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चित्रकूट...राम घाट पर भव्य सजावट:अयोध्या जाते समय श्रीराम ने चित्रकूट में किया था पहला दीपदान, दीये जलाने को 50 लाख श्रद्धालु उमड़े

चित्रकूट3 महीने पहले
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चित्रकूट धाम में राम घाट पर भव्य सजावट। - Money Bhaskar
चित्रकूट धाम में राम घाट पर भव्य सजावट।

पूरे देश में आज दिवाली का त्योहार बड़े ही धूम-धाम से मनाया जा रहा है। प्रदेश में राम की नगरी अयोध्या दीपों से सजी है। वहीं राम की वनस्थली चित्रकूट में अयोध्या की तरह दिवाली मनाई जा रही है। चित्रकूट में दिवाली का त्योहार अयोध्या की तरह खास होता है। यहां धनतेरस से भाई दूज तक 5 दिन का उत्सव मनाया जाता है। देश के कोने-कोने से आने वाले लाखों श्रद्धालु मंदाकिनी नदी में दीपदान कर समृद्धि का वरदान मांगते हैं। चित्रकूट में दीपदान के लिए 50 लाख से ज्यादा श्रद्धालु उमड़े हैं। सभी मंदाकिनी नदी के किनारे रामघाट पर दीपदान कर सुख-समृद्धि की कामना कर रहे हैं।

देखें 10 तस्वीरों में चित्रकूट की दिवाली, जहां रामघाट को भव्य तरीके से सजाया गया है।

वनवास काल में भगवान श्रीराम ने साढ़े 11 साल चित्रकूट में गुजार थे। यहां के कण-कण में अब भी श्रीराम हैं। उनके प्रसाद के रूप में कामदगिरि के 4 प्रवेश द्वारों पर कामतानाथ स्वामी विराजमान हैं।
वनवास काल में भगवान श्रीराम ने साढ़े 11 साल चित्रकूट में गुजार थे। यहां के कण-कण में अब भी श्रीराम हैं। उनके प्रसाद के रूप में कामदगिरि के 4 प्रवेश द्वारों पर कामतानाथ स्वामी विराजमान हैं।
लंका पर विजय प्राप्त करने के बाद भगवान श्रीराम ने ने ऋषि-मुनियों के साथ मंदाकिनी नदी में दीपदान कर सबका आभार जताया था। दीपदान करने के बाद वह अयोध्या गए थे।
लंका पर विजय प्राप्त करने के बाद भगवान श्रीराम ने ने ऋषि-मुनियों के साथ मंदाकिनी नदी में दीपदान कर सबका आभार जताया था। दीपदान करने के बाद वह अयोध्या गए थे।
दिगंबर अखाड़ा के महंत दिव्य जीवनदास के मुताबिक, मान्यता है कि आज भी प्रभु श्रीराम दिवाली को चित्रकूट में मंदाकिनी में दीपदान करते हैं। उनके साथ दीपदान की कामना लेकर ही श्रद्धालु आते हैं।
दिगंबर अखाड़ा के महंत दिव्य जीवनदास के मुताबिक, मान्यता है कि आज भी प्रभु श्रीराम दिवाली को चित्रकूट में मंदाकिनी में दीपदान करते हैं। उनके साथ दीपदान की कामना लेकर ही श्रद्धालु आते हैं।
वाल्मीकि आश्रम के पीठाधीश्वर महंत भरतदास का कहना है कि 'चित्रकूट सब दिन बसत, प्रभु सिय लखन समेत', रामचरित मानस की यह चौपाई तपोभूमि का महात्म्य बताने के लिए काफी है। यहां पर प्रभु सब दिन रहते हैं। ऐसे में मंदाकिनी में दीपदान से उनका सानिध्य मिलता है।
वाल्मीकि आश्रम के पीठाधीश्वर महंत भरतदास का कहना है कि 'चित्रकूट सब दिन बसत, प्रभु सिय लखन समेत', रामचरित मानस की यह चौपाई तपोभूमि का महात्म्य बताने के लिए काफी है। यहां पर प्रभु सब दिन रहते हैं। ऐसे में मंदाकिनी में दीपदान से उनका सानिध्य मिलता है।
यूपी और एमपी की सीमा पर चित्रकूट तीर्थ क्षेत्र में आयोजित होने वाले 5 दिवसीय दीपदान मेले में लोक संस्कृति और अनेकता में एकता की झलक दिखाई पड़ेगी। मेले के दौरान होने वाले आयोजन लोक परंपराओं पर आधारित होते हैं।
यूपी और एमपी की सीमा पर चित्रकूट तीर्थ क्षेत्र में आयोजित होने वाले 5 दिवसीय दीपदान मेले में लोक संस्कृति और अनेकता में एकता की झलक दिखाई पड़ेगी। मेले के दौरान होने वाले आयोजन लोक परंपराओं पर आधारित होते हैं।
महिलाएं भी मंदाकिनी में दीपदान करने पहुंचती हैं। महिलाओं ने कामदगिरि भगवान की पूजा कर, कामदगिरि पर्वत की परिक्रमा कर मंदाकिनी में दीपदान किया।
महिलाएं भी मंदाकिनी में दीपदान करने पहुंचती हैं। महिलाओं ने कामदगिरि भगवान की पूजा कर, कामदगिरि पर्वत की परिक्रमा कर मंदाकिनी में दीपदान किया।
श्रद्धालुओं की सुरक्षा में यूपी व एमपी के 4000 से अधिक पुलिसकर्मी डटे हुए हैं। दिवाली पर चित्रकूट में लगने वाला मेला भी खास है।
श्रद्धालुओं की सुरक्षा में यूपी व एमपी के 4000 से अधिक पुलिसकर्मी डटे हुए हैं। दिवाली पर चित्रकूट में लगने वाला मेला भी खास है।
उत्तर प्रदेश के पौराणिक एवं ऐतिहासिक तीर्थ स्थल चित्रकूट में आज दिवाली की अमावस्या पर लाखों श्रद्धालुओं ने मंदाकिनी में डुबकी लगाई। स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने दीपदान भी किया।
उत्तर प्रदेश के पौराणिक एवं ऐतिहासिक तीर्थ स्थल चित्रकूट में आज दिवाली की अमावस्या पर लाखों श्रद्धालुओं ने मंदाकिनी में डुबकी लगाई। स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने दीपदान भी किया।
इस साल दीपदान मेले में सांस्कृतिक रंग देखने को मिला। बुंदेलखंड के प्रसिद्ध लोकनृत्य दिवारी की धूम रही। दिवाली के दूसरे दिन पूरा मेला क्षेत्र मयूरी नजर आएगा।
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मौनियों की टोली मोर पंख और लाठी के साथ नृत्य करती जगह-जगह दिखेंगी। यह बुंदेलखंड का सबसे प्राचीन लोकनृत्य है।
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