली को सौंप देंगे।" उमेश कुमार की शर्त पर धर्मपाल सिंह यादव भी तैयार हो गए।

अलीगंज थाने में पेड़ के पास बैठकर अपने मालिक का इंतजार करता जॉली।
अलीगंज थाने में पेड़ के पास बैठकर अपने मालिक का इंतजार करता जॉली।

बाइक पर बैठकर मालिक संग घर गया जॉली
दोनों पक्ष थाने में बने मंदिर पर पहुंचे, जहां धर्मपाल सिंह यादव ने ईश्वर को साक्षी मानते हुए कसम खाई। कहा, "यह कुत्ता उनका है। वह ही जॉली के असली मालिक हैं।" कसम खाने के बाद पालतू कुत्ता जॉली धर्मपाल सिंह यादव को सौंप दिया गया। जंजीर से मुक्त होने के बाद जॉली धर्मपाल की मोटरसाइकिल पर बैठकर वापस अपने घर चला गया।

जर्मन शेफर्ड प्रजाति का है कुत्ता
जॉली के मालिक धर्मपाल ने बताया कि कुत्ता जर्मन शेफर्ड प्रजाति का है। इसकी उम्र अभी सात साल है। परिवार का यह बहुत ही विश्ववसनीय सदस्य है। जर्मन शेफर्ड आमतौर पर पुलिस बल में भी प्रयोग किया जाता है। इसे बहुत ही समझदार माना जाता है।

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